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जानेमन में दिखा किन्नरों का दर्द, सोनू रोंझिया के निर्देशन ने बटौरी वाहवाही

हरियाणा कला परिषद् मल्टी आर्ट कल्चरल सेंटर अम्बाला मण्डल द्वारा विश्व रंगमंच दिवस के उपलक्ष्य में आयोजित चार दिवसीय राष्टीय नाट्य उत्सव के तीसरे दिन भिवानी से मीरा कल्चरल सोसायटी, भिवानी के कलाकारों द्वारा अभिनीत तथा सोनू रोंझिया के निर्देशन में तैयार नाटक जानेमन का मंचन हुआ। नाटक मंचन के दौरान मुख्यअतिथि के रुप में हरियाणा कला परिषद् के पूर्व उपाध्यक्ष सुदेश शर्मा उपस्थित रहे। कार्यक्रम से पूर्व मैक के क्षेत्रीय निदेशक नागेंद्र कुमार शर्मा व उपाध्यक्ष संजय भसीन ने सुदेश शर्मा का स्वागत करते हुए पुष्पगुच्छ भेंट किया। वहीं नागेद्र शर्मा ने सभी दर्शकों तथा अतिथियों का शाब्दिक स्वागत किया। मंच संचालन विकास शर्मा द्वारा किया गया। किन्नरों के जीवन पर आधारित नाटक जानेमन से किन्नर समाज के लिए लोगों की धारणाओं को बदलने का प्रयास किया गया। नाटक में दिखाया गया कि मुम्बई के एक किन्नर अखाड़े में नज्जो नायक अपनी चेलन के साथ रहती हैै, नज्जो से छोटी किन्नर पन्ना अपनी खुद की चेलन न होने के कारण किसी का बच्चा चुराकर उसे किन्नर बनाने की बात रखती हैं। इस बात से नज्जो पन्ना को लताड़ती हुए कहती है कि आज तक किसी किन्नर ने किसी के बच्चे को नहीं चुराया, हम बच्चे के लिए लोगों को दुआएं देते हैं, बच्चे चुराकर किन्नर जाति के नरक में नहीं धकेलते। पन्ना बिना चेलन बनाए नरक में जाने के डर से रोती रहती है। एक दिन एक लड़का मुकेश अखाड़े में आ जाता है तो नज्जो उसे पन्ना की चेलन बना देती है। मुकेश किन्नर बनने पर बुलबुल के नाम से जाना जाता है। किन्नर समाज की प्रथा अनुसार बुलबुल की शादी एक सेठ से कर दी जाती है लेकिन सेठ बुलबुल को छोड़कर भाग जाता है। नज्जो बुलबुल को दूसरे किन्नरों के साथ पैसा कमाने जाने के लिए कहती है। बुलबुल के मना करने पर नज्जो उसे मारती है तो पन्ना इसे बर्दाश्त नहीं कर पाती और मर जाती है। पन्ना के मरने से नज्जो को गहरा धक्का लगता है और वह खुद को कोसती है।

नाटक के अंतिम दृश्य में नज्जो किन्नर समाज के लिए लोगों की धारणा को कोसती हैै। नाटक में नज्जो का किरदार अरुण शर्मा शानदार ढंग से निभाया। अरुण शर्मा के अभिनय से दर्शक अचम्भे मे थे और अंत तक निर्णय नहीं कर पाए कि किरदार एक पुरुष पात्र द्वारा निभाया जा रहा है। वहीं पन्ना का किरदार सतेद्र सहरावत तथा रेखा का किरदार पुलकित आर्य ने निभाया। नाटक के अंत में हरियाणा कला परिषद् के उपाध्यक्ष संजय भसीन ने पूर्व उपाध्यक्ष सुदेश शर्मा को स्मृति चिन्ह तथा शाॅल भेंटकर सम्मानित किया। इस मौके पर सुदेश शर्मा ने अपने विचार सांझा करते हुए कहा कि हरियाणा कला परिषद् मल्टी आर्ट कल्चरल सेंटर द्वारा किए जा रहे कार्य सराहनीय है, प्रदेश में कला एवं संस्कृति के विस्तार के लिए आयोजित कार्यक्रम सभी को एक सीख देने का कार्य कर रहे हैं। वहीं उन्होंने कलाकारों की सराहना करते हुए कहा कि आमजीवन में हम केवल खुशी के मौके पर ही किन्नर समाज को याद करते हैं लेकिन अन्य दिनों में उनका जीवन कैसा है इस संदर्भ में हम कभी जानने का प्रयास नहीं करते। नाटक ने उनके जीवन को दिखाते हुए समाज को एक आईना दिखाने का कार्य किया है। इस मौके पर शहर के रंगकर्मी तथा कलाप्रेमी उपस्थित रहे।

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