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उप-राष्ट्रीय पल्स पोलियो कार्यक्रम के सफल आयोजन को लेकर प्रशासन की ओर से गठित जिला टास्क फोर्स की मीटिंग उपायुक्त डा. एसएस फुलिया की अध्यक्षता में सम्पन्न हुई

कुरुक्षेत्र 13 जून: उप-राष्ट्रीय पल्स पोलियो कार्यक्रम के सफल आयोजन को लेकर प्रशासन की ओर से गठित जिला टास्क फोर्स की मीटिंग वीरवार को लघु सचिवालय के सभागार में उपायुक्त डा. एसएस फुलिया की अध्यक्षता में सम्पन्न हुई। इस अवसर पर सिविल सर्जन डा. सुखबीर सिंह, उप-सिविल सर्जन डा. एनपी सिंह, डा. अनुपमा, डा. आरके सहाय, डा. योगेन्द्र, डा. संदीप अग्रवाल, डा. अनुपमा सैनी, डा. नीरज, जिला शिक्षा अधिकारी अरुण आश्री, पीओआईसीडीएस नीना कपूर सहित अन्य अधिकारी मौजूद रहे।

इस अवसर पर उपायुक्त डा. एसएस फुलिया ने बैठक की अध्यक्षता करते हुए पल्स पोलियो अभियान से जुड़े विभिन्न विभागों के अधिकारियों को निर्देश दिए कि 0 से 5 वर्ष तक की आयु के हर बच्चे को पोलियो रोधक दवा पिलवाना सुनिश्चित करें, कोई भी बच्चा दवा से वंचित न रहे। उन्होंने आम जनता से अपील करते हुए कहा कि सभी अपने 0 से 5 साल के बच्चों को 16 जून को नजदीकी बूथ पर पहुंचकर पोलियो की बूंदे अवश्य पिलवाएं। उन्होंने कहा कि हर घर में जाकर पूछे की कोई बच्चा है, उसने पोलियो की खुराक ले ली है, अगर बच्चे ने यह खुराक नहीं ली है तो उसे पोलियो की खुराक जरुर पिलाए। इस अवसर पर बैठक में सिविल सर्जन डा. सुखबीर सिंह ने बताया कि प्रदेश के 13 जिलों में 16 जून से 18 जून तक सब-नेशनल पल्स पोलियो अभियान चलाया जाएगा। जिला में 0 से 5 साल तक के 1 लाख 582 बच्चों को दवाई पिलाने के लिए 645 बूथ बनाए गए हैं, जिनकी निगरानी 104 सुपरवाईजर द्वारा की जाएगी। उन्होंने बताया कि जिले में कुल 48 मोबाईल टीमें जिसमें 41 ट्रांजिस्ट टीम तथा कुल 2058 कर्मचारी व अधिकारी इस कार्य में भाग लेंगे। इसके लिए सारी तैयारियां हो चुकी हैं।

उन्होंने बताया कि प्रदेश में जनवरी 2010 कोई पोलियो केस सामने नहीं आया है और भारतवर्ष में जनवरी 2011 से पोलियो का कोई केस नहीं मिला है। इसलिए भारतवर्ष को 11 फरवरी 2014 को पोलियो मुक्त देश घोषित कर दिया गया। उन्होंने बताया कि अब की बार जिले के हाई रिस्क एरिया जैसा कि भट्टे, डेरे, फैक्ट्रियां, राईस मिल्स, स्लम एरिया, झुग्गी-झोपड़ी में रह रहे बच्चों को पोलियो की बूंदे पिलाने पर ज्यादा जोर दिया जाएगा क्योंकि ऐसी जगह पर माईग्रेटरी पोपुलेशन होती है जहां पर पोलियो फैलने का खतरा सबसे अधिक होता है। वर्ष 2010 में हरियाणा तथा वर्ष 2011 में भारतवर्ष का आखिरी पोलियो केस भी माईग्रेटरी पोपुलेशन का ही था। उन्होंने कहा कि हमने अपने पोलियो निगरानी सिस्टम को और अधिक मजबूत बनाया है ताकि किसी अन्य देश से कोई भी पोलियो केस भारत में न आ सके।

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