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अतंराष्ट्रीय गीता महोत्सव में सजाई पंजाबी जूतियां बनी लोगों की पहली पंसद

कुरुक्षेत्र 20 दिसंबर अपने पूर्वजों की प्रेरणा को अपने जहन में लेते हुए उनके पिछले सैंकड़ों वर्षों से किए जा रहे पंजाबी जूतियों के व्यापार को अंतराष्ट्रीय गीता महोत्सव में कई वषों से लाकर एक अनूठा काम कर रहे है पंजाब के पटियाला निवासी प्रदीप गहलोत। क्राफ्ट मेले में स्टाल नम्बर 31 पर बातचीत करते हुए प्रदीप गहलोत ने बताया कि वह 10 सालों से महोत्सव में पहुंच रहे है तथा हर साल पंजाबी जूतियां पर्यटकों की पहली पंसद बनी हुई है। स्टाल में युवाओं के लिए ही नहीं बुर्जुगों व बच्चों के लिए भी पंजाबी जूतियां उपलब्ध है। तिल्ला जूती के स्टाल के संचालक सचिन कुमार के मुताबिक पंजाबी जूतियां पूरे भारतवर्ष की पंसद है, जिसकी मांग विदेशों में भी की जा रही है।
तिल्ले वाली पंजाबी जूती व वाटर प्रूफ पंजाबी जूतियों की विशेष मांग, दादा व ताऊ से प्रेरणा लेकर व्यापार को आगे बढ़ाने का किया काम
उन्होंने कहा कि पंजाबी जूतियों में तिल्ले वाली व वाटर प्रूफ पंजाबी जूती पर्यटकों को सबसे ज्यादा पंसद आ रही है तथा लोग यहां पर उनकी जमकर खरीदारी कर रहे है। पंजाबी जूती की केवल पंजाब के लोगों की पंसद नहीं है, यहां पहुंच रहे अन्य राज्यों के पर्यटक भी इनकी और आकर्षित होकर इन्हें खरीद रहे है। इन पंजाबी जूतियों की विशेषता यह है कि इन्हें मशीनी कामकाज की बजाए स्वयं शिल्पकार हाथों से तैयार करते है। उन्होंने बताया कि पंजाबी जूतियों की डिमांड विदेशों में भी है तथा उनके द्वारा तैयार की गई जूतियां विदेशों में भी भेजी जाती है। पंजाबी जूतियां बनाने की प्रेरणा उन्हें अपने पूर्वजों से मिली है। पहले उसके दादा जूतियां बनाने का काम करते थे, बाद में उनके ताऊ रामस्वरूप ने इसे जारी रखा। पंजाबी जूतियों में बेहतर कारीगरी के लिए उनके ताऊ को राष्टï्रीय अवार्ड भी मिल चुका है। दादा व ताऊ से प्रेरणा लेते हुए उन्होंने भी इस व्यापार को जारी रखा हुआ है तथा उनके व्यापार को बढ़ाने का काम किया है।
उन्होंने बताया कि पटियाला में उनकी अपनी पूर्वजों की दुकान है जहां से पंजाबी जूतियां बनाकर डिमांड के मुताबिक बाहर भेजी जाती है। इन जूतियों में 200 रूपए से लेकर 1500 हजार रूपए तक की पंजाबी जूतियां शामिल है। पंजाबी जूतियों को दिखाने व बेचनेे के लिए अंतराष्ट्रीय गीता महोत्सव एक बेहतरीन प्लेटफार्म है। अंतराष्ट्रीय महोत्सव में दूर-दराज से पहुंचे लोग या यूं कहें कि विदेशी पर्यटक भी पंजाबी कल्चर की और आकर्षित हो रहे है। महोत्सव में अभी तक उनका 1 लाख 50 हजार रुपए का कारोबार हो चुका है।

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