कुरुक्षेत्र, 5 अप्रैल : एक ईंट शहीद के नाम अभियान के संयोजक संजीव राणा ने कहा कि सैनिक और वतन पर जान न्यौछावर करने वाला शहीद किसी एक परिवार, जिला या प्रदेश का नहीं होता वह पूरे देश का गौरव है। उनका सम्मान देश के हर नागरिक को करना चाहिए। एक जवान जब देश की सीमा पर लड़ रहा होता है तो वह यह सोचकर कभी लड़ाई नहीं लड़ता कि वह अपने परिवार, गांव या जिला के लिए लड़ रहा है वह अपने देश की आन-बान और शान के लिए लड़ता है। ऐसे में हर नागरिक का यह दायित्व हो जाता है कि वह समाज के प्रति अपने कर्तव्यों को समझे और देश की सेवा व सेवा में जुटे सैनिकों के लिए हर समय तत्पर रहे। वे शुक्रवार को जिला रेडक्रॉस भवन में आयोजित प्रशिक्षण केंद्र में युवाओं को संबोधित कर रहे थे। इस दौरान राणा को स्मृति स्वरूप रेडक्रॉस के जिला रेडक्रॉस प्रशिक्षण अधिकारी राजेंद्र सैनी, पूर्व सुबेदार मेजर रविंद्र कौशिक, सेवानिवृत्त कैप्टन गुरमेल सिंह ने राष्ट्रीय ध्वज भेंट किया।
इस दौरान सेवानिवृत्त कैप्टन गुरमेल सिंह ने युवाओं को कहा कि वे असुरक्षित ढंग से वाहन चलाकर अपनी जान जोखिम में न डालें। प्रत्येक व्यक्ति की जान बड़ी बहुमूल्य है। गुरमेल सिंहने कहा कि अगर जान देनी है तो देश की खातिर बॉर्डर पर देनी चाहिए सड़क दुर्घटना में नहीं। इस दौरान सेवानिवृत्त सुबेदार मेजर रविंद्र कौशिक ने कहा कि हर एक युवा के दिल में देश भक्ति की भावना है। उसे कभी भी यह सोचने की जरूरत नहीं है कि वह अपने देश की सेवा कैसे करे। देश की सेवा करने के लिए जरूरी नहीं है कि बॉर्डर भी ही जाकर होगी। सफाई करके, ईमानदारी से अपनी नौकरी करके, नशे से दूर रहकर और यातायात नियमों की पालना करके भी देश की सेवा ही कर सकते हैं। पर इस बात को ध्यान में जरूर रखें कि शहीदों की शहादत को जो समाज भुला गया वह अपनी जड़ों से दूर हो जाता है। इसलिए अपने देश की मिट्टी से हमेशा जुड़कर रहें। जिला रेडक्रॉस प्रशिक्षण अधिकारी राजेंद्र सैनी ने कहा कि संजीव राणा जैसे युवाओं के अंदर अभी भी भगत सिंह जिंदा हैं। उन्होंने युवाओं से अपील की कि वे कहीं भी अपना परिचय दें तो पहले देश का नाम ऊंचा रखें।
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