कुरुक्षेत्र, 13 दिसंबर अंतर्राष्ट्रीय गीता महोत्सव के प्रमुख आयोजन स्थल ब्रह्मसरोवर को यहां बनाई जा रही चित्राकृतियां अनूठा रूप प्रदान कर रही हैं। तट के चहुंओर बने परिसर के ऊपरी हिस्से में महाभारत तथा रामायण कालीन चित्राकृतियां बनाई जा रही हैं, जिससे परिसर में प्रवेश करते ही एक अद्भुत अनुभूति का अहसास होने लगता है। गीता जयंती महोत्सव में आने वाले पर्यटकों के लिए चित्राकृतियां बेहद दर्शनीय बनी हुई हैं। हर कोई इन चित्राकृतियों को देखने के लिए ठिठककर रूक जाता है। ब्रह्मसरोवर परिसर को इस बार गीता महोत्सव के रंग में पूरी तरह से रंग दिया गया है। ब्रह्मसरोवर परिसर के चहुंओर बनाये गये स्टॉलों के ऊपर लोगों की नजर जाये बिना नहीं रहती। दरअसल, स्टॉलों के ऊपर भारतीय संस्कृति के दर्शन होते हैं। साथ ही महाभारत व रामायण के विभिन्न प्रसंग जीवंत होते दिखाई देते हैं। बेहद आकर्षक रूप में बनाई गई चित्राकृतियां बोलती प्रतीत होती हैं।
चित्राकृतियों में प्रमुख रूप से महाभारत के प्रसंगों को दर्शाया गया है। इन बड़ी-बड़ी मूर्तियों में कर्ण तथा कुंती के संवाद को दर्शाया गया है तो अर्जुन के साथ हुए कर्ण के युद्ध को भी खुबसूरती के साथ दर्शाया है। बलराम को कर्ण चलाते दिखाया गया है तो गदाधारी महाबली भीम को दुशासन की छाती को चिरते हुए प्रदर्शित किया गया है। अभिमन्यु को चक्रव्यूह में घिरे हुए भी सफलता के साथ प्रदर्शित किया गया है। वहीं युधिष्ठिर को यक्ष के प्रश्रों का उत्तर देते हुए भी दर्शाया गया है।
इन चित्राकृतियों को उत्सुकता से निहार रही बीए प्रथम वर्ष की छात्रा नेहा शर्मा व दीपिका का कहना था कि यदि महाभारत व रामायण की जानकारी लेनी है तो इन चित्राकृतियों के दर्शन कर लो। पेशे से अधिवक्ता विनय छिक्कारा तथा व्यापारी रामकुमार गर्ग ने कहा कि इस प्रकार की चित्राकृतियों के निर्माण के लिए यह बेहद उचित स्थल है। इससे यह ऐतिहासिक स्थल को और दर्शनीय बनेगा। साथ ही युवा पीढ़ी को अपनी संस्कृति से रू-ब-रू होने का भी अवसर मिलेगा।
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