कुरुक्षेत्र, 23 जुलाई। कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के भारत रत्न गुलजारी लाल नन्दा केन्द्र में 19 जुलाई शुक्रवार को साप्ताहिक व्याख्यान माला की श्रृंखला में विशिष्ट व्याख्यान गोष्ठी का आयोजन किया गया। मुख्य वक्ता पानीपत के प्राचीन संस्कृति के संशोधक नरेन्द्र पीपलानि ने “मिस्र की चित्रलिपि का अनावरण” विषय में मिस्र देश के हाईरोग्लाइफ लिपियों का रहस्य को उद्धाटित किया। आस्ट्रेलिया, पेरू, ग्रीस के उदाहरण रखते हुए आदिम निवासियों की लिपियों में कैसे भारतीय भाषा, संस्कृति तथा प्रतिबिम्बन का प्रतिबिम्बन है उसका पावर प्वाइंट के माध्यम से प्रतिपादन किया। खास कर मिस्र में उपलब्ध लगभग साडे सात सौ चित्र लिपियों की कुन्जी भारतीय संस्कृति, देवशास्त्र तथा संस्कृत भाषा को उन्होंने भाषा वैज्ञानिक आधार से पुष्ट किया। पर्वत, नदी, समुद्र, नौका, कृषि आदि के प्रतीक चिहृों को हाईरोग्लाइफ चित्र लिपियों में उन्होंने प्रमाणित करने का यत्न किया।
अध्यक्षता करते हुए डॉ. हिम्मत सिन्हा तथा डॉ. एस. पी. शुक्ला ने पीपलानी जी से इस शोध कार्य की सराहना की तथा उस समय के देशों के अन्दर वाणिज्य के आदान-प्रदान तथा अनुवंशिकी के आधार को और तलाशने पर बल दिया। डॉ. सिन्हा ने लिपि एव उच्चारण तथा मूल वेद की संस्कृत भाषा से परवर्ती भाषाओं के भेद पर तथा वेद समकालीन भाषा तथा उपलब्ध आदिवासी जनजातियों की लिपि के अनुसन्धान के लिए पीपलानी का समर्थन किया।
इस शोध गोष्ठी में केन्द्र के निदेशक डॉ. सुरेन्द्र मोहन मिश्र, प्रो. ईश्वर मिश्रल, मिक्षु सत्यप्रेम जिज्ञासु, प्रो. विभा अग्रवाल, डॉ. शशी मिश्रल, डॉ. ब्रजमोहन शर्मा, रविदश्र, मुकेश कौशिक, रवि कुकरेजा, रमेश सुखीजा, हरिदश्र, अंग्रेज शर्मा, विक्रम शर्मा, योगेश, केशव मेहता आदि ने सक्रिय भाग लिया तथा परिचर्चा में सहयोग किया।
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