कुरुक्षेत्र, 01 जुलाई। कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के मानव संसाधन विकास केन्द्र में वाणिज्य विभाग द्वारा आयोजित रिफ्रेशर कोर्स के ग्यारहवें दिन के पहले तकनीकी सत्र के मुख्य विशेषज्ञ प्रोफेसर आर. पी. दास, कुलपति, बहरमपुर विश्वविद्यालय, ओडिसा से रहे। उन्होंने ‘केस स्टडी ए टीचिंग पैडागौजी‘ विषय पर प्रतिभागियों से चर्चा की। उनके अनुसार संगठन सहयोग के लिए बनाया जाता है न कि संघर्ष के लिए। उन्होंने इस अवधारणा से प्रतिभागियों को एक केस-अध्ययन के माध्यम से अवगत कराया।
सभी प्रतिभागियों ने केस-अध्ययन के विभिन्न पहलुओं पर तकनीकी विशेषज्ञ प्रो. दास से चर्चा की। प्रो. दास के अनुसार एक सफ ल नेता बनने के लिए, एक व्यक्ति का व्यवहार अपने अधीनस्थों के प्रति अच्छा होना चाहिए। प्रो. दास ने बताया कि संचार कभी-कभी संघर्ष का कारण बनता है लेकिन यह सहयोग का स्त्रोत भी हो सकता है। अन्त में प्रो. दास ने बताया कि लम्बे समय में किसी संगठन को सुचारू रूप से चलाने के लिए लोगों का प्रबन्धन बहुत महत्वपूर्ण है।
दूसरे तकनीकी सत्र के मुख्य वक्ता गुरूकुल कांगडी विश्वविद्यालय, हरिद्वार के प्रबन्धन विभाग से प्रो. वी. के. सिंह रहे। उन्होंने विपणन के एक अंधेरे पक्ष के रूप में ‘एस्ट्रोटफिंग‘ के विषय पर चर्चा की। उन्होंने विभिन्न जीवंत उदाहरणों की मदद से इस अवधारणा को समझाया। उन्होंने विपणन में ‘फिशिंग मॉडल‘ एवं ‘ट्रॉली मॉडल‘ के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि ‘व्यक्तित्व प्रबंधन सॉफ्टवेयर‘ एक एस्ट्रोटर्फ का सबसे अच्छा मित्र है। दिन के तीसरे और आखिरी तकनीकी सत्र के मुख्य वक्ता प्रो. आर. एस. अरोड़ा, डीन, फैक्लटी ऑफ बिजनेस स्टडिज, पंजाबी विश्वविद्यालय, पटियाला से रहे। उन्होंने ‘तनाव प्रबंधन‘ इस विषय पर प्रतिभागियों से चर्चा की। उन्होंने विभिन्न प्रकार के तनावों के बारे में बताया एवं तनाव को कम करने की तकनीकों का भी विशलेषण किया। उन्होंने बताया कि तनाव का इष्टतम स्तर प्रत्येक व्यक्ति में भिन्न होता है। उन्होंने एक प्रश्नावली की मदद से प्रतिभागियों को अपना तनाव स्तर निकालने के लिए कहा।
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