कुरुक्षेत्र, 5 जून। गुरुकुल कुरुक्षेत्र में आयोजित पांच दिवसीय आर्यवीर दल राष्ट्रीय प्रशिक्षण शिविर सम्पन्न हुआ। समारोह की अध्यक्षता आर्य प्रतिनिधि सभा हरियाणा के प्रधान मा. रामपाल आर्य ने की। समारोह में युवाओं को सम्बोधित करते हुए उन्होंने कहा कि शिविरों से युवाओं को संस्कार व संस्कृति की शिक्षा मिलती है। इसके साथ-साथ युवाओं का मनोबल व आत्मविश्वास बढ़ता है। युवा शिविर में जहाँ अनेक कलात्मक कार्य सीखते हैं वहीं उनके ज्ञान में भी वृद्धि होती है, इसलिए युवाओं को शिविर में शामिल होकर बुराइयों को दूर करने की प्रेरणा लेनी चाहिए। उन्होंने कहा कि गुरुकुल में प्रवेश पाने के लिए सिफारिश नहीं बल्कि केवल योग्यता ही प्रवेश का एकमात्र आधार है। शिविर में शामिल युवाओं का सौभाग्य है कि उन्हें ऐसी सुसंस्कारित संस्था में सीखने में शुभावसर मिला। मा. रामपाल आर्य ने कहा कि शिविर का उद्देश्य समाज में ऐसी सुन्दर व्यवस्था तथा सद्भावना का निर्माण करना है जिससे प्रत्येक प्राणी अबाध रूप से जीवन जी सके। वर्तमान समाज अन्याय, असमानता, ईर्ष्या, जाति-पाति, वर्ण-भेद, वर्ग-भेद आदि बुराइयों से ग्रस्त हैं। इन बुराइयों को दूर करने के लिए समाज में शिक्षा, समृद्धि व समानता के अतिरिक्त वैज्ञानिक सोच विकसित करना परम् आवश्यक है तभी सच्चे समाज की स्थापना हो सकती है। हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल एवं गुरुकुल कुरुक्षेत्र के संरक्षक आचार्य देवव्रत का विशेष तौर पर आभार व्यक्त करते हुए कहा कि आचार्य ने समाज को एक नई दिशा देने के लिए युवाओं को प्रशिक्षित करने का बीड़ा उठाया ताकि समाज को आदर्श व एक रचनात्मक दिशा मिल सके। हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल ने कहा कि हर युवा को बुराई दूर करने के लिए तत्पर रहना चाहिए। युवा अपने भीतर अच्छे और बुरे की सोच विकसित करें तभी वे जीवन की कला को समझ पाएंगे। शिविर में युवाओं को मर्यादा में रहकर जीवन जीने का तरीका सिखाया गया, यदि वे इस तरीके को समाज में बेहतर ढंग से प्रस्तुत कर पाएंगे तो इस शिविर का उद्देश्य निःसन्देह सार्थक सिद्ध होगा। ।
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