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बसंत पंचमी प्रकृति और मानव मन की उमंग का पर्व है: डॉ० आर० सी० मिश्र

कुरुक्षेत्र 10 फरवरी  ऋतुराज बसंत का बड़ा महत्व है। इसकी छटा निहारकर जड़-चेतन सभी में नव-जीवन का संचार होता है सभी में अपूर्व उत्साह और आनंद की तरंगे दौडऩे लगती है। स्वास्थ्य की दृष्टि से यह ऋतु बड़ी ही उपयुक्त है। इस ऋतु में प्रात:काल भ्रमण करने से मन में प्रसन्नता और देह में स्फूर्ति आती है। स्वस्थ और स्फूर्तिदायक मन में अच्छे विचार आते हैं। यह उद्गार हरियाणा पुलिस के अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक डॉ० आर०सी० मिश्रा ने बसंत पंचमी के उपलक्ष्य में आयोजित मातृभूमि सेवा मिशन द्वारा संचालित मातृभूमि शिक्षा मंदिर के विद्यार्थियों को पुस्कार वितरण कार्यक्रम में व्यक्त किए। कार्यक्रम का शुभारंभ अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक डॉ० आर०सी० मिश्रा एवं मातृभूमि सेवा मिशन के संस्थान डॉ० श्रीप्रकाश मिश्र ने माँ सरस्वती के समक्ष माल्यार्पणपुष्पार्चन एवं दीप प्रज्जवलन से किया। डॉ० आर०सी० मिश्र ने कहा कि हमारे देश में छ: ऋतुएँ होती हैं जो अपने क्रम से आकर अपना पृथक-पृथक रंग दिखाती हैं परंतु बसंत ऋतु का अपना अलग विशिष्ट महत्व है। इसीलिए बसंत ऋतुओं का राजा कहा जाता है। इसमें प्रकृति का सौन्दर्य सभी ऋतुओं से बढक़र होता है। वन-उपवन भांति-भांति के पुष्पों से जगमगा उठते हैं। गुलमोहऱ चंपा़ सूरजमुखी और गुलाब के पुष्पों के सौन्दर्य से आकर्षित रंग-बिरंगी तितलियों और मधुमक्खियों के मधुरस पान की होड़-सी लगी रहती है। इसकी सुंदरता देखकर मनुष्य भी खुशी से झूम उठता है। बसंत पंचमी प्रकृति और मानव मन की उमंग का पर्व है। विद्यार्थियों के लिए भी यह त्योहार बहुत आनंददायक होता है। मिशन के संस्थापक डॉ० श्रीप्रकाश मिश्र ने कहा कि वसंत ऋतु आते ही प्रकृति का कण-कण खिल उठता है। मानव तो क्या पशु-पक्षी तक उल्लास से भर जाते हैं। हर दिन नयी उमंग से सूर्योदय होता है और नयी चेतना प्रदान कर अगले दिन फिर आने का आश्वासन देकर चला जाता है। माघ का यह पूरा मास ही उत्साह देने वाला हैपर वसंत पंचमी का पर्व भारतीय जनजीवन को अनेक तरह से प्रभावित करता है। प्राचीनकाल से इसे ज्ञान और कला की देवी मां सरस्वती का जन्मदिवस माना जाता है। जो शिक्षाविद भारत और भारतीयता से प्रेम करते हैंवे इस दिन मां शारदे की पूजा कर उनसे और अधिक ज्ञानवान होने की प्रार्थना करते हैं। उन्होंने कहा कि बसंत पंचमी का पर्व भारत की अनेक ऐतिहासिक घटनाओं और संस्मर्णें से जुड़ा है। जो महत्व सैनिकों के लिए अपने शस्त्रों और विजयादशमी का हैजो विद्वानों के लिए अपनी पुस्तकों और व्यास पूर्णिमा का है,वही महत्व कलाकारों के लिए वसंत पंचमी का है। चाहे वे कवि हों या लेखकगायक हों या वादकनाटककार हों या नृत्यकारसब दिन का प्रारम्भ अपने उपकरणों की पूजा और मां सरस्वती की वंदना से करते हैं। मातृभूमि शिक्षा मंदिर के विद्यार्थियों ने बसंत पचंमी के पर्व के इस अवसर पर अनेक प्रेरक प्रसंग भी सुनाए। कार्यक्रम में एडवोकेट विवेक गोयलमोहिन्द्र गोयलउमेश राणागुरप्रीत सिंह सहित मिशन के विद्यार्थी एवं अनेक गणमान्य जन उपस्थित रहे। कार्यक्रम का समापन शांतिपाठ से हुआ।

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