कुरुक्षेत्र 18 दिसम्बर | केन्द्रीय विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने कहा कि विश्व कल्याण के लिए प्रत्येक युवा को जीओ गीता का संदेशवाहक बनना होगा। इसके लिए प्रत्येक युवा को गीता में जीना होगा और प्रत्येक दिन कम से कम पवित्र ग्रंथ गीता के 2 श्लौकों को अपने जीवन में धारण करना होगा। इस पवित्र गं्रथ गीता के 18 अध्यायों के सांझे सूत्र कर्म का जीवन में कभी त्याग नहीं करेंगे और कर्म करने में कभी अहंकार नहीं करेंगे और न ही कभी फल की इच्छा करेंगे। इन तमाम पहलुओं को अपने जीवन का आधार बनाकर मानवता के कल्याण का मार्ग प्रशस्त किया जा सकता है। अहम पहलू यह है कि इस पावन धरा पर तीसरी बार 18 हजार विद्यार्थियों ने पवित्र ग्रंथ गीता के 18 अध्यायों के 18 शलोको का सामूहिक उच्चारण और अनुवाद कर एक बार फिर से नया इतिहास रचने का काम किया है। इन विद्यार्थियों ने पूरे समाज को कर्म, ज्ञान, भक्ति योग के मार्ग पर चलने का संदेश दिया है। इतना ही नहीं इस वर्ष गीतास्थली ज्योतिसर की पावन धरा से 108 ब्राहमणों ने गीता पाठ का उच्चारण किया।
केन्द्रीय विदेश मंत्री सुषमा स्वराज, उड़ीसा के राज्यपाल प्रोफेसर गणेशी लाल, राज्यमंत्री कृष्ण कुमार बेदी, गीता मनीषी स्वामी ज्ञानानंद, योग गुरु स्वामी रामदेव, सुधांशु जी महाराज, स्वामी चिदानंद महाराज ने पवित्र ग्रंथ गीता का पूजन कर किया वैश्विक गीता पाठ कार्यक्रम का शुभारम्भ,उद्घोषणा और शंखनाद के साथ शुरु हुआ वैश्विक गीता पाठ, अंतर्राष्ट्रीय गीता महोत्सव के थीम पार्क में 18 हजार विद्यार्थियों ने किया18श्लोकीय गीता पाठ, गीतास्थली ज्योतिसर की पावन धरा से 108 ब्राहमणों ने किया गीता पाठ
विदेश मंत्री सुषमा स्वराज मंगलवार को अंतर्राष्ट्रीय गीता महोत्सव के दौरान थीम पार्क में आयोजित वैश्विक गीता पाठ कार्यक्रम में मुख्य अथिति के रूप में बोल रही थी। इससे पहले केन्द्रीय विदेश मंत्री सुषमा स्वराज, उड़ीसा के राज्यपाल प्रोफेसर गणेशी लाल, राज्यमंत्री कृष्ण कुमार बेदी,स्वामी ज्ञानानन्द महाराज, योग गुरु स्वामी रामदेव, सुधांशु जी महाराज, चिदानंद मुनि महाराज, आरएसएस के राष्टï्रीय कार्यकारणी सदस्य इन्द्रेश कुमार, आदि अन्य विशिस्ट अथिदियो ने मंत्रोच्चारण और शंखनाद की गूंज तथा गीता पूजन के साथ दीप प्रज्जवलित कर विधिवत रूप से कार्यक्रम का शुभारंभ किया। इसके उपरांत विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने विधिवत रुप से वैश्विक गीता पाठ को शुरु करने की घोषणा की। इससे पहले जिला प्रशासन व शिक्षण संस्थानों तथा तमाम संस्थाओं के सहयोग से अन्तर्राष्ट्रीय गीता महोत्सव में तीसरी बार 18 हजार विद्यार्थियों ने पवित्र गं्रथ गीता के 18 अध्यायों के प्रेरक18 श£ोकों का सामूहिक उच्चारण और अनुवाद कर एक नया इतिहास रचने का काम किया। इस दौरान केन्द्रीय विदेश मंत्री सुषमा स्वराज व स्वामी ज्ञानानंद ने 700 श्लौकों को कंठस्थ करने वाले पानीपत के छात्र हर्षवर्धन जैन को सम्मानित किया। इस विद्यार्थी को बाबा रामदेव की तरफ से 20 हजार रुपए की राशि से भी सम्मानित किया जाएगा।
