कुरुक्षेत्र, 15 दिसम्बर। कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. कैलाश चन्द्र शर्मा ने कहा है कि आज के वर्तमान समय में प्रत्येक व्यक्ति को जीवन में सार्थकता एवं ज्ञान अर्जित करने के लिए गीता का अध्ययन करना आवश्यक है। उन्होंने आगे कहा कि मेरे लिए यह जीवंत ग्रंथ जो समाज एवं भविष्य को आधार प्रदान करता है। गीता एक ऐसा ग्रंथ है जिसमें 700 से अधिक श्लोक निहित हैं परन्तु वर्तमान समय में इसका पालन करना प्रश्र का विषय है। वे शनिवार को श्रीमद्भगवद गीता सदन के सीनेट हॉल में चल रही 3 दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय संगोष्ठी के समापन अवसर पर अंतिम दिन बतौर मुख्यातिथि बोल रहे थे। इस मौके पर कुलपति ने 3 दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय संगोष्ठी की रिपोर्ट का भी विमोचन किया।
कुलपति ने एक विद्वान का उदाहरण देते हुए कहा कि श्रीमद्भगवद गीता मानव समाज का संविधान है। उन्होंने कहा कि इस तरह के समापन समारोह की दो विशेषताएं होती हैं प्रथम इससे महत्वपूर्ण विषय को पुन: स्मरण किया जाता है तथा दूसरी सामूहिक संकल्प तथा रणनीति के तहत् भविष्य का मार्ग सशक्त किया जाता है। उन्होंने देश-विदेश से आए विद्वानों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि श्रीमद्भगद गीता जैसे गंभीर विषय पर मंथन करना इस आयोजन का मुख्य मूल मंत्र है। उन्होंने कहा कि गांधी, सावरकर और बाल गंगाधर तिलक जैसे महान विद्वानों ने भी जीवन की परेशानियों व समस्याओं का हल पाने हेतु गीता का सहारा लिया था। आधुनिक जीवन की सभी समस्याओं का हल श्रीमद्भगवद गीता में निहित है। इसे आचरण व व्यवहार में लाकर ही नए भारत का निर्माण संभव है। नव भारत के निर्माण के लिए हमें श्रीमद्भगवद गीता को अपने जीवन में आत्मसात करते हुए देश व समाज के लिए निस्वार्थ कर्म करना चाहिए। इस मौके पर कुलपति ने अंतर्राष्ट्रीय संगोष्ठी के सफल आयोजन के लिए सभी को बधाई दी।
संगोष्ठी की निदेशिका प्रो. मंजुला चौधरी ने कहा कि इस समारोह में 450 से अधिक शोधार्थियों व वक्ताओं ने भाग लिया है। संगोष्ठी के विभिन्न तकनीकी सत्रों में विदेश व देश के विभिन्न विश्वविद्यालयों से आए विद्वानों ने अपने शोध पत्र प्रस्तुत किए हैं। यह अंतर्राष्ट्रीय संगोष्ठी श्रीमद्भगवद् गीता पर मंथन, चिंतन, शोध सहित सभी नज़रिए से सफल रही है। कुुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय लगातार तीसरे वर्ष अंतर्राष्ट्रीय संगोष्ठी आयोजित करने में सफल रहा है। इसके लिए उन्होंने इस संगोष्ठी से जुड़े सभी अधिकारियों, कर्मचारियों, वक्ताओं, शोधकर्ताओं, मेहमानों का आभार प्रकट किया। उन्होंने कहा कि श्रीमद्भगवद गीता मानव कल्याण का संदेश देती है और इस प्रकार की संगोष्ठी का आयोजन न सिर्फ नई संभावनाएं प्रकट करते हैं अपितु गीता में निहित ज्ञान की भी अंतर दृष्टि प्रदान करते हैं। इस मौके पर संगोष्ठी में आयोजित विभिन्न तकनीकी सत्रों की रिपोर्ट प्रस्तुत की गई। पर्यटन एवं होटल प्रबंधन विभाग के प्रो. एसएस बूरा ने आध्यात्मिक पर्यटन, कामर्स विभाग के प्रो. अजय सुनेजा ने एथिक्स इन कामर्स एंड भगवद्गीता, प्रो. एसके शर्मा, प्रो. केएल गौड, डॉ. सिद्धार्थ भारद्वाज ने रिपोर्ट प्रस्तुत की।
इस मौके पर कुलसचिव डॉ. नीता खन्ना, प्राक्टर प्रो. आरके देसवाल, प्रो. पवन शर्मा, प्रो. नीलम ढांडा, प्रो. नरेन्द्र सिंह, प्रो. बीएस बोदला, प्रो. सुदेश,प्रो. रविभूषण, प्रो. एसएस बूरा, प्रो. मोहिन्द्र चांद, प्रो. एलके गौड, प्रो. विभा अग्रवाल, प्रो. रमेश दलाल, डॉ. सुरजीत व बडी संख्या में शिक्षक, देश विदेश से आए विद्वान, शोधार्थी मौजूद थे।
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