करनाल 14 जून: जिला में 7वीं आर्थिक जनगणना का कार्य आरंभ किया जा रहा है। यह गणना मौखिक नहीं बल्कि डिजिटल होगी। इस बार 7वीं आर्थिक जनगणना अटल सेवा केन्द्रों (सीएससी) के माध्यम से शुरू की जाएगी। इस उद्देश्य के लिए शुक्रवार को स्थानीय पंचायत भवन में भारत सरकार की सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यन्वयन मंत्रालय तथा सीएससी ई गर्वेनेंस सर्विसेज इंडिया लिमिटेड द्वारा संयुक्त रूप से अटल सेवा केन्द्रों संचालकों के जिला स्तरीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस प्रशिक्षण कार्यक्रम की अध्यक्षता जिला परियोजना अधिकारी संगीता मेहता ने की।
इस मौके पर एनएसएसओ के अधिकारी ललित बत्रा, स्टेट प्रोजेक्ट मैनेजर प्रभजोत सिंधू ने जिला के सीएससी संचालकों को आर्थिक जनगणना का कार्य का विस्तारपूर्वक प्रशिक्षण दिया। जिला परियोजना अधिकारी संगीता मेहता ने बताया कि भारत में सबसे पहली आर्थिक जनगणना 1977 हुई थी जोकि हर 5 वर्ष में होती आ रही है, आखिरी जनगणना 2013 में हुई थी। छ: जनगणना होने के बाद इस वर्ष 2019 में 7वीं जनगणना है। उन्होंने बताया कि इसमें इकॉनिमिक या आर्थिक जनगणना भी होती है बल्कि इंसानों की नहीं देश में चल रहे हर तरह के कामकाज की जो किसी भी तरह आर्थिक गतिविधियों से जुड़ा हो। कोई भी ऐसा कार्य जो आप अपने लिए नहीं करते बल्कि पैसे कमाने के लिए करते हैं।
उन्होंने बताया कि सरकार को देश में रहने वालों की आर्थिक स्थिति, रहन सहन का पता करना और यह पता करना कि देश में छोट स्तर, मध्यम स्तर और बड़े स्तर के कितने व्यापार चल रहे हैं। लोगों का रूझान किस तरह के व्यापार में है ताकि जब भी कोई योजना बनानी हो तो सरकार इस जनगणना की मदद से लोगों की जरूरत के हिसाब से एक बेहतर और लाभकारी योजना बना सके। इस मौके पर परिंयोजना अधिकारी संगीता मेहता, एएनएसएसओ के अधिकारी ललित बत्रा, स्टेट प्रोजेक्ट मैनेजर प्रभजोत सिंधू, एफआई ऑफिसर संदीप राणा, जिला मैनेजर विनोद शर्मा, विकास दलाल व जिला कोर्डिनेटर बृजेश गिरी उपस्थित थे।
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