श्री राजेंद्र सिंह प्रसिद्ध भारतीय जल संरक्षणवादी और पर्यावरणविद (द मैगसेसे अवार्ड और स्टॉकहोम वॉटर प्राइज़ पाने वाले) और सिंह को भारत का जल पुरुष कहा जाता हैं उन्होंने ने आज आईसीएआर-नेशनल डेयरी रिसर्च इंस्टीट्यूट में चल रहे फाउंडेशन प्रोगाम में छात्रों को जल संरक्षण पर व्याख्यान दिया। उन्होंने कहा की हमारे ग्रह और भविष्य की पीढ़ियों को बचाने के लिए पानी के संरक्षण पर जोर दिया जाना चाहिए। उन्होंने एक अनोखी विधि का आविष्कार किया है जिससे बाढ़, मिट्टी और नदियों को बहाल करने और वन्यजीवों को वापस लाने में मदद मिल सकती है उनकी ये तकनीक सस्ती और सरल है और दुनिया भर में इस तकनीक से पानी का संरक्षण किया जा सकता है आज हमारा भूजल सूखा रहा है और फसलें खराब हो रही है नदियां, जंगल और वन्यजीव गायब हो रहे है और लोग कस्बों में की और पलायन कर रहे है उन्होंने कहा कि हमारे ग्रह पर पानी बहुत है। लेकिन उसमें से बहुत कम पीने के लिए सुरक्षित है। पृथ्वी पर 97% से अधिक पानी खारा पानी है। जब हमने अपना काम शुरू किया हम केवल पीने के पानी के संकट को देख रहे थे और इसे कैसे हल किया जाए. सिंह ने कहा की आज हमारा उद्देश्य और अधिक है। यह सदी शोषण, प्रदूषण और अतिक्रमण की है। यह सब रोकने के लिए पानी पर युद्ध को शांति में परिवर्तित करना यही मेरे जीवन का लक्ष्य है। दुनिया में जहां ताजे पानी की मांग लगातार बढ़ रही है हम एक दशक के भीतर एक गंभीर जल संकट का सामना करेंगे। अगर हम यह नहीं सीखेंगे कि हमारे पानी की बेहतर देखभाल कैसे करें। आज की पानी की समस्याओं को केवल विज्ञान या प्रौद्योगिकी द्वारा हल नहीं किया जा सकता है। आज शासन, नीति, नेतृत्व और सामाजिक लचीलापन की मानवीय समस्याएं हैं। सिंह का जीवन महिलाओं के सशक्तीकरण, आधुनिक वैज्ञानिक और तकनीकी दृष्टिकोणों से जुड़ने और पारंपरिक तरीकों के माध्यम से स्थानीय जल समस्याओं को हल कर
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