कैथल, 3 जून: उपायुक्त डॉ. प्रियंका सोनी ने बताया कि मत्स्य विभाग द्वारा 2019-2020 हेतू मछली पालन का व्यवसाय करने वाले अनुसूचित जाति के परिवारों को विभिन्न मदों में राज्य सरकार की तरफ से अनुदान देने की स्कीमों को लागू किया है। इन स्कीमों के जरिए अनुसूचित जाति के परिवार अपनी आजीविका चला सकेंगे। पंचायती और निजी तालाबों को मछली पालन हेतू पट्टे पर लेने हेतू 50 हजार रुपए प्रति हेक्टेयर की दर से और अधिकतम 2 लाख रुपए तक का अनुदान दिया जाएगा।
डॉ. प्रियंका सोनी ने बताया कि मछली पालकों को मछली पकड़ने के 15 हजार रुपए की राशि के जाल को खरीदने के लिए सरकार द्वारा 50 प्रतिशत यानि 7500 रुपए का अधिकतम अनुदान, अधिसूचित पानियों में मछली पकडऩे का ठेका लेने पर ठेका राशि का 25 प्रतिशत की दर से अधिकतम 4 लाख रुपए तक अनुदान, मछली की थोक बिक्री के लिए दुकान के किराए पर अधिकतम 5 हजार रुपए प्रतिमाह तथा परचून बिक्री की दुकान के लिए प्रतिमाह अधिकतम 3 हजार रुपए की दर से अनुदान, खाद-खुराक पर 50 प्रतिशत की दर से 90 हजार रुपए प्रति हेक्टेयर व अधिकतम 1 लाख 80 हजार रुपए अनुदान, लघु साईज की रंगीन मछली बैकयार्ड हैचरी की ईकाई पर 50 प्रतिशत की दर से 12 हजार 500 रुपए प्रति व्यक्ति अनुदान दिया जाएगा, जबकि मध्य साईज की रंगीन मछली की बैकयार्ड हैचरी ईकाई की स्थापना करने पर 50 प्रतिशत की दर से एक लाख रुपए प्रति व्यक्ति को अनुदान देने का प्रावधान किया गया है। अनुसूचित जाति बाहुल्य (30 प्रतिशत से अधिक आबादी) गांवों में पंचायती तालाब के सुधार हेतु 2 लाख रुपए प्रति हेक्टेयर का व्यय शतप्रतिशत विभाग द्वारा वहन किया जाएगा।
उन्होंने कहा कि इन स्कीमों के लिए लाभार्थियों का चयन निर्धारित कमेटी द्वारा किया जाएगा तथा अनुदान हेतु प्रार्थी अपना केस सरल पोर्टल के माध्यम से आनलाईन करवा सकते हैं। प्रार्थी की आयु 18 से 60 वर्ष होनी चाहिए। प्रार्थना पत्र के साथ तहसीलदार द्वारा जारी जाति प्रमाण-पत्र देना होगा। प्रार्थियों का चयन पहले आओ-पहले पाओ के अनुसार किया जाएगा। मछली पालक विस्तृत जानकारी के लिए करनाल रोड स्थित जिला मत्स्य अधिकारी कार्यालय में सम्पर्क किया जा सकता है।
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