कुरुक्षेत्र, 2 जनवरी। कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय की गोयल अवार्ड कमेटी ने वर्ष 2014-15 व वर्ष 2016-17 के लिए दिए जाने वाले गोयल शान्ति पुरस्कार की घोषणा की है। गोयल अवार्ड कमेटी ने इस पुरस्कार के लिए सामाजिक व पर्यावरण की रक्षा में योगदान के लिए विश्व विख्यात एकल फाउंडेशन के संस्थापक श्याम गुप्ता व इको बाबा के नाम से विख्यात संत बलबीर सिंह सीचेवाल को नामांकित किया है।
कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय फरवरी व मार्च माह में एक विशेष सम्मान समारोह का आयोजन कर इन दो महान विभूतियों को सामाजिक क्षेत्र में अतुलनीय योगदान के लिए सम्मानित करेगा। इस पुरस्कार के रूप में दो लाख रूपये की राशि व प्रशस्ति पत्र से इन दोनो विभूतियों को सम्मानित किया जाएगा। गोयल अवार्ड कमेटी के चीफ पैट्रन व कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. कैलाश चन्द्र शर्मा ने वर्ष 2014-15 के गोयल शन्ति पुरस्कार के लिए एकल फाउंडेशन के संस्थापक श्याम गुप्ता व वर्ष 2016-17 के लिए इको बाबा के नाम से विख्यात संत बलबीर सिंह सीचेवाल को गोयल शन्ति पुरस्कार के लिए चयन करने के लिए कमेटी के सदस्यों को बधाई दी है।
कुलपति ने इस सम्मान के लिए चयन व इसे स्वीकार करने के लिए महान शख्सियत श्याम गुप्ता व संत बलबीर सिंह सीचेवाल को बधाई दी है। उन्होंने कहा कि गोयल अवार्ड कमेटी ने इस पुरस्कार के लिए देशभर में विभिन्न क्षेत्रों में कार्य कर रही विभूतियों में से इन दो महान विभूतियों का चयन कर इस अवार्ड की गरिमा को बढ़ाया है। उन्होंने कहा कि कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय जल्द ही एक सम्मान समारोह आयोजित कर इन्हें सम्मानित करेगा।
गोयल अवार्ड कमेटी के संयोजक प्रो. रजनीश शर्मा व गोयल अवार्ड की स्थापना से जुड़े प्रो. एसपी सिंह ने बताया कि वर्ष 2014-15 के लिए शिक्षा व सामाजिक विकास के क्षेत्र में योगदान के लिए एकल फांउडेशन के संस्थापक श्याम गुप्ता को सम्मानित करने का निर्णय लिया गया है। एकल फांउडेशन की स्थापना ग्रामीण व आदिवासी क्षेत्रों के विकास के लिए की गई थी। यह संगठन देशभर में अपने स्कूलों व शिक्षा केन्द्रों के माध्यम से आने वाली पीढिय़ों को शिक्षा व संस्कार देने का कार्य कर रहा है। एकल विद्यालय फाउंडेशन देशभर में 78309 स्कूलों के माध्यम से लाखों विद्यार्थियों को शिक्षित करने का कर रहा है। इस अभियान के साथ देशभर से 6000 स्वयं सेवक, 35 संगठन व 8 विभिन्न एंजेसियां शिक्षा के इस महान यज्ञ में जुड़ी हुई हैं।
समाज में एकल फाउंडेशन के योगदान को देखते हुए ही गोयल अवार्ड कमेटी ने वर्ष 2014-15 के लिए एकल फांउडेशन के संस्थापक श्याम गुप्ता को नामांकित किया है। उन्होंने बताया कि वर्ष 2016-17 के लिए दुनियाभर में इको बाबा के नाम से विख्यात सिख धर्मगुरू संत बलबीर सिंह सीचेवाल को गोयल शान्ति पुरस्कार देने की घोषणा की है। संत बलबीर सिंह सीचेवाल व उनके संगठन ने समाज सेवा व पर्यावरण की रक्षा के लिए देश में अतुलनीय कार्य किया है। उन्हें लोग रास्तेवाला बाबा, सडक़वाले बाबा, बीन वाले बाबा, इको बाबा, रेलवे वाला बाबा के नाम से जानते हैं। 