करनाल 13 जून, फसल अवशेष प्रबंधन योजना के तहत जिला में अब तक 167 कस्टम हायरिंग सेंटर खोले जा चुके है। इन सेंटरों के माध्यम से किसानों को 80 प्रतिशत अनुदान पर कृषि उपकरण व यंत्र उपलब्ध करवाए करवाए जा रहे है। इन केन्द्रों पर किसानों को फसल अवशेष प्रबंधन के लिए उपकरण व यंत्र सहजता से उपलब्ध हो सकेंगे। खासकर ऐेसे उपकरणों को इसमें जोड़ा गया है जिसके माध्यम से पराली को खेतों में ही टुकड़े कर एक डि-कंपोस्ट के रूप में प्रयोग किया जा सके। पिछले दिनों एनजीटी की ओर से फसल अवशेष जलाने पर राज्यों को पहले से ही कड़े निर्देश दिए जा चुके हैं।
कृ षि विभाग के उपनिदेशक डा0 आदित्य डबास ने बताया कि कस्टम हायरिंग सेंटर के लिए किसानों के समूह, सहकारी समितियां, महिला किसान समूह, पंजीकृत किसान समूह, स्वयं सहायता समूह व पैक्स आदि आवेदन कर सकते हैं। कस्टम हायरिंग सेंटर स्थापित करने के लिए 10 जून से 10 जुलाई तक सायं 5 बजे तक ऑलाईन आवेदन किए जा सकते हैं। किसान समूह या सोसायटी के पास अपना ट्रैक्टर या कम्बाईन होना अनिवार्य है। उन्होंने बताया कि लक्ष्य से अधिक आवेदन प्राप्त होने पर लाभार्थी का चयन उपायुक्त की अध्यक्षता में गठित जिला स्तरीय कार्यकारी समिति द्वारा किया जाएगा। सभी किसान केवल भारत सरकार द्वारा अनुमोदित निर्माताओं की सूची से ही कृषि यंत्र खरीद सकते हैं। एक लाख रुपये से अधिक कीमत के कृषि यंत्र व मशीनरी पर जीपीएस सिस्टम निर्माता द्वारा लगाना अनिवार्य है।
उन्होंने बताया कि इन कस्टम हायरिंग सेंटर के लिए फसल अवशेष प्रबंधन में उपयोगी कृषि यंत्रों जैसे सुपर स्ट्रा मैनेजमेंट सिस्टम, हैप्पी सीडर, पैडी स्ट्रा चोपर, कटर कम स्पे्रडर, रिवर्सिबल प्लो, रोटरी स्लेसर, जीरो टिल ड्रिल एवं रोटावेटर आदि की खरीद पर किसान समूहों को 80 प्रतिशत तक का अनुदान दिया जाएगा। उन्होंने बताया कि योजना के तहत फसल पैटर्न के अनुसार मशीनों का चयन करते हुए अधिकतम 10 लाख रुपये तक की कीमत के कृषि यंत्र व मशीनें खरीदी जा सकती हैं। इस पर 80 प्रतिशत तक अनुदान दिया जाएगा। कस्टम हायरिंग सेंटर कलस्टर बेसिस आधार पर अलॉट किए जाएंगे। उन गांवों को प्राथमिकता दी जाएगी जहां फसल अवशेष जलाने की घटनाएं ज्यादा हैं।
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