करनाल 6 फरवरी, कृषि महानिदेशक अजीत बाला जी जोशी की परिकल्पना पर हरियाणा में मेरी फसल मेरा ब्यौरा, सायल हेल्थ कार्ड योजना, परम्परागत कृषि विकास योजना पर ड्रॉप मोर ड्रॉप जैसी योजनाओं से गांव के आखिरी किसान तक पहुंचाने के लिए अनोखी योजना की शुरूआत की गयी है। उपनिदेशक कृषि डा. आदित्य डबास ने कहा कि बदलते जलवायु परिवर्तन के दौर में किसान जीवन की चुनौती निरन्तर बढ़ती जा रही है। ऐसे में बदलता मौसम कृषि उपज के लिए बड़ी चेतावनी है। अब हमें वृक्ष खेती जैसी किसान जीवन की तरफ अग्रसर होना होगा। उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि नीबू, किन्नू, मौसमी, पपीता जैसे फसलों का उत्पादन करके कम पानी में किसान अपना आय बढ़ा सकते हैं। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना प्राकृतिक आपदा के दौर में किसानों के लिए एक दीर्घजीवि कार्यक्रम है।
इस अवसर पर शुरूआत समिति के रंगकर्मियों ने माटी की खूशबू का मंचन किया। नाटक में साधू के भेष में अभिनय करने वाले रामशरण ने लोगों से अपील कि हमारी धरती बीमार है वो दर्द से तड़प रही है उसे सही दवा देकर उसका इलाज करें नहीं तो वो दिन दूर नही जब धरती बंजर हो जायेगी और यदि धरती यानि मां ही बंजर हो गयी तो भला उसपर जीवन कैसे सम्भव होगा।
इस अवसर पर डा. राकेश मेहरा वरिष्ठ वैज्ञानिक अनुसंधान केन्द्र उचानी ने कहा कि गेहूं में पीले रंग की रोकथाम के लिए 200 एमएल पोपीकैनजोल को 200 लीटर पानी में मिलाकर छिडक़ाव करें। पूर्व वैज्ञानिक एनडीआरआई दिलीप गोसाई ने कहा कि उन्होंने मूंग की खेती द्वारा हरी खाद के उपयोग पर प्रकाश डाला। जगतराम में जैविक खेती करने पर बल दिया। मार्केट कमेटी के चेयरमैन चौधरी इल्म सिंह ने किसानों का आह्वाहन किया कि सरकारी योजनाओं का अधिक से अधिक लाभ उठाया जाए। इस मौके पर डा. पूष्पेन्द्र, डा. सुरेन्द्र, डा. प्रवीण, जुड़वा किसान लक्ष्मण भगवान दास नदी पार विक्रम सुमेर, दलजीत नाल वी कला कुंजपुरा से राजेश, रमेश, पवन, दिलबाग आदि ने हिस्सा लिया।
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