कुरुक्षेत्र, 31 मई। कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय में शनिवार को गुरू नानक देव जी के 550वें प्रकाश पर्व के उपलक्ष्य में वर्ष भर चलने वाले कार्यक्रमों की श्रृंखला का शुभारंभ कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. कैलाश चन्द्र शर्मा ने किया। इस कड़ी में उन्होंने गुरू नानक देव जी के 550वें वर्ष के उपलक्ष्य में 11 पौधे जनसंचार एवं मीडिया प्रौद्योगिकी संस्थान के प्रांगण में लगाकर 550 पौधे लगाने के अभियान की शुरूआत की, यह पौधे विश्वविद्यालय व उससे सम्बन्धित कॉलेज में लगाए जाएंगे साथ ही विश्वविद्यालय के सीनेट हॉल म विश्वविद्यालय के आफिशियल सोशल मीडिया प्लेटफार्म के लिए वर्ष भर चलने वाले संदेश को विश्वविद्यालय के फेसबुक पेज़ पर अपलोड कर इसकी शुरूआत की। इसके साथ ही गुरू नानक देव जी के जीवन दर्शन पर गुरू नानक देव विश्वविद्यालय अमृतसर के प्रो. गुरमीत सिंह द्वारा एक विशेष व्याख्यान भी इस अवसर पर दिया गया।
कार्यक्रम को सम्बोधित करते हुए कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. कैलाश चन्द्र शर्मा ने कहा है कि गुरू नानक देव जी ने प्रत्येक मनुष्य में ईश्वर के अंश की बात की है और उन्होंने इसके माध्यम से मानव सेवा को ही विश्व कल्याणकारी बताया है। मानव सेवा कर ही व्यक्ति ईश्वर की सेवा कर सकता है। उन्होंने कहा कि उनकी शिक्षाओं में उन्होंने कहा है कि गृहस्थ व्यक्ति को सन्यासी का भाव व सन्यासी होते हुए गृहस्थ जीवन का भाव रखकर ही व्यक्ति अपने जीवन को श्रेष्ठ से सर्वश्रेष्ठ बना सकता है।
कुलपति ने कहा कि सिक्ख गुरूओं की वाणी का दुनिया को यह अमिट संदेश है कि खुद के लिए तो सब जीते हैं, दूसरों की सेवा के लिए वे जीते व करते हैं, वही श्रेष्ठ व्यक्ति होते हैं। उन्होंने कहा कि भारत वर्ष की धरती संत महात्माओं, अवतार पुरूषों, ऋषि मुनियों की धरती है और सभी महापुरूषों का एक ही संदेश रहा है कि ईश्वर एक है। ईश्वर का अंश जब मुझमें है वह तुझमें भी है। फिर यह संघर्ष व टकराव किस बात का। यह भेद किस लिए। महापुरूषों ने समाज को एक महान सामाजिक व विश्व कल्याणकारी व्यवस्था दी। उन्होंने कहा कि 14वीं व 15वीं शताब्दी का समय भारतीय समाज के लिए दुरावस्था का समय था, इस दौरान भारतीय जनमानस पर तरह-तरह के अत्याचार हुए। समाज में भेद के कारण ही तरह-तरह के संकट पैदा हुए लेकिन जब-जब ऐसे संकट पैदा हुए तब-तब भारत की धरती से ही संत-महात्माओं ने अपनी वाणी से समाज को जोडऩे का संदेश दिया और यहीं से भारत व भारतीयता मजबूत हुई।
कुलपति ने कहा कि हमारी आज की पीढ़ी को गुरू नानक देव जी की शिक्षाओं को अपने जीवन में आत्मसात करने की आवश्यकता है क्योंकि गुरू की वाणी ही व्यक्ति व विश्व कल्याणकारी है। उन्होंने कहा कि कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय इस वर्ष में गुरू नानक देव जी के जीवन दर्शन को समर्पित विभिन्न तरह के कार्यक्रमों का आयोजन विश्वविद्यालय के विभिन्न विभागों में करेगा।
मुख्य वक्ता के रूप में जीएनडीयू अमृतसर विश्वविद्यालय के प्रो. गुरमीत सिंह ने गुरू नानक देव जी के जीवन दर्शन व भारतीय चिंतन की परम्परा विषय पर अपने उद्बोधन में गुरू नानक देव जी की शिक्षाओं पर प्रकाश डालते हुए कहा कि भारतीय ज्ञान परम्परा में वेद, उपनिषद, श्रीमद भगवद्गीता, गुरूवाणी जैसे महान ग्रंथों का महत्व रहा है। संत महात्माओं ने इन गं्रथों का अध्ययन किया और दुनिया को विश्व कल्याण व आपसी भाईचारे का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि ऐसे महापुरूषों व ग्रंथों को जब हम संकुचित दृष्टि से देखते हैं तो उनके महत्व को कम करत हैं। उन्होंंने कहा कि गुरू नानक देव जी ने 27 वर्ष पैदल घूमते हुए गुरवाणी के माध्यम से दुनिया को जो संदेश दिया है वह अमूल्य है। गुरू नानक देव जी की दृष्टि विश्व दृष्टि और वे अपनी शिक्षाओं में विश्व कल्याण की बात करते हैं। उन्होंने कहा कि भारतीय दर्शन दुनिया में महान है। आक्रान्ताओं व हमलावरों ने इसे कम