कुरुक्षेत्र। अखिल भारतीय बैंक अधिकारी परिसंघ के आह़वान पर बैंकों में हुई हड़ताल के बाद पुन: यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस के आह्वान पर देश के सभी बैंकों की समस्त शाखाओं पर 26 दिसम्बर को फिर से ताले लगे। ज्ञात हो कि यूएफबीयू 9 बैंक अधिकारियों व कर्मचारियों की यूनियनों का संगठन है। यूएफबीयू के बैनर तले बुधवार को भारतीय स्टेट बैंक की थानेसर शाखा के आगे कुरुक्षेत्र के सभी बैंकों के सैंकड़ों अधिकारियों व कर्मचारियों ने न केवल जबरदस्त प्रदर्शन व केंद्रीय सरकार व आई बी ए के खिलाफ जमकर नारेबाजी की अपितु विशाल रैली भी निकाली।
हड़ताल पर जाने की वजह बताते हुए यूएफबीयू नेता राय सिंह व प्रीतम गोयत ने अपने सम्बोधन में कहा कि देश के सरकारी बैंक अर्थव्यवस्था की रीढ़ है। सरकार की गलत नीतियों के कारण बैंकों का एनपीए दिन प्रतिदिन बढ़ता जा रहा है जो बढक़र 6.41 लाख करोड़ से भी अधिक हो गया है जिसमें कारपोरेट क्षेत्र का खराब ऋण 73प्रतिशत है जबकि कृषि क्षेत्र का मात्र 8प्रतिशत है जिसके लिए निचले स्केल के अधिकारी अथवा कर्मचारी कतई जिम्मेवार नहीं हैं। हमारी मांग है कि बड़े बड़े कारपोरेट घरानों को दिए गए लोन जो एनपीए हो गए हैं की रिकवरी के लिए सख्त कदम उठाए जाएं। बैंकों की खराब दशा के लिए सरकार की नीतियां जिम्मेवार हैं। विजया बैंक और देना बैंक के बैंक ऑफ बड़ौदा में प्रस्तावित विलय के खिलाफ निजी क्षेत्र के बैंकों सहित सभी बैंकों के करीब 10 लाख से अधिक कर्मचारी 26 दिसंबर को फिर से हड़ताल पर हैं। इससे पहले शुक्रवार को सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के अधिकारियों की यूनियन आइबोक ने इन्हीं मांगों और वेतन वार्ता को पूरा करने की मांग को लेकर हड़ताल की थी। उन्होंने कहा कि यह विलय बैंक या बैंक ग्राहकों के हित में नहीं है। वास्तव में इससे दोनों को नुकसान होगा। यूनियनों का दावा है कि सरकार विलय के जरिए बैंकों का आकार बढ़ाना चाहती है, लेकिन यदि सभी सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों को भी मिलाकर एक कर दिया जाए तो भी विलय के बाद अस्तित्व में आई इकाई को दुनिया के शीर्ष 10 बैंकों में भी स्थान नहीं मिलेगा।
आइबोक हरियाणा के उप सचिव पुष्पेंद्र शर्मा व दीपक गर्ग ने जानकारी देते हुए बताया की सरकार की हठधर्मिता के कारण बैंकों का वेतन समझौता 1 नवंबर 2017 से लंबित पड़ा है। पांच बैंकों ने आईबीए को मुख्य प्रबंधक से जनरल मैनेजर तक के बैंक अधिकारियों की वेतन वृद्धि के लिए अधिकृत नहीं किया है। यही कारण है समस्त बैंक अधिकारी व कर्मचारी हड़ताल करने के लिए बाध्य हो गए हैं। बैंक कर्मी अपनी जायज मांगों को लेकर जब असहाय और मजबूर हो जाते हैं तभी निर्विकल्प होकर हड़ताल करते हैं और उसके बदले अपनी सैलरी कटवाते हैं। बैंकों में अधिक कार्य और कम सैलरी का फार्मूला लगा दिया गया है।
