कुरुक्षेत्र 18 दिसम्बर ज्ञान के बिना समाज की उन्नति सम्भव नहीं है और गीता ज्ञान का भंडार है। गीता मनीषी स्वामी ज्ञानानंद जी द्वारा गीता पर शोध के लिए गीता ज्ञान संस्थानम का निर्माण नई पीढ़ी के लिए प्रेरणादायक साबित होगा। यह विचार योगगुरु रामदेव ने जीओ गीता प्रदर्शनी का अवलोकन करने के पश्चात पत्रकारों से वार्तालाप करते हुए व्यक्त किए।
योग गुरु रामदेव का संस्थानम में पहुंचने पर स्वामी ज्ञानानंद तथा संस्थानम के पदाधिकारियों द्वारा स्वागत किया गया। इस अवसर पर परमार्थ निकेतन ऋषिकेश के स्वामी चिदानंद, राष्टï्रीय स्वयं सेवक संघ की अखिल भारतीय कार्यकारणी सदस्य इन्द्रेश तथा पंजाब से बाबा भूपेन्द्र सिंह भी उपस्थित थे। स्वामी रामदेव ने कहा कि गीता ज्ञान संस्थानम के संस्थापक स्वामी ज्ञानानंद जी महाराज गीता के संदेश को विश्व भर में फैलाने का जो कार्य कर रहे है, वह अद्वितिय है। संस्थान की स्थापना ही गीता के प्रचार-प्रसार व गीता के विभिन्न पहलुओं पर शोध के लिए की गई है। गीता हर वर्ग व हर युग में सभी का मार्गदर्शन करने की क्षमता रखती है। संस्थान के माध्यम से जो शोध किए जाएंगे वह नई पीढ़ी को पवित्र गं्रथ गीता को सहजता से समझने में सहायक होंगे। उन्होंने गीता ज्ञान संस्थानम को भारत का गौरव बताया।
आरएसएस के वरिष्ठï प्रचाकर इन्द्रेश कुमार ने कहा कि कुरुक्षेत्र की पावन धरा पर भगवान श्रीकृष्ण ने गीता का उपदेश दिया था, और आज इसी धरा से गीता ज्ञान संस्थानम उस संदेश को पूरे विश्व में स्थापित करने का प्रयास कर रहा है, जो कि स्वामी ज्ञानानंद जी द्वारा किया जाने वाला सराहनीय कदम है। उन्होंने कहा कि गीता किसी विशेष धर्म की नहीं बल्कि पूरे मानवता का ग्रंथ है। गीता दुनिया का एकमात्र ग्रंथ है जो विश्व की सभी भाषाओं में उपलब्ध है। इसमें हर समस्या का समाधान है। परमार्थ निकेतन ऋषिकेश के स्वामी चिदानंद ने कहा कि प्रतिशोध की धरती पर शोध किया जाना बहुत सराहनीय है। यह संस्थान विश्व में ज्ञान का केन्द्र बनेगा और विश्वभर के गीता प्रेमियों को यहां शोध के लिए सामाग्री उपलब्ध होगी।
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