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मकर संक्रांति जन आस्था एवं लोक रुचि का पर्व

कुरुक्षेत्र 14 जनवरी | मकर संक्रांति त्यौहारहिंदुओं के देव सूर्य को समर्पित है। जब सूर्य धनु से मकर राशि या दक्षिणायन से उत्तरायण की ओर स्थानांतरित होता हैतब संक्रांति का त्यौहार मनाया जाता है। संक्रांति का मतलब हैसूरज का एक राशि से दूसरी राशि मे प्रवेश करना है। भारत के अलग-अलग हिस्से में मकर संक्रांति विभिन्न नामों के साथ मनाई जाती हैकर्नाटक में संक्रांतितमिलनाडु और केरल में पोंगलपंजाब और हरियाणा में माघीगुजरात और राजस्थान में उत्तरायण एवं उत्तराखंड मे उत्तरायणी के नाम से जानी जाती है।  यह विचार मातृभूमि सेवा मिशन द्वारा संचालित के संयोजक डॉ० श्रीप्रकाश मिश्र ने मकर संक्रांति के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में व्यक्त किए। मातृभूमि सेवा मिशन द्वारा जरूरतमंद बालिकाओं के लिए संचालित माँ पीताम्बरा बालिका संस्कार केन्द्र के बच्चों एवं अभिभावकों के लिए सहभोज का भी आयोजन किया गया। सभी बच्चों ने बहुत ही आनंद एवं समरस वातावरण में मकर संक्रांति का उत्सव मनाया। डॉ० श्रीप्रकाश मिश्र ने कहा मकर संक्रांति का पर्व सामाजिक व्यवस्था में समता का पर्व है। यह जन-आस्था तथा लोकरुचि का पर्व है। इसे समूची सृष्टि में जीवन अनुप्राणित करने वाले भगवान सूर्य की उपासना का पर्व भी कहते हैं। लोक संस्कृति पर्व-मकर संक्रांति सम्पूर्ण भारत में बड़े ही हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है। संक्रमण पर्व मकर संक्रांति का मकर शब्द का भी विशेष महत्व माना जाता है। इस महत्व को अलग-अलग भाषियों ने अपने-अपने ढंग से प्रतिपादित किया है।

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