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लुप्त हो रही संस्कृति को संरक्षित कर रहा है अंतर्राष्ट्रीय सरस्वती महोत्सव

पिहोवा 9 फरवरी – हरियाणा की लोक कला और संस्कृति की लुप्त होने के कगार पर पहुंच चुकी कई विधाओं को संरक्षित करने का काम अंतर्राष्ट्रीय सरस्वती महोत्सव कर रहा है। इस महोत्सव में ढेरु गायन गाथा, बीन बांसुरी जैसी लोक कलाओं को सरस्वती के पावन तट पर देखा जा रहा है। इस महोत्सव से न केवल लोक संस्कृति को जींवत रखने का प्रयास सरकार की तरफ से किया जा रहा है बल्कि लोक कलाकारों को रोजगार के अवसर भी उपलब्ध करवाएं जा रहे है। अहम पहलू यह है कि सरस्वती के तट पर नगाड़ा पार्टी, बीन पार्टी, बैगपाईपर पार्टी, धमाल पार्टी के कलाकार हरियाणवी संस्कृति का रंग जमा रहे है।
सरस्वती धरोहर विकास बोर्ड के साथ-साथ राज्य सरकार की तरफ से हरियाणा ही नहीं विभिन्न प्रदेशों की लोक संस्कृति को संरक्षित करने और कलाकारों को एक मंच मुहैया करवाने का काम अंतर्राष्ट्रीय सरस्वती महोत्सव के जरिए किया जा रहा है। इस महोत्सव में विभिन्न प्रदेशों की लोक कला को पर्यटकों के समक्ष प्रस्तुत किया जा रहा है। इन प्रदेशों के उन लोक नृत्यों को कलाकार प्रस्तुत कर रहे है, जो लोक कला लुप्त होने के कगार पर पहुंच चुकी है। पलवल के गांव बंचारी से आए लोक कलाकार चंद्र सिंह ने बातचीत के दौरान इस बात का खुलासा किया कि हरियाणा प्रदेश में गिनती के ही कलाकार ही बचे है जो बीन, तुम्बा, ढोलक, खंजरी बजा कर जोगी नाथ बीन सपेरा परम्परा को आगे बढ़ाने का काम कर रहे है।
कलाकार चंद्र सिंह ने कहा सभी कलाकार पारम्पकि वेशभूषा से सुसज्जित होकर बीन, तुम्बा, ढोलक, खंजरी बजाकर लोगों का मनोरंजन कर रहे है। यह महोत्सव लोक कलाकारों का एक बड़ा मंच बन चुका है। सरकार द्वारा इस प्रकार के कलाकारों को ओर अधिक प्रोत्साहित करने के लिए अंतर्राष्टï्रीय सरस्वती महोत्सव जैसे मंच उपलब्ध करवाने चाहिए। महोत्सव के शिल्प मेले के तीसरे दिन हरियाणा के विभिन्न गांवों के लोक कलाकारों ने सरस्वती के तट पर ढेरु गाथा गायन की प्रस्तुती देकर पर्यटकों को झुमने पर मजबुर कर दिया। इन लोक कलाकारों ने ढेरु गाथा गायन के जरिए गुरु गोरख नाथ जी की गाथा, जवाहर गूगा पीर की गाथाओं का गुणगान किया। इन लोक कलाकारों का कहना है कि यह लोक कला विलुप्त करने के कगार पर पहुंच चुकी है।
पर्यटकों ने खुब की खरीददारी
शिल्प मेले में पर्यटकों ने शनिवार को जमकर खरीददारी की है। एक तरफ जहां पर्यटक सरस्वती के तट पर खिली धुप में विभिन्न प्रदेशों के व्यंजनों का स्वाद चख रहे थे, वहीं अलग-अलग स्टालों पर जाकर खरीददारी भी कर रहे थे। इतना ही नहीं युवा वर्ग भी मेले में सेल्फी लेकर अपने आपको आनंदित महसुस कर रहा है।
अंतर्राष्टï्रीय सरस्वती महोत्सव में लगाई गई है 2 डिजीटल स्क्रीन 
अंतर्राष्ट्रीय सरस्वती महोत्सव मुख्य स्टेज के कार्यक्रम को लाईव दिखाने के लिए शिल्प मेले की दुकानों के पास दो डिजिटल बड़ी स्क्रीन लगाई गई है ताकि दर्शक स्टेज के कार्यक्रम भी वहीं से देख सकें। ये बड़ी डिजिटल स्क्रीन लोगों को बरबस आकर्षित कर रही हैं। एसडीएम निर्मल नागर के निर्देशानुसार तीन जगहों पर लगाई गई ये डिजिटल स्क्रीन लोगों को न केवल पसंद आ रही हैं, बल्कि स्टालों के दुकानदार भी मुख्य स्टेज का कार्यक्रम बखुबी देख रहे हैं। एक डिजिटल स्क्रीन आरती स्थल के पास आरती के लाईव टेलेकास्ट के लिए लगाई गई है, जो सायं आरती के समय भव्य दृश्य प्रस्तुत करती है।

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