कुरुक्षेत्र, 24 मार्च 2019: गुरुकुल शिक्षा पद्धति हमारी प्राचीन सभ्यता एवं संस्कृति की परिचायक है। गुरुकुल में ही बच्चे का सर्वांगीण विकास संभव है, जिससे वे आत्मनिर्भर बनकर न केवल अपना जीवन संवारते हैं बल्कि संस्कारित होकर सभ्य समाज व राष्ट्र के निर्माण में अहम भूमिका अदा करते हैं। उक्त शब्द आज गुरुकुल कुरुक्षेत्र के ‘गुरुकुल शिक्षा उत्सव’ में आए छात्रों व अभिभावकों को सम्बोधित करते हुए कार्यक्रम के मुख्य अतिथि राज्यपाल आचार्य देवव्रत ने कहे। इस अवसर पर गुरुकुल के प्रधान कुलवन्त सिंह सैनी, ओएसडी टू गर्वनर डॉ. राजेन्द्र विद्यालंकार, प्राचार्य कर्नल अरुण दत्ता, जगदीश आर्य, महात्मा वेदपालजी, सह प्राचार्य शमशेर सिंह आदि मुख्य रूप से उपस्थित रहे। मंच संचालन मुख्य संजीव आर्य द्वारा किया गया। गुरुकुल शिक्षा उत्सव में इस बार लगभग 8 हजार छात्रों ने भाग लिया। कार्यक्रम के उपरान्त राज्यपाल आचार्य देवव्रत द्वारा गुरुकुल परिसर में नवनिर्मित ‘प्राचार्य आवास’ का भी उद्घाटन किया गया।
आचार्य देवव्रत ने कहा कि ऊंची-ऊंची बिल्डिंग खड़ी करने से कोई संस्थान उत्कृष्ट नहीं हो जाता। शिक्षण संस्थानों में बच्चों की शिक्षा, स्वास्थ्य पर ध्यान देेते हुए उनमें संस्कार पैदा करने चाहिए जो गुरुकुल कुरुक्षेत्र में किया जाता है। उन्होंने कहा कि पिछले कई वर्षों से अभिभावकों के दवाब के चलते उन्होंने गुरुकुल की तर्ज पर गुरुकुल नीलोखेड़ी और लड़कियों के लिए अम्बाला स्थित चमनवाटिका कन्या गुरुकुल की स्थापना की है। इन संस्थानों में आधुनिक शिक्षा के साथ-साथ बच्चों के स्वास्थ्य और संस्कार पर भी विशेष ध्यान दिया जाता है। उन्होंने कहा कि अभिभावकों की मांग के अनुरुप अगले वर्ष और गुरुकुल स्थापित किये जाएंगे। फर्जी गुरुकुलों से सचेत रहने की अपील करते हुए उन्होंने कहा कि केवल गुरुकुल शब्द लगा देने से कोई संस्थान गुरुकुल विचारधारा से परिपूर्ण नहीं हो जाता है, अपने बच्चे के प्रवेश से पूर्व अभिभावक इस बारे में पूरी जानकारी अवश्य प्राप्त करें और ऐसे फर्जी गुरुकुलों से बचें।
इससे पूर्व डॉ. राजेन्द्र विद्यालंकार ने अभिभावकों से गुरुकुल कुरुक्षेत्र को नवीन रूप प्रदान करने में आचार्य देवव्रत जी की अनथक मेहनत और पुरुषार्थ के बारे में विस्तृत चर्चा की। उन्होंने बताया कि किस तरह से आचार्य देवव्रत ने प्राचार्य का पदभार ग्रहण करते ही गुरुकुल का कायाकल्प किया और उसी का परिणाम है कि आज देशभर के लगभग 18 प्रान्तों से हजारों की संख्या में अभिभावक यहाँ अपने बच्चे को प्रवेश दिलाने पहुंचें है। गुरुकुल के प्राचार्य कर्नल अरुण दत्ता ने गुरुकुल की वर्ष 2018 की उपलब्धियों के बारे में अभिभावकों को अवगत कराया। गुरुकुल के भजनोपदेशक जयपाल आर्य एवं जसविन्द्र आर्य ने ईश्वर भक्ति एवं देशभक्ति गीतों की शानदार प्रस्तुति दी। अन्त में गुरुकुल के प्रधान कुलवन्त सिंह सैनी ने कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि पधारने पर आचार्य देवव्रत जी का आभार व्यक्त किया।
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