कुरुक्षेत्र, 13 मई । गो-गीता-गायत्री सत्संग सेवा समिति द्वारा श्री सनातन धर्म मंदिर में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा में कथावाचक अनिल शास्त्री ने बालकृष्ण की लीलाएं और गोवर्धन पूजा प्रसंग विस्तार से सुनाया । इस मौके पर गोवर्धनधारी श्री कृष्ण की झांकी दिखाई गई । मुख्य यजमान श्रीकृष्ण सिंगला ने भागवत पूजन करके कथावाचक अनिल शास्त्री को तिलक लगाया। प्रवचनों में अनिल शास्त्री ने कहा कि धर्म की सेवा एवं रक्षा से मनुष्य के सभी मनोरथ सफल होते हैँ । धर्म से ही समाज हैं और समाज से ही हम हैँ । इतिहास साक्षी हैं कि देवताओं ने धर्म की रक्षा के लिए पृथ्वी पर अवतार लिया और धर्म प्रेमी राजाओं व महापुरुषों ने धर्म की रक्षा के लिए अपने प्राणों का भी बलिदान दिया हैं । उन्होनें कहा कि भगवान श्री कृष्ण प्रकृति के सबसे बड़े रक्षक है,गोवर्धन पर्वत की रक्षा करके उन्होनें दुर्लभ वनस्पतियों का संरक्षण किया । याद रखो,प्रकृति की रक्षा सर्वोपरि है। यदि हम प्रकृति का संरक्षण-संवर्धन नही करेंगे तो हमारे लिए प्राकृतिक संसाधनों का संकट उत्पन्न हो जाएगा । इसलिए पृथ्वी का हरा भरा रखने के लिए वृक्षारोपण के साथ-साथ उनकी देखभाल भी करों ।मनुष्य पौधारोपण तो करते है लेकिन उसका रख रखाव नही करते,जिससे पौधे पनप नही पाते अतः पौधो की उचित देखभाल आवश्यक है ।
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