करनाल
दिनांक : 6 जनवरी, 2019
नारी सशक्तिकरण का दम भरने वाली बीजेपी सरकार के मुख्यमंत्री मनोहरलाल ने करनाल रेस्ट हाउस पर महिलाओं से अभद्रतापूर्ण व्यवहार किया। महिला पुलिस वोलिंटियर सीएम के पास अपना मांग पत्र लेकर पहुंची थी। प्रदेश के मुखिया के अभद्रतापूर्ण रवैये से पुलिस वांलिटियरों में रोष है। महिला पुलिस वालिंटियरों का कहना है कि प्रदेश मुख्यमंत्री अगर महिलाओं को सम्मान नही दे सकते है तो उनको उनकी बेइज्जती करने का भी कोई अधिकार नही है। बीजेपी सरकार कहती कुछ है और करती कुछ ओर है। प्रदेश के मुख्यमंत्री रोजगार दे तो नही सकते, लेकिन रोजगार छीन जरूर सकते है।
महिला वोलिंटियर सुमन कुमारी, रूबी रानी, मिनाक्षी देवी, जसबीर कोर, रीटा देवी, रीना देवी, पुष्पा, कृष्णा देवी, जाहनवी, ममता, रेखा, उषा रानी व अन्य एपीवी का कहना है कि 14 दिसंबर 2016 में पायलेट योजना के तहत सरकार ने हरियाणा में 999 महिला पुलिस वोलिंटियरों की नियुक्तियां की थी। जिनको प्रति माह 1000 रुपए मानदेय तय किया गया था। यह नियुक्ति महिला के उत्पीडऩ, यौन शोषण, घरेलु हिंसा, नशा मुक्ति, सट्टेबाजी व अन्य गैर कानूनी कार्यो ही सूचना हेतु की गई थी। महिला वोलिंटियरों को केवल पर्दे में रहकर काम करना था लेकिन संगीन क्राइम के दौरान भी महिला पुलिस वोलिंटियरों की मदद ली गई। उन्हें रात के बारह बजे भी कॉल करके थाने में बुला लिया जाता है। गर्मी, सर्दी, बरसात की परवाह किए बगैर पुलिस वोलिंटियरों ने अपने फर्ज को निभाया और आने जाने के लिए अपने घर से खर्च किया। सरकार ने जो मान देय तय किया था, वो भी सिस्टम की लचर कार्यप्रणाली की भेंट चढ़ता हुआ नजर आ रहा है। 10 माह का मान देय आज तक एमपीवी को नही दिया गया।
वोलिंटियरों ने हर परेशानी का सामना करते हुए अपना फर्क निभाया है और पीडि़त महिलाओं को न्याय दिलाकर नारी को सशक्त बनाने का काम किया है लेकिन पांच जनवरी को करनाल रेस्ट हाउस में पुलिस वोलिंटियरों का शिष्टमंडल एमपीवी को पक्का करने या समयाविध बढ़ाने, मानदेय बढ़ाने और फरवरी 2018 से रूका हुआ मानदेय का भुगतान करवाने के लिए प्रदेश मुख्यमंत्री से मिला तो शिष्टमंडल के साथ बहुत ही बुरा बर्ताव प्रदेश के मुखिया ने किया। प्रदेश मुख्यमंत्री ने न सिर्फ अभद्र व्यवहार किया बल्कि एमपीवी के ज्ञापन को भी मोड़़ तोड़ कर वापिस कर दिया और कहा कि एमपीवी को न तो पक्का किया जा सकता है, ना ही मानदेय बढ़ाया जा सकता है और कोई मानदेय एमपीवी को नही दिया जाता। अगर एमपीवी काम करना चाहती है तो करें, नही तो नौकरी छोड़ दें। जो प्रदेश के मुख्यमंत्री बड़े-बड़े मंचों के माध्यम से नारी सशक्तिकरण और बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओं के नारे लगाते है उनका इस प्रकार का रूप सामने आया है, जिससे सभी महिला वोलिंटियरों में रोष है। 31 दिसंबर 2018 को सभी महिला वोलिंटियरों को हटा दिया गया है।
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