Breaking News
Home / Gita Mahotsav / बागड़ी लोहार संस्कृति के संरक्षण में जुटे धर्मबीर आधुनिक दौर से भी कदमताल करने को प्रयासरत

बागड़ी लोहार संस्कृति के संरक्षण में जुटे धर्मबीर आधुनिक दौर से भी कदमताल करने को प्रयासरत

कुरुक्षेत्र, 15 दिसम्बर    बागड़ी लोहार धर्मबीर सिंह व उनकी पत्नी बंतो जब राशन कार्ड बनवाने खाद्य विभाग के कार्यालय में गये तो उनसे फार्म पर हस्ताक्षर करने के लिए कहा गया, किंतु वे साक्षर न होने की वजह से ऐसा न कर पाने के कारण शर्मिंदगी से भर उठे। बस, यहीं से उन्होंने जीवन में बदलाव की एक नई करवट ली। उन्होंने संकल्प लिया कि वे अपने बच्चों को ऐसी शर्मिंदगी महसूस नहीं होने देंगे, जिसके लिए उन्होंने बच्चों को बेहतरीन स्कूल में शिक्षा दिलाना प्रारंभ किया। आज वे पुरातन और आधुनिक दौर के संगम की अनूठी मिसाल के रूप में दिखाई देते हैं।
ओल्ड फरीदाबाद में रहने वाले बागड़ी लोहार धर्मबीर सिंह अपने परिवार सहित अंतर्राष्ट्रीय गीता महोत्सव में अपनी प्राचीनतम संस्कृति का प्रदर्शन कर रहे हैं। बातचीत करने पर उनके मन की पीड़ा व दिली चाहत उभरकर सामने आई। वे कहते हैं कि वह अपने बच्चों को बागड़ी लोहार की संघर्षपूर्ण जिंदगी से संरक्षित करना चाहते हैं, जिसके लिए शिक्षा ही बेहतरीन माध्यम है। आज उनके पांचों बच्चे (अंजलि, रोहन, ईशा, आरूषि व आरूष) स्कूल में शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं। बड़े बेटे रोहन को अंग्रेजी माध्यम से शिक्षा दिला रहे हैं।
बागड़ी लोहार संस्कृति के संरक्षण में जुटे धर्मबीर आधुनिक दौर से भी कदमताल करने को प्रयासरत हैं। इसके लिए वे अपनी खुद की बिरादरी से थोड़ा दूर रहकर जीवनयापन कर रहे हैं, हालांकि वे अपने समाज के प्रधान भी हैं। उनका कहना है कि अपने रीति-रिवाज व संस्कृति को वे मरते दम तक नहीं छोड़ेंगे, किंतु अपने बच्चों को वे आधुनिक दौर से कदमताल करते देखने के इच्छुक हैं। पिछले करीब 17 वर्षों से वे अंतर्राष्ट्रीय सूरजकुंड मेले में भी अपनी संस्कृति की अमिट छाप छोड़ते आ रहे हैं, जहां उनकी पत्नी बंतो हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल तथा उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को तिलक करके स्वागत भी कर चुकी हैं।
धर्मबीर सिंह कहते हैं कि आधुनिक दौर में बड़े स्तर पर बदलाव हुआ है, लेकिन बागड़ी लोहारों द्वारा बनाई गई लोहे की घरेलू वस्तुओं की मांग आज भी कायम है। क्योंकि बागड़ी लोहार की बनाई वस्तुएं बेहद मजबूत तथा गुणवत्तापरक होती हैं। वे आज भी अपने हाथों से चिमटा, दरांत, दरांती, कढ़ाई, तवा, कस्सी, फावड़ा तथा खुरपी आदि बनाते हैं। उन्होंने कहा कि लोहार की बनाई वस्तुएं लोगों के बीच आज भी अपनी अलग जगह बनाये हुए है। साथ ही वे लकड़ी की घरेलू वस्तुओं को भी अपने व्यापार को बढ़ाने के लिए प्रदर्शित करने लगे हैं। साथ ही उनका कहना है कि हरियाणा सरकार प्राचीन संस्कृति व सभ्यता के संरक्षण के लिए बेहतरीन प्रयास कर रही है। इसके लिए सरकार बधाई की पात्र है। सरकार हस्तशिल्प को भी बढ़ावा दे रही है, जिससे उनके जैसे लोगों को नई संजीवनी  मिल रही है। धर्मबीर सिंह ने कहा कि वे अंतर्राष्ट्रीय गीता महोत्सव में दूसरी बार आये हैं और यहां लोगों का बहुत अच्छा साथ मिल रहा है। अंतर्राष्ट्रीय गीता महोत्सव सही मायनों में संस्कृति का प्रचार-प्रसार व संरक्षण कर रही हैं। बागड़ी लोहार संस्कृति हिंदुस्तान की प्राचीनतम संस्कृति का अभिन्न अंग हैं। बागड़ी लोहार संस्कृति को भी गीता महोत्सव में विशेष रूप से स्थान दिया जाना हर्ष का विषय है।
बेटा इंजीनियर तो छोटी बेटी सिंगर बनने को लालायित
धर्मबीर सिंह का बड़ा बेटा रोहन 9वीं कक्षा का छात्र है जो इंजीनियर बनने का लक्ष्य संजोय हुए है। स्कूली परीक्षाओं के चलते वह गीता महोत्सव में भी परिवार के साथ नहीं आ सका। उनकी बड़ी बेटी अंजलि एक अच्छी नौकरी हासिल करने की चाहत रखती है तो छोटी बेटी ईशा का सपना सिंगर बनने का है। ईशा एक बेहतरीन डांसर भी है जो स्कूली स्तर पर सांस्कृतिक कार्यक्रमों में हिस्सा ले रही है। सबसे छोटी बेटी आरूषि पहली कक्षा में तो छोटा बेटा आरूष नर्सरी का छात्र है। सभी बच्चों में जीवन में कुछ कर गुजरने की चाहत दिखाई देती है।
सिर पर पक्की छत देने की मांग की
बागड़ी लोहार धर्मबीर सरकार से मांग करते हैं कि उन्हें मकान अथवा प्लाट दिया जाए। उन्होंने कहा कि इससे उनका जीवन स्तर ऊंचा होगा, जिससे उनके बच्चों को भविष्य निर्माण में विशेष सहायता मिलेगी। उन्होंने अपने बच्चों को शिक्षित करने के लिए भी सहायता की मांग की है। वे कहते हैं कि संस्कृति के प्रचार-प्रसार में वे कोई कमी नहीं छोड़ रहे हैं।

About postnow

Check Also

ब्रहमसरोवर के तट पर 17 दिनों में 42 लाख से ज्यादा पर्यटकों ने उठाया महोत्सव का लुफ्त

कुरुक्षेत्र 23 दिसम्बर – अंतर्राष्ट्रीय गीता महोत्सव 2018 ने पर्यटकों की भीड़ जुटाने में एक नया …

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *