करनाल 10 जुलाई: स्मार्ट सिटी करनाल में जल पुर्नभरण को लेकर शिक्षण संस्थाओं व पार्कों में बनाए गए रेन वाटर हार्वेस्टर से जल संचयन की मुहिम आने वाले दिनो में प्रबल होगी। शहर में इस तरह के उपाय दूसरों को राह दिखाने का काम कर रहे हैं और नागरिक पानी की कीमत तथा इसे बचाने का महत्व समझने लगे हैं। आईय, बात करते हैं रेलवे रोड़ स्थित राजकीय महिला कॉलेज की। क्षेत्रफल में छोटा होने के बावजूद भी यहां बनाए गए दो रेन वाटर हार्वेस्टर सफलतापूर्वक चल रहे हैं। इन्हे तैयार करने के पीछे की कहानी भी दिलचस्प है। वास्तव में बरसात के दौरान थोड़ी सी बारिश से कक्षाओं के समक्ष सारा परिसर पानी से भर जाता था। कई दिन तक चलने वाली बारिश से तो हालात इतने बदत्तर हो जाते थे कि विद्यार्थी और प्राध्यापकों को घुटनों तक भरे पानी में से गुजरकर एक कक्षा से गुजर कर दूसरी कक्षा में जाना पड़ता था, इस समस्या को लेकर सब परेशान थे। फिर एक उपाय समझ में आया और शहर में हाइड्रोलोजिस्ट के कार्यालय से सम्पर्क कर यहां रेन वाटर हार्वेस्टर बनाने का निर्णय लिया गया और परिसर में एक की बजाय दो-दो हार्वेस्टर बना दिए गए। नौ गुणा नौ फुट के आयताकार में बने वाटर हार्वेस्टर अपनी क्षमता के मुताबिक यहां का सारा रेन वाटर अपने अंदर लेकर उसे रिचार्ज कर रहे हैं। इनको तैयार करने से पहले परिसरों का ढलान भी हार्वेस्टरों की तरफ किया गया, ताकि सारा पानी शीघ्रता से इसमें समा सके।
बुधवार को हरियाणा तालाब व अपशिष्टï जल प्रबंधन प्राधिकरण के सदस्य तेजिन्द्र सिंह तेजी ने राजकीय महिला कॉलेज का दौरा किया। कॉलेज की वर्तमान प्राचार्य डॉ. अनुराधा पुनिया ने इस सम्बंध में बताया कि इस महाविद्यालय के बाद ही शहर के दूसरे कॉलेजो में रेन वाटर हार्वेस्टर सिस्टम बने हैं और अभी भी एक दो कॉलेज ऐसे हैं, जहां इस तरह की व्यवस्था नही है। अब तो उन्हे भी अपने यहां रेन वाटर हार्वेस्टर बना लेने चाहिए। उन्होंने कहा कि इसके ओर भी फायदे हैं, आसमान से गिरने वाला पानी हार्वेस्टर के जरिए जमीन में चला जाता है और कॉलेज में स्वच्छता भी बनी रहती है, जबकि इनके बनाने से पहले कई-कई दिनो तक पानी भरा रहता था, जिसमें बदबू हो जाती थी और गंदे पानी से होने वाली बीमारी का भय बना रहता था। अब अध्यापक और विद्यार्थी दोनो खुश हैं। प्राचार्य के साथ कॉलेज के वरिष्ठï प्राध्यापक सुरेश कुमार, विवेक अत्री तथा नरेश दलाल ने भी हरियाणा तालाब व अपशिष्टï जल प्रबंधन प्राधिकरण के सदस्य तेजिन्द्र सिंह तेजी की उपस्थिति में कॉलेज में रेन वाटर हार्वेस्टर से पहले की स्थिति बताई और हाइड्रोलोजिकल के अधिकारियों के प्रति आभार प्रकट किया।
दूसरी और शहर के पब्लिक पार्कों में भी अब रेन वाटर हार्वेस्टर बनाने की होड़ लगी है। वार्ड नम्बर 9 के पार्कों में इनकी संख्या सबसे ज्यादा है। यहां के पार्षद मुकेश आरोड़ा ने वार्ड के प्रबुद्घ नागरिकों और प्रकृति पे्रमियों को साथ लेकर कुछ महीने पहले पार्कों में रेन वाटर हार्वेस्टर बनाने की मुहिम चलाई, जो अत्यंत सफल हुई है। सैक्टर-7 के एक पार्क में मुकेश अरोड़ा ने एक रेन वाटर हार्वेस्टर का दौरा करवाया। अरोड़ा ने बताया कि रेन वाटर हार्वेस्टर के ना होने से पार्कों के आस-पास बरसात का पानी पांच-पांच दिनो तक भरा रहता था, जो यहां के बाशिंदो के लिए परेशानी का सबब बन जाता था। अब इस दिक्कत से मुक्ति मिल गई है। पार्क के आस-पास की गलियों का सारा पानी यहां आकर हार्वेस्टर में समा जाता है। इससे गलियों में साफ-सफाई बनी रहती है। उन्होंने बताया कि रेन वाटर हार्वेस्टर पर आने वाले खर्च को कम करने के लिए शहर के नगर निगम ने एक अत्यंत किफायती मॉडल दिया है, जिस पर मात्र 50 हजार रूपये तक खर्चा आता है। आने वाले दिनो में शहर में इस मॉडल पर आधारित बड़ी संख्या में रेन वाटर हार्वेस्टर दिखाई देंगे। तालाब प्राधिकरण के सदस्य तेजिन्द्र सिंह तेजी ने मुकेश अरोड़ा और सैक्टरों में निवास करने वाले नागरिकों व नगर निगम के प्रयासों की सराहना की है। उपायुक्त विनय प्रताप सिंह ने शहर के तमाम नागरिकों से भी अपील की है कि जल का संचयन अब समय की मांग है, नहीं तो आने वाली पीढिय़ा हम पर दोष लगाएंगी। उन्होंने आम जनता से कहा है कि जल बचाने की मुहिम को एक जन आंदोलन बनाएं, ताकि बूंद-बूंद पानी को बचाया जा सके।
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