कुरुक्षेत्र। अब करतारी देवी की पार्थिव देह मैडिकल कॉलेज में रिसर्च के काम आएगी। धर्मनगरी की वशिष्ठ कॉलोनी निवासी 80 वर्षीय करतारी देवी का सोमवार देर रात्रि निधन हो गया। करतारी देवी ने जीते-जी मरणोपरांत शरीर दान के लिए फार्म भरा हुआ था। करतारी देवी की इच्छा को पूरी करते हुए परिजनों ने करतारी देवी का पार्थिव शरीर मैडिकल कॉलेज में रिसर्च हेतु दान किया। करतारी देवी के पौत्र प्रवीण कुमार ने जानकारी देते हुए बताया कि करतारी देवी की मृत्यु के बाद उन्होने डेरा सच्चा सौदा सिरसा में सपंर्क किया तो सिरसा से पहुंची एंबुलैंस के जरिये उनके शरीर को उत्तरप्रदेश के पिल्खुवा के जीएम आयुर्वेदिक कॉलेज एवं अस्तपाल में भेजा गया। मंगलवार दोपहर को परिजनों, रिश्तेदारों व डेरा सच्चा सौदा के अनुयायियों ने करतारी देवी को अंतिम विदाई दी। इस दौरान एंबुलंैस को फूलों से सजाया गया था। अंतिम विदाई देते समय करतारी देवी अमर रहे के नारे लगाए गए। इस मौके पर संदीप अन्नू, धर्मबीर, विरेंद्र, बाबा रामदास, राकेश अग्रवाल, राजेश, राजपाल, राजेंद्र, शंकरदास, रोणकी राम, जनकराज, दलेल सिंह सहित परिजन व रिशतेदार मौजूद रहे।
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जीते-जी भी करती थीें मानवता की सेवा
प्रवीण कुमार ने बताया कि करतारी देवी अनेक वर्षों से डेरा सच्चा सौदा से जुड़ी थीं। वह पौधारोपण व अन्य मानवता भलाई के कार्यों में अग्रणी रहती थी। 5 वर्ष पहले ही उन्होने डेरा सच्चा सौदा में इच्छानुसार शरीर दान का फार्म भरा था। मृत्यु से पहले उन्होने विशेष रूप से कहा था कि उनके शरीर को रिसर्च हेतु दान किया जाए।
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बेटियों व पुत्रवधू ने दिया अर्थी को कंधा
समाज की रूढि़वादी अवधारणाओं को तोड़ते हुए व बेटा-बेटी के भेद को खत्म करते हुए करतारी देवी की बेटियों हरदीप, गुरमीत कौर व किरणबाला एवं पुत्रवधू कमलेश, कशमीर कौर व ज्योति ने करतारी देवी की अर्थी को कंधा देकर उनको अंतिम विदाई दी।
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परिवार को है गर्व
करतारी देवी की पुत्रवधू कमलेश का कहना है कि उनको गर्व है कि उसकी सास ने नेक सोच रखते हुए शरीर दान का फार्म भरा हुआ था। उनके इस फैसले पर फूल चढ़ाते हुए ही परिवार ने करतारी देवी का शरीर दान किया है।
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