कैथल, 9 मार्च: उपायुक्त एवं सहकारी चीनी मिल की अध्यक्षा डॉ. प्रियंका सोनी ने सहकारी चीनी मिल के अधिकारियों को निर्देश दिए कि वे चीनी रिकवरी दर को बढ़ाने के प्रयास करें, ताकि मिल को लाभ में लाया जा सके। मिल द्वारा गन्ना उत्पादक किसानों को मिल परिसर में बेहत्तर सुविधाएं दी जाएं तथा गन्ने का भुगतान भी यथाशीघ्र किया जाए।
उपायुक्त डॉ. प्रियंका सोनी स्थानीय सहकारी चीनी मिल में संपूर्ण चीनी उत्पादन प्रक्रिया का प्रबंध निदेशक डा. वेद प्रकाश के साथ अवलोकन करने के उपरांत अधिकारियों की बैठक ले रही थी। उन्होंने गन्ने की पिराई से लेकर चीनी की पैकिंग एवं स्टोर करने तक की पूरी प्रक्रिया का अवलोकन किया। उपायुक्त ने कहा कि वर्तमान पिराई सत्र के दौरान मिल द्वारा अब तक 27 लाख 57 हजार 600 क्विंटल गन्ने की पिराई करके 2 लाख 68 हजार 330 क्विंटल चीनी का उत्पादन किया है। चीनी मिल की चीनी रिकवरी दर 10.60 प्रतिशत रही है, जबकि गत सीजन के दौरान यह 10.75 प्रतिशत थी।
उन्होंने कहा कि चीनी मिल क्षमता उपयोगिता के हिसाब से जींद चीनी मिल के बाद प्रदेश का दूसरा सहकारी चीनी मिल है। जींद सहकारी चीनी मिल द्वारा 102.44 प्रतिशत क्षमता को उपयोग किया जा रहा है, जबकि कैथल चीनी मिल द्वारा 97.55 प्रतिशत क्षमता का उपयोग किया जा रहा है। उन्होंने चीनी उत्पादन के बाद चीनी की बिक्री हेतू किए गए प्रबंधों की भी जानकारी हासिल की तथा चीनी मिल द्वारा संचालित किए जा रहे पैट्रोल पंप से होने वाले आय के बारे में भी जानकारी ली। उन्होंने चीनी मिल द्वारा किसानों को गन्ने की पर्ची व अन्य जानकारी के लिए शुरू किए गए मोबाईल एप की भी जानकारी ली। इस एप में ऑनलाईन डाटा अपडेट होता है। किसानों को मिल द्वारा स्मार्ट कार्ड जारी किए गए हैं, जिनके कोड के आधार पर किसान अपने खाते व गन्ने की पर्ची के बारे में जानकारी हासिल कर सकते हैं। वर्तमान में यह सुविधा पलवल, रोहतक एवं कैथल सहकारी चीनी मिल में उपलब्ध है। चीनी मिल द्वारा किसानों को ब्याज मुक्त बीज ऋण भी उपलब्ध करवाया जाता है।
उपायुक्त ने सर्वप्रथम मिल में गन्ना लेकर आने वाले किसानों की ट्रालियों के तोल के लिए लगाए गए इलैक्ट्रोनिक धर्म कांटे पर मौके पर ट्राली का तोल करवाकर देखा तथा मिल प्रशासन द्वारा गन्ने से भरे हुए वाहनों व खाली वाहनों के तोल हेतू प्रयोग किए जा रहे अलग-अलग धर्म कांटों के बारे में भी आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि दोनों धर्म कांटों का तोल एक समान होना चाहिए। इसके उपरांत उन्होंने चीनी मिल की चेन में डाले जा रहे गन्ने का अवलोकन किया तथा अधिकारियों से आवश्यक जानकारी हासिल की। हाईड्रोलिक के्रनों के माध्यम से गन्ने को ट्राली व अन्य वाहन से उठाकर चेन में डाला जाता है, जिसके बाद गन्ने की पिराई शुरू होती है।
डॉ. प्रियंका सोनी ने इसके उपरांत मिल परिसर में बॉयलर आदि का भी अवलोकन किया तथा चीनी उत्पादन के दौरान स्टील के तापमान एवं अन्य बारे भी जानकारी हासिल की। उन्होंने गन्ने की पिराई के बाद से लेकर चीनी उत्पादन तक का बारीकि से अवलोकन किया तथा मिल के प्रबंध निदेशक डा. वेद प्रकाश एवं मुख्य रसायन विद् डा. कमलकांत तिवारी ने चीनी उत्पादन की पूरी प्रक्रिया की जानकारी उपायुक्त को दी। उन्होंने मिल से निकलने वाले कचरे का भी निरीक्षण किया, जिसका जैविक खाद बनाने में प्रयोग किया जाता है।
उपायुक्त ने चीनी उत्पादन के बाद इलैक्ट्रोनिक धर्म कांटे से हो रहे तोल तथा चीनी की पैकिंग का भी अवलोकन किया। मिल परिसर में इलैक्ट्रोनिक धर्म कांटे से 50 किलोग्राम के बैग भरे जाते हैं तथा इसके उपरांत स्वचालित सिलाई मशीन से इन बैगों की सिलाई की जाती है। इसके उपरांत इन बैगों को ट्राली में भरकर गोदाम तक पहुंचाया जाता है। मिल परिसर में वर्तमान में तीन गोदाम हैं तथा चौथे गोदाम के निर्माण की प्रक्रिया भी अंतिम चरण में है। प्रत्येक गोदाम में 80 हजार क्विंटल की क्षमता है। मिल में अढ़ाई मेगावॉट प्रति घंटा की दर से बिजली उत्पादन भी हो रहा है, जिसका प्रयोग मिल द्वारा बॉयलर चलाने, कार्यालय तथा मिल की रिहायशी कालोनी में किया जाता है।
इस अवसर पर सहकारी चीनी मिल के प्रबंध निदेशक डा. वेद प्रकाश, मुख्य अभियंता अदिल अहमद सिद्दिकी, कैलाश चंद्र, मुख्य रसायनविद् कमलकांत तिवारी, गन्ना प्रबंधक रामदिया श्योकंद, गन्ना विकास अधिकारी रामपाल सहित अन्य संबंधित अधिकारी व चीनी मिल स्टाफ के सदस्य मौजूद रहे।
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