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विद्या भारती संस्कृति शिक्षा संस्थान में हुआ कवि गोष्ठी का आयोजन

कुरुक्षेत्र।  भारतरत्न अटल बिहारी वाजपेयी की स्मृति में विद्या भारती संस्कृति शिक्षा संस्थान में हरियाणा साहित्य अकादमी के सहयोग से मंगलवार को कवि गोष्ठी का आयोजन किया गया। इस अवसर पर मुख्यातिथि हरियाणा के सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री कृष्ण बेदी थे। विशिष्ट अतिथि के रूप में थानेसर के विधायक सुभाष सुधा, लाडवा के विधायक डॉ. पवन सैनी रहे। कार्यक्रम की अध्यक्षता विद्या भारती संस्कृति शिक्षा संस्थान के सचिव अवनीश भटनागर ने की। कार्यक्रम का शुभारम्भ मां सरस्वती के समक्ष दीप प्रज्वलन के साथ हुआ।
इस अवसर पर हरियाणा के सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री कृष्ण बेदी ने भारतरत्न अटल बिहारी वाजपेयी की स्मृति में कवि गोष्ठी के सफल आयोजन पर आयोजकों को शुभकामनाएं दीं। उन्होंने विद्या भारती संस्कृति शिक्षा संस्थान द्वारा समाज कल्याण हेतु शिक्षा, संस्कृति के क्षेत्र में किए जा रहे उल्लेखनीय कार्यों की सराहना करते हुए विद्या भारती संस्थान को 5 लाख रुपए अनुदान देने की घोषणा की। लाडवा के विधायक पवन सैनी ने उपस्थित जनसमूह से अटल बिहारी वाजपेयी जी की कविताएं एक बार अवश्य सुनने का आह्वान किया। ये कविताएं वास्ताव में जीवन में बदलाव लाने का काम करती हैं।
विद्या भारती संस्कृति शिक्षा संस्थान के निदेशक डॉ. रामेन्द्र सिंह ने गोष्ठी में मंचासीन कवियों एवं अतिथिजन का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि देशभक्ति से ओतप्रोत कविताओं में भावों का सभी ने रसास्वादन किया है। उन्होंने कहा कि विद्या भारती केवल एक भवन नहीं है, इसमें जन भावनाएं हैं, सामाजिक संवेदना है और इन्हीं कारणों से सामाजिक चेतना का केन्द्र बनकर पूरे देश में अपनी ख्याति आप सबके विचारों के माध्यम से प्रचार-प्रसार कर रहा है। भारतीय संस्कृति की विचारधारा नई पीढ़ी के अंदर जाए, उसमें संक्रमित हो, पुष्पित-पल्लवित हो, उसके लिए यह संस्थान अखिल भारतीय संस्कृति ज्ञान परीक्षा का आयोजन करता है। इस वर्ष इस परीक्षा में 1.5 लाख की अप्रत्याशित वृद्धि हुई है, जिसके अंतर्गत इस वर्ष 21 लाख 50 हजार छात्रों ने यह परीक्षा दी। इस अवसर पर हरियाणा साहित्य अकादमी की निदेशक कुमुद बंसल ने कार्यक्रम की भूमिका रखते हुए कहा कि कविताएं वही लिख सकता है जिसके दिल में संवेदना होती है। अटल जी कुशल प्रशासक के साथ लेखक भी थे। उन्होंने अकादमी की ओर से कवियों, अतिथियों एवं उपस्थित गणमान्य व्यक्तियों का आभार व्यक्त किया। विद्या भारती परिसर में देर रात्रि तक चली कवि गोष्ठी में सम्माननीय कवि डॉ. सारस्वत मोहन मनीषी गुरुग्राम, डॉ. जगबीर राठी रोहतक, डॉ. कृष्ण कुमार महेन्द्रगढ़, डॉ. क्यूटी जींद, डॉ. कुमार विनोद, अशोक राठी, गायत्री आर्य कौशल ने अपनी रचनाएं प्रस्तुत कीं।
