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चैत्र नवरात्रों का महत्व व पूजा विधि: डॉ. सुरेश मिश्रा

कॉस्मिक एस्ट्रो पिपली (कुरुक्षेत्र), के डायरेक्टर व श्री दुर्गा देवी मन्दिर पिपली के अध्यक्ष डॉ. सुरेश मिश्रा ने श्री दुर्गा देवी मन्दिर पिपली में भक्तों को बताया कि 6 अप्रैल 2019 शनिवार से चैत्र नवरात्रि पर्व का शुभारम्भ हो रहा है। माँ दुर्गा देवी की
आराधना का यह पर्व नवरात्रि साल में दो बार मनाई जाती है। पहला चैत्र और दूसरा शारदीय नवरात्रि। नौ दिनों तक शक्ति की उपासना देवी दुर्गा के नौ स्वरूपों के रूप में की जाती है।

नवरात्रि पर कलश स्थापना मुहूर्त
नवरात्रि के 9 दिनों में मां दुर्गा के नौ रूपों क्रमशः शैलपुत्री, ब्रह्मचारिणी, चंद्रघंटा, कूष्मांडा, स्कंदमाता, कात्यायनी, कालरात्रि, महागौरी और सिद्धिदात्री देवी की पूजा की जाती है। नवरात्रि के दौरान नौ दिनों तक माँ दुर्गा का पूजन और दुर्गा सप्तशती का पाठ किया जाता है। चैत्र प्रथम नवरात्रि की शुरुआत कलश स्थापना से होती है।

डॉ.सुरेश मिश्रा ने बताया चैत्र नवरात्रि सुबह 6 से 9 बजे तक है कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त है!

कलश स्थापना विधि:
कलश स्थापना के लिए शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि के दिन सुबह स्नानादि से निवृत्त हो कर पूजा का संकल्प लिया जाता है। संकल्प लेने के पश्चात मिटटी की वेदी बनाकर जौ बोया जाता है और इसी वेदी पर कलश की स्थापना की जाती है। घट के ऊपर कुल देवी की प्रतिमा स्थापित कर पूजन किया जाता है और दुर्गा सप्तशती का पाठ किया जाता है। इस दौरान अखंड दीप जलाने का भी विधान है। इन दिनों में मंत्र जाप करने से मनोकामना शीघ्र पूरी होती है। नवरात्रि के पहले दिन कलश स्थापना के बाद मां दुर्गा की पूजा आरंभ की जाती है।

शुभ मूहूर्त

6 अप्रैल सुबह- 7:30 से 9:00
अभिजित मुहूर्त- दोपहर 12.06 से 12.54 तक।
दोपहर: 1:30 से 3:00 ।

इस चैत्र नवरात्रि 2019 की विशेष बातें-

– इस बार चैत्र नवरात्रि के आठवें दिन अष्टमी और नवमी एक साथ मनाई जाएंगी।
– 14 अप्रैल को राम नवमी पर इस बार पुष्य नक्षत्र योग का संयोग बन रहा है। भगवान राम का जन्म पुष्य नक्षत्र में ही हुआ था।
– चैत्र नवरात्रि अष्टमी के दिन ही सुबह 11 बजकर 43 मिनट को नवमी तिथि प्रारंभ होगी, जो अगले दिन सुबह 9बजकर 36 मिनट तक रहेगी।
– भगवान राम का जन्म पुष्य नक्षत्र में दोपहर को हुआ था इसलिए राम नवमी अष्टमी के दिन मनाना शुभ रहेगा।
– चैत्र नवरात्रि के शुभारंभ पर गुड़ी पड़वा और नव संवत्सर परिधावी 2076 शुरू होगा।
– इस बार चैत्र नवरात्रि रेवती नक्षत्र के साथ शुरू हो रही है।
– 9 दिनों के इस चैत्र नवरात्रि में पांच बार सर्वार्थ सिद्धि और दो बार रवियोग आएगा। जो ज्योतिष दृष्टि से बहुत ही शुभ माना गया है।

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