कुरुक्षेत्र. क्यों न हम छोटे छोटे सफर साइकिल की सवारी से तय करें, ईंधन बचाएं, पर्यावरण सुधारें और सड़कों पर गाड़ियों का बोझ कम करें. दूसरे हमारे बुजुर्गों को नहीं होती थी कुछ बीमारी, थे मेहनतकश और साइकिल ही थी उनकी मुख्य सवारी. ये पंक्तियाँ राष्ट्रीय सेवा योजना के स्वयंसेवकों को सम्बोधित करते हुए पर्यावरण प्रहरी एवं डायमंड रक्तदाता डॉ. अशोक कुमार वर्मा ने बच्चों को पर्यावरण संरक्षण, साइकिल की सवारी के महत्व और सड़क सुरक्षा पर व्याख्यान के अंतर्गत कहे. उन्होंने सड़क सुरक्षा पर विस्तृत व्याख्यान देते हुए कहा कि सड़क सुरक्षा की जिम्मेदारी प्रत्येक नागरिक पर है. सड़क सुरक्षा के नियमों के पालन से ही व्यक्ति सड़क पर सुरक्षित चल सकेगा. उन्होंने कहा किसी भी वाहन चालक को अपने वाहन को सड़क पर लाने से पहले 5 बातें सुनिश्चित करनी होंगी. पहला वाहन चालक की आयु निर्धारित नियमों के अनुसार होनी चाहिए अर्थात 18 वर्ष से कम न हो और वाहन को चलाने के लिए उचित ड्राइविंग लाइसेंस हो. दूसरे जिस वाहन को सड़क पर लेकर आप जा रहे हो उस वाहन का पंजीकरण होना चाहिए. तीसरा वाहन का बीमा होना चाहिए. चौथे वाहन के प्रदुषण की जांच का प्रमाण पत्र हो और पांचवा यदि दुपहिया वाहन चालक है तो अपने साथ आईएसआई मार्क का अच्छी गुणवत्ता का हेलमेट हो. उन्होंने कहा सड़क पर वाहन चलाते समय ओवरटेकिंग भी हमेशा धैर्य और सावधानी के साथ अगले वाहन चालक द्वारा साइड दिए जाने पर दाएं तरफ से करें. राष्ट्रीय अपराध अभिलेख ब्यूरो द्वारा जारी आंकड़ों के बारे जानकारी देते हुए कहा कि हमारे देश में प्रतिवर्ष 4 लाख 50 हज़ार सड़क दुर्घटनाएं होती हैं जिनमे करीब 1 लाख 20 हज़ार लोग सड़क दुर्घटनाओं के शिकार होते हैं और 5 लाख व्यक्ति अपंग हो जाते हैं. उन्होंने युवाओं को रक्तदान के लिए भी जागरूक करते हुए कहा कि रक्त की आवश्यकता देश को है न कि सड़कों को. अत: सड़क सुरक्षा के नियमों का पालन करना सभी की जिम्मेदारी है. इस अवसर पर डॉ. रामचंद्र, डॉ. निरुपमा भट्टी, डॉ. संतोष दुबे, मंजू नरवाल आदि उपस्थित रहे.
Post Now India Post Now India