एस.बी.आई. के क्षेत्रीय सचिव पंकज कुमार व ओबीसी से सुरमुख सिंह ने बैंक कर्मियों की मांगों के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि इंडियन बैंक एसोसिएशन ने बैंक कर्मचारियों के वेतन में मात्र 8प्रतिशत की वृद्धि का प्रस्ताव रखा था जो शर्मनाक है। उन्होंने बताया कि आज बैंक अधिकारियों का वेतन सबसे कम है जब की जिम्मेदारी सबसे अधिक है।
बैंक कर्मियों की मांगें
* स्केल 1 से स्केल 7 तक के सभी अधिकारियों का वेतन वृद्धि का फुल मैंडेट
* चार्टर ऑफ डिमांड के मुताबिक वेतन वृद्धि
*पांच दिनों का सप्ताह,
* नई पेंशन नीति खत्म की जाए व सभी को पेंशन देने,
* पेंशन और पारिवारिक पेंशन का नवीनीकरण का संशोधन हो
* थर्ड पार्टी प्रोडक्ट की मिस सेलिंग बंद की जा
* कैथोलिक सीरियन बैंक व आईडीबीआई बैंक के एच आर मसलों का जल्द समाधान किया जाए
* क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों तथा पब्लिक सेक्टर बैंको के बीच पेंशन व अन्य लाभ की असमानता को दूर किया जाए
* बैंक ऑफ बड़ौदा, विजया बैंक व देना बैंक तथा क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों के विलय- समावेशन पर रोक लगे।
भारतीय स्टेट बैंक के कर्मचारी नेता जसपाल सिंह क्षेत्रीय सचिव और गुरदीप सिंह ने अपनी बात रखते हुए कहा कि सरकार की हर योजना कहीं ना कहीं बैंक कर्मियों की गर्दन और पीठ पर रख दी जाती है। काम इतने कि मानो 24 घंटे भी कम पड़ जाए।पूछिये किसी कैशियर से कि पूरी जिंदगी में वह कितने रुपए कैश काउंटर पर गंवाता है? नोटबंदी में ऐसे कितने ही कैशियरों ने लाखों का लोन लेकर मोदी जी की योजना को सफल बनाया पर जब वेतन की बात होती है तो हर बार सरकार बैंक घाटे में है का राग अलापने लगती है। उन्हीने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि शीघ्र ही हमारी मांगे पूरी नहीं की गई तो हम ना केवल आंदोलन को तेज कर देंगे बल्कि सभी बैंकर्स अनिश्चितकालीन हड़ताल पर भी जा सकते हैं।
अधिकारियों की इस हड़ताल को रिटायर्ड अधिकारियों हाकम सिंह चौधरी व गुलशन कुमार ग्रोवर ने भी अपना समर्थन देते हुए जनसमूह को संबोधित करते हुए कहा कि केन्द्र सरकार व भारतीय बैंक संघ जानबूझकर बैंक से रिटायर्ड बैंक कर्मियों की पेंशन का अपडेशन व फैमिली पेंशन आदि मुद्दों की अनदेखी कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि नैशनल पेंशन सिस्टम की नई पेंशन स्कीम में एक व्यक्ति जिसकी 13 साल की सेवा के बाद बेसिक वेतन रु 46200 हो तो पुरानी स्कीम में उसकी पेंशन रु 23100 मिलनी थी पर अब नई स्कीम में पेंशन मात्र रु 2706 बनती है। यह स्कीम धोखा है इसे तुरंत बंद कर पुरानी पेंशन स्कीम लागू की जाए।
इस अवसर पर विनोद अरोड़ा, रमेश अरोड़ा, संदीप तेजा, राजेश कुमार, विकास स्योकन्द, भारत भूषण, नंद लाल, मुख्त्यारी देवी,सुनील, अंकुर,कविता सैनी, रूप चंद, मोनिका शर्मा आदि उपस्थित रहे।
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