1990 में उन्हांने अपने इस अभियान की शुरूआत की। उन्होंने गांव को जाने वाले रास्तों का निर्माण किया। नई सडक़ों का निर्माण करवाया। पंजाब की काली बेन नदी की सफाई से उसे निर्मल व स्वच्छ बनाने के बाद दुनियाभर में उनके कार्य की चर्चा हुई। देश के पूर्व राष्ट्रपति डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम ने उनके कार्यो की प्रशंसा की व 2006 व 2008 में सीचेवाल में स्थापित सीवरेज़ मॉडल ट्रीटमेंट प्लांट का भ्रमण कर उन्होंने इसकी प्रशंसा की। सामाजिक क्षेत्र में उनके इस योगदान को देखते हुए ही उन्हें 2016-17 के गोयल शान्ति पुरस्कार के लिए नामांकित किया गया है।
गौरतलब है कि कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय की गोयल अवार्ड कमेटी 1992 से देश के जाने माने वैज्ञानिकों को गोयल अवार्ड से सम्मानित करती है। वर्ष 2014 में विश्वविद्यालय ने सामाजिक क्षेत्र में योगदान के गोयल शान्ति पुरस्कार की घोषणा की। वर्ष 2015 में पहली बार सुलभ इंटरनेशनल के संस्थापक डॉ. बिंदेश्वर पाठक को इस सम्मान से सम्मानित किया गया। गोयल अवार्ड अमेरिका में रह रहे एक अप्रवासी भारतीय स्वर्गीय रामस्वरूप गोयल व कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के संयुक्त प्रयास से शुरू किया गया। अब तक इस सम्मान से देश के सैंकडों वैज्ञानिक सम्मानित हो चुके हैं।
काली बेंई नदी की सफाई से चर्चा में आए बाबा बलबीर सिंह सींचेवाल
बाबा बलबीर सिंह सीचेवाल ने अकेले ही अपने दम पर बगैर किसी की मदद के काली बीन नदी को साफ करने का एक ऐसा आंदोलन छेड़ा कि लोग उनके साथ होते गए और बुरी तरह से प्रदूषित और बदबू मारने वाली नदी कलकल करती धाराओं में बहने लगी। काली बेईं नदी होशियारपुर जिले में 160 किलोमीटर क्षेत्र में बहती है।
छह से ज्यादा नगरों और 40 गाँवों के लोग इसमें अपना कूड़ा डालते थे और नालियों का गंदा पानी इसमें मिलाया जाता था। इससे यह एक गंदे नाले में बदल गई थी। नतीजतन आसपास के खेतों को पानी नहीं मिल पाता था। बलबीर सिंह सीचेवाल और उनके साथियों ने इसकी सफाई के लिए अभियान छेड़ा। पहले तो लोग उनका मजाक उड़ाते रहे मगर धुन के पक्के बलबीर ने किसी की परवाह नहीं की। धीरे धीरे लोग खुद उनके साथ जुड़ते गए। जिस नदी के किनारे खड़े होने पर लोगों को नाक पर रुमाल रखना पड़ता था। अब उसी नदी के किनारे लोग पिकनिक मनाते हैं।
वर्ष 2000 में सिख धर्मगुरू बलबीर सिंह सीचेवाल ने इस नदी को साफ करने का संकल्प लिया था। उन्होंने अपने साथी और सहयोगी स्वयं सेवकों के साथ मिलकर इसके तटों का निर्माण किया और नदी के किनारे-किनारे सडक़ें बनाई। सीचेवाल ने लोगों के बीच जनजागृति अभियान चलाया। इसके तहत लोगों से अपना कूड़ा करकट कहीं और डालने को कहा गया। नदी में मिलने वाले गंदे नालों का रुख मोड़ा गया और सबसे बड़ी बात नदी के किनारे बसे लोगों को इसकी पवित्रता और शुद्धि को लेकर जागरुक बनाया गया। उनके संकल्प और मेहनत ने एक नदी को गंदे नाले से स्वच्छ नदी में बदल दिया।
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