कुरुक्षेत्र 10 जनवरी, हिन्दी सर्वाधिक सहज सरल सुबोध बोधगमय तथा प्रवामयी भाषा है। दुनियाभर में करीब करोड़ लोग हिंदी भाषी हैं। देश के बाहर अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर हिन्दी बंगलादेश, श्रीलंका, इंडोनेशिया, मलेशिया, कम्बोडिया, मॉरीशस, पाकिस्तान, नेपाल, सूरीनाम इत्यादि देशों में सामाजिक, सांस्कृतिक जन संपर्क की प्रेरणा है। दुनिया के 176 विश्वविद्यालयों में हिंदी एक विषय के तौर पर पढ़ाई जाती है। हिन्दी विश्व की सबसे ज्यादा तादाद में बोली जाने वाली 5 भाषाओं में शामिल है। आज पूरा विश्व हिन्दी की शक्ति को पहचान रहा है। यह विचार मातृभूमि सेवा मिशन के संस्थापक डॉ० श्रीप्रकाश मिश्र ने विश्व हिन्दी दिवस के उपलक्ष्य में व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि भाषा अभिव्यक्ति का साधन होती है। भाषा एक अभिव्यक्ति का माध्यम होती है। हमारी भावनाओं को जब शब्द देह मिलता है, तो हमारी भावनाएं चिरंजीव बन जाती है और इसलिए भाषा उस शब्द देह का आधार होती है। भाषा के माध्यम से किसी भी राष्ट्र का व्यक्ति एक दूसरे से जुड़ कर राष्ट्र के विकास में योगदान दे सकता है। भारत की राष्ट्रभाषा कही जाने वाली हिंदी आज पूरे विश्व में विस्तार कर रही है। देश में राष्ट्र भाषा जन संचार का माध्यम होने से ही देश मजबूत होगा और विकास होगा। देश की राजभाषा का सम्मान करना सभी देशवासियों का परम कर्तव्य है। भारत की धार्मिक विभिन्नताओं के बीच एक हिन्दी भाषा ही है, जो एकता का आधार बनती है।
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