कुरुक्षेत्र, 21 जनवरी : मां शाक म्भरी सेवक मंडल द्वारा नरकातारी रोड स्थित मां शाकंभरी देवी मंदिर में सोमवार को शाकंभरी जयंती उत्सव धूमधाम से मनाया गया। इस अवसर पर हवन, भजन-कीर्तन, भक्ति प्रवचन, कन्या पूजन और विशाल भंडारा आयोजित किया गया। अध्यक्ष अशोक शर्मा बाली ने सभी श्रद्धालुओं सहित सर्वप्रथम कुलदेवी मां शाकंभरी देवी, मां शताक्षी देवी, मां भ्रांबरी देवी, मां भीमा देवी और भूरा देव की मूर्तियों को शाक-सब्जियों और फलों की मालाओं से सजा कर श्रृंगार करके 56 भोग लगाए। तत्पश्चात मंदिर के पुजारी पंडित रमेश चंद्र बृजवासी ने हवन करवाया, जिसमें सभी भक्तों ने आहुतियां ड़ाली। गायकों ने मधुर भजन सुनाकर समां बांधा। अध्यक्ष अशोक शर्मा बाली ने बताया कि उत्तर प्रदेश के सहारनपुर जिले में शिवालिक पर्वत माला की तलहटी में मां शांकभरी देवी का सिद्ध दरबार स्थापित है, जहां दूर-दूर से श्रद्धालु पहुंच कर मां के दर्शन करते है। मां शांकभरी देवी भवन से पूर्व भक्तों को भूरा देव के दर्शन करने होते है। कहा जाता है कि भूरा देव के दर्शनों के बिना मां शांकभरी देवी यात्रा अपूर्ण मानी जाती है। पंडित रमेश चंद्र बृजवासी ने मां शांकभरी देवी का वर्णन बताते हुए कहा कि शास्त्रों के अनुसार कालांतर में जब पृथ्वी पर चारों ओर अकाल पड़ गया तो अनाज की भारी कमी हो गई। ब्रह्मा जी के मार्ग दर्शन में देवताओं और ऋषि-मुनियों ने मां जगदम्बा की स्तुती की। जिस पर मां जगदम्बा ने शांकभरी देवी का अवतार लेकर अपने शरीर से शाक-सब्जियों एवं फलों को उत्पन्न करके मनुष्यों की क्षुधा को शांत किया।
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