करने की कोशिश की लेकिन गुरू नानक देव जी जैसे महापुरूषों के दिव्य संदेश से दुनिया के करोड़ो-करोड़ो लोगो ने अपने जीवन को बदला है क्योंकि गुरू की शिक्षाएं ही परमात्मा की वाणी हैं। उन्होंने गुरू नानक देव जी की शिक्षाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि गुरू नानक देव जी ने कहा है कि अच्छे मनुष्य व बुरे मनुष्य की पहचान क्या है, अच्छा मनुष्य वह है जो समझ भरी बाते करता है व किसी महापुरूष के ज्ञान का अनुसरण करता है, वही श्रेष्ठ है, जिस व्यक्ति के पास न ज्ञान है, न गीत है, न संगीत है वह अच्छा मनुष्य नहीं है। अपने व्यक्तव्य में उन्होंने दुनिया के कई दार्शनिकों का उदाहरण प्रस्तुत करते हुए कहा कि गुरू नानक देव जी के चिंतन में पानी हमेशा महत्वपूर्ण रहा है लेकिन आज मनुष्य पानी की बर्बादी जिस तरह से कर रहा है चिंता का विषय है। खेती के नाम पर जिस तरह से फसलों में कीटनाशकों का प्रयोग, दूध में यूरिया का प्रयोग किया जा रहा है, ऐसे समाज को गुरू नानक देव जी की वाणी को अपने व्यवहारिक जीवन में प्रयोग करने की आवश्यकता है।
उन्होंने कहा कि मनुष्य का व्यवहार प्रकृति के प्रति आज भी सभ्य नहीं है। इंसान को इंसान बनने के लिए गुरू नानक देव जी की शिक्षाओं को अमल में लाने की जरूरत है। इस मौके पर उन्होंने कहा कि प्रवृत्ति व निवृत्ति के बीच संतुलन का काम धर्म करता है और अध्यात्म चिंतन से बड़ा कोई चिंतन नहीं है। ऐसे में व्यक्ति संतोषी बनकर ही अपना व समाज का भला कर सकता है। इस मौके पर कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय में शुरू किए गए इस अभियान की प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि यह गुरू व गुरवाणी को सम्मान है।
युवा सांस्कृतिक कार्यक्रम विभाग के निदेशक प्रो. तेजेन्द्र शर्मा ने सभी का स्वागत किया व बताया कि युवा सांस्कृतिक कार्यक्रम विभाग गुरू नानक देव जी के दर्शन को जन-जन तक पहुंचाने के लिए विश्वविद्यालय स्तर पर विभिन्न कार्यक्रमों की श्रृंखला की शुरूआत आज से की है। इस वर्ष में विभिन्न कार्यक्रमों के माध्यम से गुरू नानक देव जी की शिक्षाओं को जन-जन तक पहुुंचाने का प्रयास किया जाएगा।
युवा सांस्कृतिक कार्यक्रम विभाग के उप-निदेशक डॉ. हितेन्द्र त्यागी ने धन्यवाद ज्ञापित किया। इस मौके पर गुरूनानक खालसा कालेज यमुनानगर की छात्राओं ने शब्द गायन प्रस्तुत किया। मंच संचालन पंजाबी विभाग के शिक्षक डॉ. कुलदीप सिंह ने किया।
इस मौके पर कुलसचिव डॉ. नीता खन्ना, छात्र कल्याण अधिष्ठाता प्रो. पवन शर्मा, प्रो. एचएस रंधावा, प्रो. नरेन्द्र सिंह, प्रो. शुचिस्मिता शर्मा, प्रो. मंजूषा, सरदार जसबीर सिंह, कैप्टन परमवीर सिंह, सरदार इंद्रजीत सिंह, सरदार करनैल सिंह, डॉ. अजय, प्रमिला बत्तरा, डॉ. हरविन्द्र राणा, सहित अन्य लोग मौजूद थे।
जनसंचार एवं मीडिया प्रौद्योगिकी संस्थान में लगाए 11 पौधे, कुलपति ने किया निरीक्षण
कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के जनसंचार एवं मीडिया प्रौद्योगिकी संस्थान में विश्वविद्यालय के युवा सांस्कृतिक कार्यक्रम विभाग व हार्टिकल्चर विभाग के संयुक्त तत्त्वाधान में गुरू नानक देव जी के 550वें प्रकाश पर्व वर्ष के उपलक्ष्य में 11 पौधे लगाए गए। विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. कैलाश चन्द्र शर्मा ने पहला पौधा लगाकर इस अभियान की शुरूआत की। इस मौके पर विश्वविद्यालय की कुलसचिव डॉ. नीता खन्ना, डीन कामर्स प्रो. नरेन्द्र सिंह, निदेशक युवा संास्कृतिक कार्यक्रम विभाग प्रो. तेजेन्द्र शर्मा, निदेशक जनसंचार एवं मीडिया प्रौद्योगिकी संस्थान डॉ. बिंदु शर्मा, हार्टिकल्चर विभाग के इंचार्ज प्रो. नरेन्द्र, कुटा प्रधान डॉ. संजीव शर्मा, प्रो. जितेन्द्र शर्मा व अन्य गणमान्य लोगों ने पौधारोपण किया। इस मौके पर कुलपति ने विश्वविद्यालय के टेलिविज़न स्टूडियों का भी निरीक्षण किया। इस मौके पर विभाग के शिक्षक, गैर-शिक्षक कर्मचारी मौजूद थे।
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