पिहोवा 7 फरवरी – हरियाणा सरस्वती धरोहर विकास बोर्ड के उपाध्यक्ष प्रशांत भारद्वाज ने कहा कि राज्य सरकार की तरफ से पिपली से पिहोवा तक सरस्वती नदी के तट को पर्यटन स्थल के रूप में विकसित किया जाएगा। इसके लिए धरोहर विकास बोर्ड की तरफ से करीब 100 करोड रुपए की योजना तैयार की गई है। इस योजना को अमली जामा पहनाने के लिए राज्य सरकार की तरफ से तकनीकी सलाहकार को नियुक्त करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।
वे वीरवार को पिहोवा सरस्वती तीर्थ पर हरियाणा सरस्वती धरोहर विकास बोर्ड एवं उपमंडल प्रशासन की तरफ से आयोजित अंतर्राष्ट्रीय सरस्वती महोत्सव के उदघाटन समारोह में पत्रकारों से बातचीत कर रहे थे। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार सरस्वती नदी में फिर से स्वच्छ जल की धारा बहाने का हर संभव प्रयास कर रही है। इसके लिए सरकार ने आदि बद्री मेंं बांध, बैराज और विशाल सरोवर बनाने का निर्णय लिया है और इसके लिए बकायदा नोटिफिकेशन भी जारी कर दिया है। इतना ही नहीं राजस्व रिकार्ड के अनुसार सरस्वती से संबधित योजना को कानूनी दस्तावेज के रूप में अपनी मंजूरी दे दी है। इसके लिए भारत सरकार से वित्तिय अनुदान हेतू मुख्यमंत्री मनोहर लाल 2 बार केन्द्रीय मंत्रालय के अधिकारियों से भी मिल चुके है। सरकार को आने वाले 2 या 3 माह में वित्तिय अनुदान मिल जाएगा।
उन्होंने कहा कि राज्य सरकार के प्रयासों से विभिन्न तकनीकी संस्थाओं द्वारा किए जा रहे शोध से कई आश्चर्यजनक तथ्य भी सामने है। इन तथ्यों के अनुसार गांव इशरगढ में 14 हजार वर्ष प्राचीन पानी पाए जाने की पुष्टी बाबा आटोमिक रिसर्च सैंटर द्वारा की गई है। इसके साथ-साथ गांव उच्चा चंदाना में भी 10 हजार 230 वर्ष पुराने पानी की पुष्टी हुई है। इन जगहों पर 1 लाख 12 हजार लीटर प्रति घंटे पानी डिसचार्ज होने के भी तथ्य सामने आए है। इन तमाम पहलुओं को जहन में रखते हुए सरस्वती नदी पर और अधिक शोध का कार्य करने के लिए कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय में सरस्वती शोध संस्थान की स्थापना की गई है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार की तरफ से कई बडी योजनाओं और परियोजनाओं पर काम किया जा रहा है। राज्य सरकार के प्रयासों से ही हिमाचल सरकार ने कम समय में सभी परियोजनाओं के लिए भी एनओसी जारी कर दी है।
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