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प्रवासी पक्षियों की शरणस्थली छिलछिला झील पूर्णरूप से विलीन हो गई

कुरुक्षेत्र 10 जनवरी  प्रवासी पक्षियों की शरणस्थली छिलछिला झील पूर्णरूप से विलीन हो गई है। कभी बर्ड्स-पैराडाइज” के नाम से विख्यात इस झील में लाखों की संख्या में प्रवासी पक्षी आया करते थे। यह एक प्राकृतिक झील है क्योंकि बारिश का पानी स्वयं ही इस झील में एकत्रित हो जाता है। डॉ रोहतास गुप्ता पूर्व अध्यक्ष प्राणी शास्त्र विभाग कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के अनुसार यह प्राकृतिक झील कभी सुदूर प्रदेशों जैसे साइबेरियादक्षिणी चीन,रूस,मंगोलिया, अफगानिस्तानतिब्बतलदाख तथा हिमालय की तलहटी से हजारोंकी संख्या में आने वाले लगभग 43 प्रजातियों के प्रवासी पक्षियों जैसे सूचिपूछ बत्तखसामान्य टीलनीलपक्ष टीलराजहंसकाटन टीलश्वेताक्ष पोचर्डब्राह्मणी बत्तख,  मैलार्डगैडवलविजियनशिखी पोचार्ड,पिंकशीर्ष बत्तखरक्तशिखी पोचार्डसरपट्टी सवनसिलेटी सवनतिदारी बत्तखसिख पर बतखबेखुर बतखचेता बतखग्लॉसी आईबिसचमचा,घोंघिलनकटाछोटी सिल्हीकरछिया बगुला इत्यादि को अपनी तरफ आकर्षित किया करती थी तथा दूर दूर से जन मानस तथा पक्षी वैज्ञानिक इस झील में प्रवासी पक्षियों को देखने के लिए आया करते थे। परंतु हरियाणा वन विभाग की उदासीनता की वजह से आज इस झील के मात्र अवशेष ही रह गए हैं। डॉ गुप्ता  ने बताया कि हालांकि पर्यावरण वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय भारत सरकार ने वर्ष 2009 में छिलछिला वन्य जीव अभ्यारण्य संरक्षित क्षेत्र की सीमा से किलोमीटर तक का क्षेत्र इको सेंसेटिव जोन घोषित किया था बावजूद इसके यह झील अपनी खोई गरिमा को पुनः प्राप्तनही कर पाई है | डॉ कौशिक ने बताया कि इस समय झील बहुत ही दयनीय हालत में है। झील के नाम पर मात्र थोड़े क्षेत्र में डिप्रेशनआवारा पशुओं का आवागमनसारसा गांव के लोगों का झील की सीमा में दैनिक क्रियाकलाप करनातथा सबसे महत्वपूर्ण हरियाणा वन विभाग का संरक्षित क्षेत्र में सफेदा अथार्त युकलिप्टुस नामक ऑस्ट्रेलियाई पेड़ लगा दिये है। हालांकि वन विभाग की आमदनी तो इससे बढ़ गई है | डॉ तरसेम कौशिक पक्षी वैज्ञानिक  के अनुसार हरियाणा सरकार को चाहिए कि हरियाणा वन विभाग को आदेश दे कि इस झील को पुनः प्रवासी पक्षियों का उत्तम आवास स्थान बनाने के लिये प्रयास करे। तटबंधों में सुधार करें ताकि वर्षा के मौसम में पानी स्वयं ही इस झील में एकत्रित हो सके। छिलछिला पक्षी अभयारण्य में पीपलबरगदशीशमबेरी के वृक्षों को लगाए ताकि अपने शीतकालीन प्रवास के समय प्रवासी पक्षियों को रात्रि में बैठने के लिये उचित स्थान उपलब्ध हो सके तथा पुनः प्रवासी पक्षी अपने शीतकालीन प्रवास के लिये इस झील में पधारना शुरू कर दें। हरियाणा सरकार को चाहिये कि इस झील को पर्यटन की दृष्टि से भी विकसित करे ताकि हरियाणा विशेषकर कुरुक्षेत्र के निवासी अपने वीकेंड पर परिवार सहित इस झील की प्राकृतिक जैव विविधता को देखकर आनंद की अनुभूति कर सकें।

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