Breaking News
Home / Uncategorized / मानव संसाधन विकास केन्द्र कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय द्वारा प्रायोजित अभिविन्यास कार्यक्रम का आयोजन जारी

मानव संसाधन विकास केन्द्र कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय द्वारा प्रायोजित अभिविन्यास कार्यक्रम का आयोजन जारी

कुरुक्षेत्र। मानव संसाधन विकास केन्द्र कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय कुरुक्षेत्र के संगोष्ठी कक्ष में चल रहे विश्वविद्यालय  अनुदान आयोग द्वारा प्रायोजित 83वें अभिविन्यास कार्यक्रम में द्वितीय वक्तव्य सोमेश गोयल डी.जी. हिमाचल प्रदेश द्वारा प्रस्तुत किया गया। उन्होंने पुलिस को लेकर लोगो के मन में प्राय: रहने वाली श्ंाकाओं का सुधार घर के रूप में देखते हैं तथा बंधकों को सहज जीवन जीने की सुविधा एवं अवसर देना प्रशासन का कर्तव्य है।
  प्रथम एवं द्वितीय व्याख्यान प्रो. पवन कुमार शर्मा रसायन विज्ञाग विभाग कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय ने प्रस्तुत किए उन्होंने बताया कि एच.आई.वी वायरस किस प्रकार शरीर में फैलकर रोग प्रतिरोधक क्षमता को कम कर देता है। इस विषाणु का जड़ से नाश करने का उपाय अभी तक चिकित्सा विज्ञान के पास नहीं है परन्तु इस विषाणु के कुप्रभाव को बड़ी को बड़ी सीमा तक कम किया जा सकता है। यह रोग वस्तुत: अफ्रीका को एस.आई.वी ग्रस्त चिम्पांजी से मनुष्य में आया।  यह रोग शोविंग टाटू अथवा कोई भी ऐसी क्रिया जिससे दो व्यक्तियों का रक्त परस्पर सम्पर्क में आए उनमें से एक के एच.आई.वी पॉजिटिव होने की स्थिति में फैलता है। प्रो. शुचिस्मिता, संगीत विभाग कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय, कुरुक्षेत्र  ने संगीत की शक्ति का परिचय देते हुए व्यावहारिक प्रयोग करवाए।  अपराहन सत्र में 5 प्रतिभागी प्राध्यापको द्वारा विविध प्रासगिंक सन्दर्भों पर पावर प्वाइंट प्रस्तुति दी गई।  यह प्रस्तुति डॉ. संजय त्यागी, प्रोफेसर संगणक विज्ञान विभाग कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय, कुरुक्षेत्र  के निरीक्षण में हुई।  पूर्वाह्न एवं अपराहन में सत्र की अध्यक्षता क्रमाश: सुभाष, प्राध्यापक भौतिकी विभाग, राजकीय महाविद्यालय करनाल मीनू, वाणिज्य विभाग राजकीय महाविद्यालय करनाल एवं डॉ. सन्दीप कुमार प्राध्यापक रसायन विभाग, राजकीय महाविद्यालय करनाल ने किया।
    83 वें अभिविन्यास पाठ्यक्रम के 27 वें दिन का प्रथम व्याख्यान डॉ. सुभाष चन्द्र हिन्दी विभाग कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय कुरुक्षेत्र द्वारा प्रस्तुत किया गया। उन्होंने कहा कि जीवन के प्रत्येक कार्य में हम सर्वाधिक प्रयोग भाषा का करते हैं। समस्त भाषाओं में निहित ज्ञान और विज्ञान के तत्व समान रूप से स्वीकार्य हैं तथा आदरणीय हैं इसलिए भाषा के आधार पर मनुष्य समाज को बाँट देना अनुचित है। द्वितीय एवं तृतीय व्याख्यान डॉ. अविनाश भटनागर, सह निदेशक स्टॉफ ट्रेनिग इन्स्टीट्यूटन हापुड द्वारा प्रस्तुत किया गया। उन्होंने कहा कि पुराने या नये में जो सर्वहितकारी हो स्वीकार्य है। पुरानी बात को युगानुकूल एवं विदेशी बात को स्वदेशानुकूल रूप में स्वीकार करना चाहिए। प्रथम एवं द्वितीय सत्र की अध्यक्षता क्रमश: सुश्री कविता नरवाल, प्राध्यापिका वाणिज्य विभाग राजकीय महाविद्यालय मतलौडा एवं विकास शर्मा, प्राध्यापक संस्कृत राजकीय महिला महाविद्यालय जीन्द ने की।  समस्त कार्यक्रम प्रो. नीरा वर्मा एवं डॉ. संजीव शर्मा के निर्देशन में संचालित हुआ।

About postnow

Check Also

सरकार ने किसानों के लिए खोला क्षतिपूर्ति पोर्टल:नेहा सिंह

कुरुक्षेत्र । उपायुक्त नेहा सिंह ने कहा कि सरकार ने किसानों के लिए राजस्व विभाग …

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *