कुरुक्षेत्र, 01 जुलाई। कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. कैलाश चन्द्र शर्मा ने कहा है कि अध्यापकों को नियमित आधार पर अपने शिक्षण कौशल को निखारने व खुद को अपडेट करने की आवश्यकता है। एक शिक्षक को अपने विषय के बारे में ज्ञान होना चाहिए और उन्हे व्याख्यान आधारित शिक्षण पद्धति की वजाय केस स्टडी पद्धति को अपनाना चाहिए। वे सोमवार को कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के मानव संसाधन विकास केन्द्र में वाणिज्य विभाग के सहयोग से चल रहे दो साप्ताहिक रिफ्रेशर कोर्स के अंतिम दिन समापन समारोह में बतौर मुख्यातिथि बोल रहे थे।
कुलपति ने कहा कि शिक्षक अपने छात्रों के लिए आदर्श स्वरूप होते हैं। इसलिए शिक्षकों को अपने जीवन में उन बातों को लागू भी करना चाहिए जो वे अपने छात्रों से सांझा करते हैं।
इस अवसर पर मानव संसाधन विकास केन्द्र की निदेशक प्रो. नीरा वर्मा ने मुख्य अतिथि का स्वागत करते हुए आभार व्यक्त किया। वाणिज्य विभाग की विभागाध्यक्ष प्रो. नीलम ढ़ाण्डा ने कोर्स के बारे मे बताया। डॉ. नेहा डांगी ने कोर्स की रिपोर्ट प्रतिभागियों के समक्ष प्रस्तुत की। उन्होंने बताया कि ये रिफ्रेशर कोर्स 13 जून, 2019 से चला हुआ था जिसमें 38 प्रतिभागियों ने भाग लिया। इस रिफ्रेशर कोर्स में कुल 28 तकनीकी विशेषज्ञों के विभिन्न विषयों पर प्रतिभागियों से चर्चा की। इस रिफ्रेशर कोर्स में हरियाणा, राजस्थान, उश्रराखंड, उश्रर प्रदेश, हिमाचल प्रदेश, चण्डीगढ़, पंजाब और उडीसा से तकनीकी विशेषज्ञों को आमंत्रित किया गया। सभी तकनीकी सत्र काफी संवादात्मक, सुचनात्मक, प्रेरक एवं ज्ञानवर्धक रहे और प्रतिभागयिों ने विशेषज्ञों से प्रश्न पूछकर और विषय पर चर्चा करके सक्रिय रूप से भाग लिया।
कार्यक्रम के अंत में प्रो. महावीर नरवाल ने औपचारिक रूप से सभी का धन्यवाद किया। इस अवसर पर प्रो. रजनीश शर्मा (डीन ऑफ कॉलेज), प्रो. मंजूशा शर्मा (चीफ वार्डन, महिला छात्रावास), डा. रंजना (विभागाध्यक्ष, मनोविज्ञान विभाग), प्रो. रोहताश, प्रो. अजय सुनेजा, प्रो. तेजेन्द्र शर्मा और प्रो. सुदेश आदि उपस्थित रहे।
जिन विषयों पर प्रख्यात विशेषज्ञों ने अपने विचार और ज्ञान साझा किये, उनमे धारणा, टीम निर्माण, टीम की क्षमता को मैनेजमेंट गेम्स की मदद से समझाया गया। कुछ विशेषज्ञों ने अनुसंधान संबधित विषयों पर अपने विचार सांझा किये। जिसमें उन्होंने एक शोध करने में शामिल बुनियादी बातों के बारे में चर्चा की एवं शोध में उपयोग होने वाली तकनीकों का विवरण किया। इसके अलावा रिवाइजड अक्रेडिटेशन फ्रेमवर्क पर विचार विमर्श किया गया जिसमें विश्वविद्यालयों , स्वायत्त कॉलेजों और संबद्ध कॉलेजों के मूल्यांकन मानदण्डों पर चर्चा की गई। विशेषज्ञों द्वारा जिन अन्य प्रांसगिक विषयों पर ध्यान केंद्रित किया गया, उनमें से प्रभावी शिक्षण कौशल, न्यू ए. पी. आई. स्कीम और मैसीव ऑपन ऑनलाईन कोर्स, आध्यात्मिक अर्थशास्त्र, सतत विकास लक्ष्य, 2030, एस्ट्रोटर्फिंग एवं तनाव प्रबंधन शामिल रहे। प्रतिभागियों के अनुसार, इस कोर्स से उन्होंने सीखने के तीन मुख्य मापदण्डों यानि ज्ञान, कौशल और दृष्टिकोण पर प्रशिक्षण प्राप्त किया।
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