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Home / Events / संविधान के रचियता बाबा साहेब को उनकी 128वीं जयंती पर याद किया गया, मुख्य कार्यक्रम सैक्टर-16 के अम्बेड़कर भवन में सम्पन्न हुआ, राजनीति शास्त्र के जाने-माने विद्वान तथा दयाल सिंह कॉलेज के पूर्व प्राचार्य डॉ. रामजी लाल रहे मुख्य वक्ता

संविधान के रचियता बाबा साहेब को उनकी 128वीं जयंती पर याद किया गया, मुख्य कार्यक्रम सैक्टर-16 के अम्बेड़कर भवन में सम्पन्न हुआ, राजनीति शास्त्र के जाने-माने विद्वान तथा दयाल सिंह कॉलेज के पूर्व प्राचार्य डॉ. रामजी लाल रहे मुख्य वक्ता

करनाल 14 अप्रैल: आजाद भारत का संविधान लिखने जैसा अद्वितीय काम करने वाले बाबा साहेब डॉ. भीमराव अम्बेडकर को दलितो के पक्षधर या नेता कहना उन जैसे राष्ट्रीय नायको का अपमान है। वास्तव में ऐसे व्यक्तित्व जिन्होने संविधान में समता, समानता, स्वतंत्रता, महिलाओं और मजदूरो को उनके अधिकार दिलाने पर जोर दिया हो, उन्हे किसी एक जाति तक सीमित नही रखा जाना चाहिए। ऐसे महापुरूष जाति जैसी संकीर्णताओं से ऊपर होते हैं, बेशक उन्होने शोषितो के लिए आरक्षण जैसी व्यवस्था कर उन्हे ऊपर उठाने का काम किया था। यह उदगार दयाल सिंह कॉलेज के सेवानिवृत्त प्राचार्य डॉ. रामजी लाल ने बाबा साहेब की 128वीं जयंती पर सैक्टर-16 स्थित डॉ. भीमराव अम्बेड़कर भवन में आयोजित कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के तौर पर बोलते हुए व्यक्त किए। इस कार्यक्रम का आयोजन अम्बेड़कर समाज कल्याण सभा की ओर से किया गया था।

उन्होंने कहा कि बाबा साहेब ने जिस संविधान की रचना की थी, वह दुनिया के सभी संविधानो में इसलिए श्रेष्ठ है क्योंकि इसमें आजाद भारत के सभी लोगो को अपनी बात कहने, किसी भी धर्म को अपनाने, शिक्षा व समाज में समान रूप से आगे बढऩे के दिए हैं। सबसे बड़ी बात यह है कि कोई अमीर है या गरीब, महिला है या पुरूष, सबको वोट का समान अधिकार है। संविधान की इन्ही विशेषताओं के कारण भारत में प्रजातंत्र आजतक एक आदर्श रूप में कायम है, बेशक समय-समय पर इसमें कई संशोधन किए गए हों। उन्होने कहा कि डॉ. अम्बेडकर दूरदर्शी और महान विचारक थे। उन्होंने शिक्षा को प्राथमिकता दी, क्योंकि उनका ख्याल था कि भारत में दलित और शोषित वर्ग सामाजिक बुराईओं से मुक्ति पा सकते हैं। उन्होंने कहा कि भारत 130 करोड़ आबादी के लोगो का देश है, यहां 8 बड़े धर्म, 5 हजार 208 जातियां, 80 हजार उप जातियां तथा 57 बड़े सांस्कृतिक क्षेत्र मौजूद हैं, इतने बड़े मुल्क में जहा इतनी सारी जातियां हो, वहां जातिवाद का होना स्वभाविक है। इसी के दृष्टिगत बाबा साहेब ने संविधान की प्रस्तावना की शुरूआत हम भारत के लोग कहकर शुरू की थी, जिसमें सभी को एक यानि राष्ट्रीय एकता के सूत्र में बांधा गया था।

उन्होंने कहा कि डॉ. भीमराव अम्बेड़कर के आदर्श और उनके विचार, आज भी प्रासंगिक हैं। उनकी जयंती मनाना तभी सार्थक होगी, जब हम उनके समानता जैसे विचारो पर चलेंगे और ऐसे देश का निर्माण करेंगे, जहां कोई छोटा-बड़ा नही रहेगा और सभी सुखी व सम्पन्न होंगे।
राष्ट्रीय सफाई कर्मचारी आयोग के पूर्व सदस्य गोपाल कृष्ण सहोत्रा तथा डॉ. भीमराव अम्बेड़कर समाज कल्याण सभा के प्रधान अमर सिंह पातलान ने भी बाबा साहेब के विचारो और फिलॉस्फी पर बोलते हुए उन्हे 20वीं सदी का सबसे श्रेष्ठ पुरूष बताया और कहा कि यदि बाबा साहेब की सोच के अनुसार देश में सारे सिद्धांत लागू होते, तो आज भारत दुनिया का सबसे श्रेष्ठ देश बनने का गौरव प्राप्त करता। उन्होंने कहा कि बाबा साहेब ने एक वोट एक कीमत, सबको जिस वोट का अधिकार दिया था, वह राजनैतिक न्याय और एक मजबूत लोकतंत्र का सबसे खूबसूरत पहलू है, क्योंकि एक मजदूर और प्रधानमंत्री सबको वोट करने का समान अधिकार है। उन्होंने कहा था कि जब तक देश में समाजिक रूप से समानता नही आएगी, आर्थिक समानता की कल्पना, बेईमानी होगी।

कार्यक्रम में सभी वक्ताओं और महिलाओं ने बाबा साहेब के चित्र पर पुष्प अर्पित कर उनका स्मरण किया। भारतीय राजस्व सेवा के रिटायर्ड अधिकारी डॉ. जीतराम कैयत की धर्मपत्नी श्रीमति कौशल्या देवी ने कार्यक्रम की अध्यक्षता की। सभा की ओर से डॉ. रामजी लाल, गोपाल कृष्ण सहोत्रा, रमेश सैनी, डॉ. सुनील कुमार और कार्यकारिणी के सदस्यो को स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया गया। कार्यक्रम में जन स्वास्थ्य विभाग के अधीक्षण अभियंता रमेश फूले, एन.डी.आर.आई. के प्रधान वैज्ञानिक डॉ. सांख्ला, वरिष्ठ अध्यापक बलवंत सिंह, समाजसेवी बलराज रंगा, अमर सिंह, देशराज, ओमप्रकाश जास्ट, जयसिंह चौपड़ी, डॉ. ललित, नरेश रंगा, रणजीत सिंह चौहान, बनारसी लाल, समाजसेवी राजेन्द्र शर्मा, मंगत राम सहोत्रा तथा भीमराव अम्बेड़कर समाज कल्याण सभा के सदस्यों के अतिरिक्त बड़ी संख्या में महिलाएं भी उपस्थित थी।

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