कुरुक्षेत्र,1 मई । अमीन रोड की पटियाला बैंक कालोनी में मनोकामना सिद्घ शिव मंदिर में बुधवार को देव मूर्ति प्राण प्रतिष्ठा अनुष्ठान में देवी-देवताओं की मूर्तियों का महास्नान करवाया गया। तत्पश्चात नगर भ्रमण में विशाल शोभायात्रा निकाली गई। शोभायात्रा के पश्चात संध्या शम्याधिवास कराया गया। इससे पूर्व पुजारी पंडित उमेश पाठक एवं ब्राह्मण मंडल ने मुख्य यजमानों महेश शर्मा, संदीप मदान, सोमनाथ कक्कड़ एडवोकेट, विनोद सिंगला, राहुल सिंगला, कुलदीप राणा, विशेष गर्ग, बीएन शर्मा, महेंद्र खन्ना, तरुण गाबा, आशु अरोड़ा, महेश गाबा, दर्शन पुरी, अशोक सिंघल, देवेंद्र सिंगला, सुनील सिंगला, अशोक गुप्ता, अनुज सिंगला और सतीश गर्ग परिवार से सर्वदेव पूजन कराया। इस दौरान भक्ति प्रवचनों में कथावाचक पंडित राजेंद्र कौशिक ने शिवकथा के रोचक प्रसंग सुनाते हुए कहा कि आदिदेव भगवान शिव परमतत्व भगवान श्रीराम की उपासना करते रहते हैं। एक बार उनके मन में विचार आया कि जिस परमतत्व का मैं ध्यान करता हूं, यदि वे साकार हो जाएं तो उनसे विशेष प्रेम कर सकूंगा। ये विचार आते ही शिव के मन में श्रीराम के दिव्य चरित्र और लीलाएं प्रकट होने लगीं। उन लीलाओं को अच्छी तरह से रच कर उन्होंने अपने मन में रख लिया। तब उस परमतत्व ने जैसे-जैसे भगवान शंकर ने चिंतन किया था, वैसे ही साकार होकर लीलाएं करने का मन बना लिया और त्रेता युग में सूर्यवंशी राजा दशरथ के बड़े पुत्र के रूप में प्रकट हुए। इस तरह भगवान शंकर द्वारा रची हुई पूर्व लीलाओं का श्रीराम साकार रूप में अनुसरण करने लगे। ये लीलाएं संतों, मुनियों, योगियों, ऋषियों, महात्माओं, ज्ञानियों और अज्ञानियों को भी आनंद देने वाली हुई। उन्होंने बताया कि भगवान शिव और श्रीराम परस्पर एक-दूूसरे के उपास्यदेव हैं। शंकर ने माता पार्वती के आग्रह पर सुंदर योग आने पर श्रीराम कथा कैलाश पर्वत पर सुनाई। इस प्रकार सारे जगत में सुख और आनंद देने वाली भगवान श्रीराम की लीलाएं और कथाएं व्याप्त हो गईं। शिव आरती में पंडित कमल भारद्वाज, राजेश शास्त्री, शेखर शास्त्री, दिनेश पाठक, पंडित गोविंद वैद्य, अरुण मिश्र, विश्वनाथ मिश्र, शिवनाथ मिश्र, राकेश शर्मा, प्रीतमदास आहलुवालिया, गोविंद पाठक, अरुण गौड़, दीपक मिश्र, उद्देश्य पाठक, आदित्य पाठक, रेखा शर्मा, प्रियंका सिंगला, कमलेश पंवार, रोशनी देवी, किरण शर्मा, रजनी गुप्ता, तरुणा आहलुवालिया कनाडा, संतोष पाठक, जया मिश्रा, सविता मिश्रा, सुषमा देवी, लक्ष्मी, रानी देवी, ललिता, अंगूरी देवी, रचना राणा, महेंद्र देवी, ललिता, गरिमा पाठक और नीलम सहित बड़ी संख्या में महिलाएं शामिल रहीं।
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