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कृष्ण संग्रहालय में संगोष्ठी का आयोजन

कुरुक्षेत्र: शहर के जाने माने साहित्यिक हस्ताक्षर आदबी संगम, उपनिषद् अनंत एवं श्रीकृष्ण संग्रहालय, कुरुक्षेत्र विकास बोर्ड, कुरुक्षेत्र के संयुक्त तत्वाधान में पुलवामा में शहीद हुए भारतीय सैनिकांे को भावभीनी पुष्पांजलि, शब्दाजंलि व भांवाजलि कुरुक्षेत्र के सभी शायरों द्वारा श्रीकृष्ण संग्रहालय में दी गई। संगोष्ठी की अध्यक्षता सी. आर. मौदगिल, पूर्व निदेशक, हरियाणा पंजाबी साहित्य अकादमी ने की। समारोह में शहीदों को नमन करते हुए श्री हरिकृष्ण द्विवेदी ने अपने भाव ऐसे व्यक्त किए- ‘‘मर-मर कर जिंदा रहे हम इस जहां में ‘‘आज तक’’ कुछ इस तरह दस्तार को हमने संभाल रखा है। डाॅ. शकुन्तला शर्मा ने कहा- दुश्मन फरेब करके हुनर मंद हो गया, हम करके एतबार गुनहगार हो गए। सभी शायरों ने पाकिस्तान द्वारा आयोजित पुलवामा नर संहार की भत्र्सना की। कस्तूरी लाल ‘शाद’ ने कहा- छेडखानी शेर से अच्छी नहीं है सियार को, हमने कभी बख्शा नहीं जयचंद से महदार को। इसी तरह गुलशन ग्रोवर ने अपने उद्गार व्यक्त किए- वतन की रक्षा करने को शहीद गहरी नींद में सोए हैं। मगर सियासत ने उनकी लाशों पर सदा विष बीज बोए हैं। डाॅ. बलवान ने कहा- पानी बंद करना अच्छा है लेकिन इतना याद रहे कि खून का बदला खून ही होगा भारत जिदंाबाद रहे। बुजुर्गवार शायर रत्नचंद सरदाना ने अपनी बात यूं रखी- प्यार की बातें भी होगी, मनोहर की बातें भी होगी। अभी तो भैरव-राग जरूरी है। एम.के. मौदगिल ने मां भारती को नमन करते लिखा- हे माँ भारती, तुझे सदा नमन कंरूगा, जो बोला तुझ से बदजुबान, शीश उसका तेरे चरणों में धंरूगा। संगोष्ठी का आयोजन डाॅ. जीवन बख्शी ने किया। उन्होनें अपने वक्तत्य में कहा कि मौत से खेलना हमें आता है, दुश्मन को सबक सिखाना हमें आता है। इसी तरह सुबे सिंह सुजान ने कहा- पहले तो दुख से भर दिया हमको और अब पूछते हो ‘‘कैसे हो’’। श्रीकृष्ण संग्रहायल के क्यूरेटर राजेन्द्र सिंह राणा ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि बाहरी दुश्मनों के साथ-साथ भीतरी दुश्मन पर भी पैनी नजर रखनी होगी। हमारी सेनाएं विश्व की श्रेष्ठ सेनाएं हैं और दुश्मनों से भयभीत होने वाले नहीं है। संगोष्ठी के अध्यक्ष सी.आर मौदगिल ने वीर रस में अपने उद्गार यूं रखे- न मुझे नारे चाहिए, न मुझे जयकारे चाहिए, मुझे तो दुश्मन चिता के अंगारे चाहिए। इस अवसर पर डाॅ. जीवन बख्शी ने उपस्थित गणमान्य व्यक्तियों को धन्यवाद किया। मंच का संचालन ओमप्रकाश राही ने किया। इस अवसर पर मोती राम तुर्क, करनैल खेड़ी, एकंात भारद्वाज, डां. राकेश भास्कर, गंगा मलिक, सुमन प्रजापत, पविता रोहिला, सुधीर ढांडा उपस्थित रहे।

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