कुरुक्षेत्र, 25 अगस्त: आध्यामिक ज्ञान, गुणों शक्तियों से विभूषित दादी प्रकाशमणि जी ऐसी सशक्त महिला का नाम है, जिन्होंने नारी जाति को शक्ति स्वरूप बनने का अनुपम उदाहरण पेश किया है। यही नहीं, उन्होंने महिलाओं की छिपी हुई शक्तियों को जागृत किया है। दादी जी ने विश्व के 130 देशों के लाखों भाई-बहनों को रुहानि सेवा भी शामिल किया है। उन्होंने आध्यात्मिक दक्षता से समाज में जीवन मूल्यों की स्थापना की आधारशिला रखी। उपरोक्त विचार प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय कुरुक्षेत्र केंद्र की प्रभारी बीके सरोज बहन ने व्यक्त किए। वे रविवार को दादी जी के स्मृति दिवस पर कार्यक्रम में बोल रही थीं। सरोज बहन ने कहा कि ब्रह्माकुमारीज के विशाल अध्यात्मिक संगठन का सफल नेतृत्व करते हुए दादी प्रकाशमणि जी ने अपने जीवन काल में विश्व कल्याण का परचम फहराया। ऐसी महान विभूति का जन्म दिपावली के शुभ दिन पर सन 1922 में अविभाजित भारत सिंध प्रांत हैदराबाद में हुआ। दादी जी बचपन से ही कुशाग्र बुद्धि की थी, उन्होंने 14 वर्ष की अल्पायु में ही अपना जीवन मानव कल्याण हेतु अर्पण कर दिया। आप परमात्म शिक्षा से प्रेरित होकर अपने जीवन में पवित्रता, शांति, प्रेम, सरलता, नम्रता जैसे विशेष गुणों को अपना कर आध्यात्मिक प्रकाश को फैलाने और मानव को महान बनाने में सफल रही। उन्होंने विभिन्न जातियों, वर्ग, रंग-भेद को दूर करने के लिए मानवता में विश्व बंधुत्व एवं वसुधैव कुटुम्बकम की भावना को जगाने व परमात्म अवतरण के ईश्वरीय संदेश को कम समय में संपूर्ण विश्व में फैलाया। सरोज बहन ने कहा कि उनके कुशल नेतृत्व के कारण संस्थान को संयुक्त राष्ट्र संघ ने गैर सरकारी संस्था के तौर पर आर्थिक एवं सामाजिक परिषद का परामर्शक सदस्य बनाया। सन 1987 में एक अंतर्राष्ट्रीय तथा 5 राष्ट्रीय स्तर के शांति पुरस्कार दादी जी के नेतृत्व में प्राप्त हुए। सन 1969 में प्रजापिता ब्रह्मा ने आध्यात्म की मशाल दादी जी को सौंप दी और आप संपूर्ण बन गए। ऐसी विशालहृदयी व्यक्तित्व की धनी थी। दादी जी, जिनके दर्शन मात्र से ही दुख, अशांति एवं चिंताएं दूर हो जाती थी। सरोज बहन ने बताया कि दादी जी कहा करती थी कि उन्होंने जीवन में कभी भी झूठ नहीं बोला। उन्होंने 25 अगस्त 2007 को अपनी भौतिक देह का त्याग कर नई दुनिया के निर्माण हेतु अव्यक्त यात्रा को प्रस्थान किया। इस दौरान सर्व बीके हरबंस सिंह, सतीश कत्याल, डा.आरडी शर्मा, कर्ण सिंह, दिलबाग सिंह, जुरेश चंद, रमेश भारद्वाज व सर्व बीके अमृत माता, राजकुमारी, माध्वी शर्मा, संतोष वर्मा, वीना शर्मा के साथ सभी बीके भाई-बहनों ने दादी को स्मृति दिवस पर शत-शत नमन करते हुए उन्हें याद किया।
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