उड़ीसा के राज्यपाल प्रोफेसर गणेशी लाल ने कहा कि पवित्र ग्रंथ गीता नौजवानों, बुजुर्गो और सैनिकों के लिए प्रेरणादायक हैं। इस ग्रंथ का अनुसरण करते हुए हमेशा स्वार्थो को भूूलकर निस्वार्थ भाव से कार्य करने की जरुरत हैं। कुरुक्षेत्र से सभी को यह तय करके जाना होगा की पवित्र गं्रथ गीता का अनुसरण करते हुए अपनी जिम्मेवारी को निभायेंगे। उन्होंने छात्राओं का आहवान करते हुए कहा कि हमें खुद को 21वीं शताब्दी के लिए तैयार करना होगा। उन्होंने कहा कि पवित्र ग्रंथ गीता विश्व का सर्वमान्य और वंदनीय ग्रंथ और इस ग्रंथ का अनुसरण करना चाहिए। इस ग्रंथ में मानवता अहिंसा और कर्म करने की प्रेरणा मिलती है। इस ग्रंथ को अगर साईंस के साथ जोडक़र देखा जाए तो कोई अतिश्योक्ति नहीं होगी।
हरियाणाा के सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता राज्यमंत्री कृष्ण कुमार बेदी ने कहा कि पवित्र ग्रंथ गीता धर्म अर्थ का ही नहीं मोक्ष प्राप्ति की राह दिखाता है, जीवन की जीने की कला सिखता है, नर से नारायण बनने का मार्ग भी गीता में निहित है। इतना ही नहीं कर्मयोग का संदेश देने वाले इस गं्रथ में विश्व की सभी समस्याओं का समाधान भी शामिल है। उन्होंने कहा कि गीता को पढऩे से लोक कल्याण होगा, इस ग्रंथ से समाज को निष्काम भाव से कर्म करने की प्रेरणा मिलती है। गीता मनीषी स्वामी ज्ञानानन्द महाराज ने सभी को कार्यक्रम के सफल आयोजन की बधाई देते हुए श्री गीता जयंती पर्व क्यों मनाया जाता है विषय पर प्रकाश डालते हुए कहा कि कुरूक्षेत्र की भूमि पर 5155 वर्ष पूर्व अर्जुन को कर्तव्यों का एहसास करवाने के लिए भगवान श्री कृष्ण ने गीता के उपदेश दिए थे।
जब हरियाणा का विद्यार्थी नम्बर एक पर होगा तो भारत भी नम्बर एक स्थान पर होगा। उन्होंने कहा कि पिताजंली योग पीठ की तरफ से गीता के श्लौकों को कंठस्थ करने वाले व्यक्ति को 20 हजार रुपए और कुल वेदों के ज्ञाता को 2 लाख रुपए का ईनाम दिया जाएगा। सुधांशु जी महाराज ने कहा कि पूरे संसार में केवल एक पवित्र ग्रंथ गीता है दूसरा कोई नहीं है, यह एक महान ग्रंथ है, इस ग्रंथ में कायरता को वीरता, अधर्म को धर्म का रास्ता दिखाने का काम करता है। परमात्मा तक पहुंचने का गीता एक पवित्र ग्रंथ है। यह ग्रंथ शक्ति और बल है, इसलिए इसको अपनाना चाहिए और इसके साथ जीना चाहिए। इतना ही नहीं राजनेताओं को पवित्र ग्रंथ गीता जरुर पढऩा चाहिए।
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