कुरुक्षेत्र 16 जनवरी – कुरुक्षेत्र जेल अधीक्षक डा. संजय सिंह के प्रयासों से जेल में बंद बंदियों के कल्याण के लिए कोई न कोई केम्प आयोजित करवाया जाता है | पिछले दिनों भी मेडिकल जाँच केम्प भी लगवाया गया था व आज मैडिटेशन केम्प का आयोजन भी इसी कड़ी में करवाया गया | आज आदमी तनाव, गुस्से तथा भाव से भटक कर कई ऐसा कुछ कर बैठता है, जो उसे नहीं करना चाहिए। यही कारण है कि आदमी सोच और तनाव में डूबा रहता है। इन से मुक्ति का मार्ग है योग और ध्यान। यह कहना है कुरुक्षेत्र जेल में ध्यान और योग शिविर का आयोजन करने आये प्रशिक्षक नरेंद्र सिंह आनंद का। उनके साथ सहयोगी के तौर पर श्वेता भी मौजूद थी। दोनों ने कुरुक्षेत्र जेल में बंदियों को ध्यान और योग शिविर के माध्यम से प्रयास किया कि किस प्रकार मन को मेडिटेशन के रिमोट से कंट्रोल किया जा सकता है। उन्होंने इस मौके पर एकत्रित बंदियों को सबसे पहले बताया कि योग तथा ध्यान को अनुभव करें और उसके बाद उनसे विभिन्न कियाएं करवाई। इन क्रियाओं का मकसद अंदर के गुस्से तथा चिंताओं को बाहर निकालना है। बंदियों के योग तथा ध्यान शिविर के उपरांत नरेंद्र आनंद ने बताया कि केरल की माता अमृतानंदमयी बहुत बड़ी संत हैं, उन्ही की प्रेरणा से वह पूरे देश के युवाओं में हनन हो चुके नैतिक मूल्यों को जागृत करने का अभियान चलाये हुए हैं। नरेंद्र आनंद ने बताया कि माता अमृतानंदमयी की प्रेरणा से देश के तनावग्रस्त युवाओं तथा नैतिक मूल्यों की गिरावट को देखते हुए युवाओं को भारतीय संस्कृति तथा सामाजिक धारा में वापिस लाकर भारतीय सभ्यता के प्रति जागरूक करना है। उन्होंने कहाकि ड्रग्स और शराब के नशे में लोग मार्ग भटक रहे हैं। सभी रास्ता भटक चुके लोगों वापिस लाने का मार्ग योग और ध्यान के माध्यम से बताया जा रहा है।
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