करनाल 11 जनवरी, जिला विधिक सेवाएं प्राधिकरण करनाल की तरफ से स्थाई लोक अदालत पर एक वर्कशॉप का आयोजन किया गया, जिसकी अध्यक्षता सीजेएम एवं जिला विधिक सेवाएं प्राधिकरण के सचिव हितेश गर्ग ने की। इस अवसर पर स्थाई लोक अदालत के चेयरमैन उमेश कुमार और स्थाई लोक अदालत के सदस्य अश्वनी कुमार जुनेजा उपस्थित रहे।
इस वर्कशॉप में अश्वनी कुमार जुनेजा ने पैनल अधिवक्ताओं तथा पैरालीगल वॉलिंटियर को बताया कि पब्लिक यूटीलिटी सर्विस के तहत बीमा कम्पनी सेवाएं , बैंकिंग सेवाएं, बिजली एवं पानी के बिलों से सम्बंधित समस्याएं, पत्राचार तथा टेलीफोन सेवाएं एवं जल, थल एवं वायु सम्बन्धी परिवहन सेवाएं के केस प्री लिटिगेटिव स्टेज पर अर्थात जो न्यायलय के सामने ना रखे गये हो वो सभी मामले आप स्थाई लोक अदालत में रख सकते हैं, जहां पर सभी मामलों का निपटारा आपसी सहमति एवं जल्दी करवाया जाता है। जिसमे लोगों या अपीलकर्ता का समय भी बचता है। स्थाई लोक अदालत के द्वारा निपटाये गए मामलों की आगे अपील भी नहीं की जा सकती।
सीजेएम ने बताया कि इस अदालत में दरख्वास डालने के लिए 1 रूपए की भी फीस नहीं लगती, याचिकाकर्ता स्वंय पेश हो सकता है और वकील करने की भी कोई आवश्यकता नहीं है, फ ैसले का निपटारा ज्यादातर केसों में 2-3 महीनों में हो जाता है। जिन तकनीकी कारणों से अदालतों में मुकदमों के फैसलों में ज्यादा समय लगता है, वह सभी अडचने स्थाई लोक अदालत में नहीं आती। उन्होंने यह भी बताया कि स्थाई लोक अदालत के फैसलों का भी उतना ही महत्व है जितना की किसी दूसरी दिवानी अदालत का। सीजेएम ने क ार्यशाला में उपस्थित सभी पैरालीगल वॉलिंटियरों से अनुरोध किया कि वह स्थाई लोक अदालत की कार्य प्रणाली के बारे में ज्यादा से ज्यादा लोगों को जागरूक करें।
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