करनाल 29 अप्रैल: वातावरण को दूषित होने से बचाने के लिए किसान भाई गेहूं की फसल कटाई के बाद खेतों में खड़े अधिक से अधिक फानों से तुड़ी बनवाएं और शेष वेस्ट को खेतो में ही डालें, उसको आग ना लगाएं। ऐसा करने से जहां जमीन की सेहत खराब होती है, मित्र कीड़े नष्ट हो जाते है, तो दूसरी ओर हवा जहरीली हो जाती है, जो हमारे स्वास्थ्य पर दुष्प्रभाव डालती है।
इस संबंध में जिला उपायुक्त विनय प्रताप सिंह ने किसानों से अपील कर कहा है कि वे फसल को काटने के बाद खेतों में खड़े फानों में आग ना लगाए बल्कि उसकी पशुओ के लिए तुडी बनवाएं और जो शेष अवशेष बचता है, मशीनों से उन्हें खेत की मिट्टी में ही मिलाएं। ऐसी मशीने पूरे जिला में बनाए गए किसान समूह के पास बहुत ही जायज रेट पर लेने के लिए उपलब्ध है। उपायुक्त ने किसानों से कहा कि जहां भी खेतों में प्राकृतिक कारणों से आगजनी होती है, किसान इसकी सूचना प्रशासन को दें, उस पर तुरंत काबू पाया जाएगा। इसके लिए सभी सचेत रहे और प्रशासन का सहयोग करें। उन्होंने कहा कि पिछले दिनों जो भी आगजनी हुई है, उसका सर्वे करवा लिया गया है और रिपोर्ट भी मुख्यालय को भेज दी गई है और जिस भी किसान की फसल का अभी सर्वे नही हुआ है, उसका भी सर्वे किया जाएगा, किसानो को घबराने की जरूरत नही है।
दूसरी ओर उप-कृषि निदेशक ने बताया कि किसानों को उनके खेतों में फसल कटाई के बाद बचे अवशेषों को ना जलाने के लिए जागरूकता अभियान जारी है। गांव तथा खंड स्तर पर जागरूकता कमेटियों का गठन किया गया है। किसानों को चाहिए कि वे फानों में आग ना लगाए, बल्कि उसकी अधिक से अधिक तुडी बनाए। उन्होंने किसानों से यह भी अपील की है कि किसान साठी धान ना लगाएं। इस पर पूर्णत: रोक लगाई गई है। साठी धान को तैयार करने में सिंचाई पानी की अधिक मात्रा प्रयोग होती है। इस जिला में पहले ही भूमिगत पानी का स्तर नीचे चला गया है जो भविष्य के लिए खतरे की घंटी है। उन्होंने यह भी कहा है कि यदि किसी किसान के खेत में साठी धान की बिजाई पाई गई तो उसे नष्ट कर दिया जाएगा।
आगजनी में उपायुक्त ने दिए सर्वे करवाने के निर्देश: डीआरओ श्याम लाल।
जिला राजस्व अधिकारी श्याम लाल ने बताया कि पिछले दो दिनों से तेज हवा के कारण खेतों में कईं आगजनी की घटनाएं हुई है, जिसमें जिले में फाने व गेहूं की फसल व कुछ गन्ने की फसल का भी नुकसान हुआ है। उपायुक्त के निर्देशानुसार किसानों का जो इस तेज हवा के चलते नुकसान हुआ है,उसका सर्वे करके आगामी कार्यवाही के लिए मुख्यालय को भेज दिया गया है और जिस भी किसान की फसल में आगजनी हो गई है और उसका भी सर्वे किया जाएगा।
जिले में तेज हवा के चलते हुई आगजनी में गेहूं की जली फसल का किया सर्वे, भेजा मुख्यालय, करीब 94 एकड़ 11 मरले गेहूं की फसल व 6 कनाल गन्ने की फसल जली।
जिला राजस्व अधिकारी ने बताया कि जिले में 14 अप्रैल को घरौंडा तहसील के गांव बरसत में अज्ञात कारणों से 9 एकड़, निसिंग तहसील के डाचर गांव में 5 एकड़ 4 कनाल, 15 अप्रैल को जुंडला में बिजली की स्पार्किंग से गेहूं की 4 एकड़ , घरौंडा के समालखा में 1 एकड़,बांसा में 1 एकड़, असंध तहसील में 7 एकड़, ठरी गांव में 3. 5 एकड़, घरौंडा तहसील में 20 अप्रैल को कोहण्ड में 1 एकड़ 6 मरले भूमि में अज्ञात कारणों से आगजनी की सूचना मिली है। नीलोखेड़ी तहसील के अंतर्गत 22 अप्रैल को अरजाहेड़ी में 4 कनाल, 25 अप्रैल को पड़वाला गांव में 32 कनाल, तखाना गांव में 19 मरले, घरौंडा के बरसत में 27 अप्रैल को 13 एकड़, मूंडोगढ़ी गांव में 5 एकड़ व गगसीना गांव में 6 कनाल गन्ने की खेती, निगदु तहसील के गांव खवाजा अहमदपुर में 3 एकड़, निसिंग के गांव डाचर में 38 एकड़, चोरकारसा में 1 एकड़ 4 कनाल, जयसिंहपुरा गांव में 5 एकड़ 4 कनाल, खिजराबाद में 7 एकड़, खांडा खेड़ी में 3 एकड़, रूकसाना में 6 एकड़, इंद्री के बीबीपुर जटान में 1 एकड़, करनाल तहसील के तहत बिर्चपुर में 10 एकड़ गेहूं की फसल शामिल है।
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