कुरुक्षेत्र, 4 मई सन्निहित सरोवर स्थित प्राचीन श्री लक्ष्मीनारायण मंदिर में शनिवार को अमावस्या के उपलक्ष्य में विशाल भंडारा दिया गया। मंदिर के महंत विजय गिरि के सान्निध्य में व्यवस्थापक स्वामी अनूप गिरि महाराज ने श्रद्धालुओं को शनैश्चरी अमावस्या का महात्मय विस्तार से सुनाया। सुबह श्रद्घालुओं ने भगवान लक्ष्मीनारायण की विधिविधान से पूजा-अर्चना की। उसके बाद भक्ति प्रवचनों में स्वामी अनूप गिरी ने कहा कि सन्निहित सरोवर के निकट भगवान लक्ष्मीनारायण मंदिर में राजा कुरु ने 400 साल तपस्या की, जिसके फलस्वरूप भगवान नारायण ने उन्हें दर्शन देकर पुत्र रत्न का आशीर्वाद दिया। भगवान ने राजा कुरु को साक्षात अपना स्वरूप शालिग्राम भेंट स्वरूप प्रदान किया। राजा कुरु ने उसी शालिग्राम को उसी मंदिर में स्थापित किया, जो आज भी इस मंदिर में विराजमान है। इस शालिग्राम में चक्र एवं शंख बने हुए हैं।
मंदिर में अमावस्या के दौरान बड़ी संख्या में आए यजमानों ने पूजा-पाठ करके भंडारे मे सेवा की।
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