करनाल, 10 अप्रैल 2019: महागठबंधन के उम्मीदवार के तौर पर करनाल लोकसभा क्षेत्र से हरियाणा के पूर्व डिप्टी स्पीकर चौधरी वेद पाल भी चुनाव मैदान में उतर सकते हैं। उनके चुनाव मैदान में उतरने से भाजपा को भी पुन: चिन्तन करना पड़ सकता है। नए समीकरणों के चलते सूत्रों से पता चला है कि महागठबंधन की धूरी बने शरद पवार ने हरियाणा की 10 में से एक करनाल लोकसभा क्षेत्र से सीट अपनी पार्टी के प्रदेशाध्यक्ष व हरियाणा के पूर्व डिप्टी स्पीकर चौधरी वेदपाल के लिए मांग ली है। कांग्रेस पार्टी के दिग्गज करनाल लोकसभा क्षेत्र से कांग्रेस की पृष्ठभूमि वाले और जीतने वाले उम्मीदवार को ही चुनाव मैदान में उतारना चाहते हैं, इसी कड़ी में चौधरी वेद पाल का नाम एक बार फिर सुर्खीयों में आ गया है। वे हरियाणा के सबसे पुराने कांग्रेसियों में से हैं और उन्होंने 1977-78 में तत्कालीन जनता पार्टी की सरकार द्वारा श्रीमती इन्दिरा गांधी की गिरफ्तारी के विरोध स्वरुप भी साथियों सहित गिरफ्तारी दी थी और करनाल जेल में रहे थे। ईमानदारी में भी उनका कोई सानी नहीं है, उन्होंने विधायक बनते ही सबसे पहले अपनी सारी सम्पत्ति का ब्यौरा तत्त्कालीन मुख्यमंत्री को दिया था और आज भी वही सम्पत्ति उनके पास है। उत्तरी हरियाणा के साथ भेद-भाव का मुद्दा सबसे पहले चौधरी वेद पाल ने जुलाई 1999 में उठाया था और उसी मुद्दे के कारण भाजपा उत्तरी हरियाणा के इलाके में ज्यादा सीटे जीत कर सत्ता में आई थी। वेदपाल का नाम करनाल लोकसभा क्षेत्र से आने के कारण हर वर्ग व समुदाय को अपनापन महसूस हो रहा है क्योंकि ज्यादातर सभी पार्टियों करनाल लोकसभा क्षेत्र से बाहरी उम्मीदवार को मैदान में उतारती रही हैं और करनाल की जनता काफी समय से क्षेत्रीय व स्थानीय उम्मीदवार की मांग सभी पार्टियों में करती रही है। भाजपा ने भी करनाल की बजाया पानीपत जिले के व्यक्ति पर दाव खेला र्है। वेदपाल की कर्मभूमि व जन्मभूमि करनाल जिला रहा है और इस संसदीय क्षेत्र के अर्तगत आने वाले सभी 9 विधानसभा क्षेत्रों में उनकी छवि मधुरभाषी, ईमानदार, मिलनसार, निर्विवाद नेता के साथ-साथ विकास पुरुष के रुप में रही है और उन्होंने सारे करनाल संसदीय क्षेत्र से युवाओं को रोजगार प्रदान कराने में मदद की। मण्डीयों व सडक़ों का निर्माण कराया। वे डी.ए.्वी. आर्य समाज व स्वामी श्रद्धानन्द अनाथलय जैसी संस्थाओं से जुड़े होने के कारण वैदिक संस्कृति के भी ध्वजवाहक रहे। जब चौधरी वेद पाल से पुछा गया तो उन्होंने कहा कि पार्टी जो आदेश देगी, उसका पालन करेंंगे, यदि शरद पवार जी के आदेश से टिकट मिलती है तो वे चुनाव भी लड़ेगे और जीतेगे भी। जब उनसे पुछा गया कि टिकट ना मिलने की सुरत में वे क्या करेंगे? तो उन्होंने कहा कि महागठबंधन का एक ही लक्ष्य है कि जातिवाद, साम्प्रदायवाद व भाई-भाई को लड़ाने वाले लोगों के विरुध वोटों का बिखराव ना हो और सब लोग एक जुट होकर लोकतन्त्र, धर्मनिरपेक्षता और संविधान को बचाने के लिए काम करेंगे और शरद पवार के निर्देशानुसार महागठबंधन के उम्मीदवार की मदद करेंगे।
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार सोनिया गांधी, शरद पवार और राहुल गांधी सहित महागठबंधन के सभी नेतागण एक-एक सीट पर गहन चिन्तन करके जीतने वाले उम्मीदावर को चुनाव मैदान में उतारकर भावी रणनीति तैयार कर रहे हैं और वेद पाल का नाम भी इसी कारण इस कड़ी में चर्चा में आया है।
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