डॉ. सारस्वत मोहन मनीषी ने राष्ट्रभक्ति से प्रेरित कविता पाठ करते हुए कहा ‘‘हम बल बन जाएंगे बलवान तिरंगे का, छिनने का कभी देंगे वरदान तिरंगे का, हम खूब जानते हैं सम्मान तिरंगे का, होने ना कभी देंगे अपमान तिरंगे का’’। एक और कविता में उन्होंने कहा ‘‘हंसना भी जरूरी है, रोना भी जरूरी है, जगना भी जरूरी है, सोना भी जरूरी है। पाना भी जरूरी है, खोना भी जरूरी है, खेतों में बंदूकें बोना भी जरूरी है।
डॉ. कृष्ण ने अपनी रचना पढ़ते हुए कहा ‘‘राष्ट्र की जन-चेतना का गान वन्दे मातरम्, राष्ट्र भक्ति प्रेरणा का मान वन्दे मातरम्’’। हरियाणवी कविता में उन्होंने कहा ‘‘याद घणां वो आया रै भगवान परदेसी, वो लेग्या अपनी गैल म्हारी जान परदेसी’’।
 गायत्री आर्य कौशल ने कविता पाठ प्रस्तुत करते हुए कहा ‘‘वक्त रहते जो ना कही तुमसे, वक्त के बाद बहुत याद आई, और उठ के महफिल से तेरे जाने के बाद मुझे वो बात बहुत याद आई। राष्ट्र प्रेम को समर्पित रचना में उन्होंने कहा ‘‘नई क्रांति का देशवासियो फिर से बिगुल बजाना है, और सोने की चिडिय़ा का खोया गौरव वापिस लाना है।
जगबीर राठी ने कहा ‘‘कड़ी मेहनत जिसकी निशानी है, सारी दुनिया जिसकी दीवानी है, पड़ी मुश्किल हंसता मिले, यही हिन्दुस्तानी की निशानी है’’। हरियाणवी अंदाज में अटल जी पर लिखी कविता में उन्होंने कहा ‘‘भारत देश महान मैं, चर्चा सै यो जहान मैं, हे अटल जी फिर से जन्मो, म्हारे हिन्दुस्तान मैं। इसके अलावा उन्होंने माटी का चूल्हा पर रचित कविता में कहा ‘‘उसे देख कै एक मां का दिल पसीज गया, जब वो माटी का चूल्हा बारिश मैं भीज गया….’’।
डॉ. अशोक राठी ने अपने कविता पाठ में कहा ‘‘जागो भारत जागो देखो, आ पहुंचा दुश्मन छाती पर, पहले हारा था वो हमसे, अब फिर भागेगा डरकर…’’। उसकी खातिर शीर्षक के अंतर्गत कविता में उन्होंने कहा ‘‘घनी रोशनी के घटाटोप अंधेरे कोनों में, खामोश होती जाती चीखें, अट्टाहस कर रहे होते दुशासन, जब हम बेटियों को सिखा रहे होते हैं नैतिकता का पाठ….’’।
डॉ. क्यूटी ने अपने कविता पाठ में कहा ‘‘हरियाणे की नार बहू, बेटी किसान की, मत समझो कमजोर पूरी आन की। म्हारी हिम्मत की देवै गवाही माटी खलियान की….’’। एक और पंजाबी कविता में उन्होंने कहा ‘‘सुलग रहे हैं अब मन तो, उठने लगा धुंआ सा, टूटे हुए मन पर छाने लगा कुहासा…’’। अटल जी पर कविता सुनाते हुए उन्होंने कहा ‘‘सुरूर इक महसूस करता था हर दिल, कि वाह-वाह से झूम उठती थी महफिल। फिजां भी इतराने लगती थी उस पल, कभी जब कविता सुनाते थे अटल।
डॉ. कुमार विनोद ने कविता पाठ करते हुए कहा ‘‘बहुत दिनो के बाद मिले हो, ठीक-ठाक तो हो, और गुमसुम-गुमसुम बैठे हो, ठीक-ठाक तो हो। एक और कविता में उन्होंने कहा ‘‘कहां दरकार सूरज को किसी छुट्टी की रहती है, और नदी को भी कहां फुर्सत वो संडे को भी बहती है।
मंच संचालन डॉ. कृष्ण कुमार ने किया। कवि गोष्ठी में डॉ. प्रीतम सिंह एवं डॉ. राजेश चौहान ने भी अटल जी पर कविता पाठ किया। कार्यक्रम में डॉ. लालचंद गुप्त ‘मंगल’, डॉ. सी.सी. त्रिपाठी, डॉ. शशि मित्तल, डॉ. हुकम सिंह, डॉ. आर. ऋषि, डॉ. सुरेन्द्र मैहता, डॉ. हरि सिंह, के.सी.रंगा, जयभगवान सिंगला, धर्मवीर मिर्जापुर, रत्नचंद सरदाना, रेनू खुग्गर, सहित नगर के गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।

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