कुरुक्षेत्र, 09 अगस्त। कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के यूआईईटी. संस्थान में चल रहे इन्डक्शन कार्यक्रम के अन्तर्गत रिलीजन इन द ऐज ऑफ साँईस विषय पर बोलते हुए विश्वविद्यालय के प्रॉक्टर प्रो. आर. के. देसवाल ने कहा कि संसार में जड़ और चेतन के दो प्रकार के तत्व पाए जाते हैं इन दोनो तत्वों के बाहरी रूप और स्थूल भाग पर बाहर से निर्णय करने वाले शस्त्र को विज्ञान कहते हैं। दोनो तत्वों को भीतरी और स्थूल भावों को आन्तरिक भाव के विचार करने वाले भाव को भी दर्शन कहते हैं। जड़ और चेतन दोनो तत्व में मूल तत्व सम्बंधित विश्वासों आस्था युक्त प्रकटीकरण धर्म कहलाता है इसके साथ विभिन्न धर्मों की मान्यताओं का दार्शनिक विशलेषण दर्शन कहलाता है, तथ्यों का स्पष्टीकरण विज्ञान कहलाता है।
प्रो. देसवाल ने कहा कि विद्यार्थी का धर्म है अपने विषय को सही तरीके से समझे और पढ़े, इसके साथ मानवीय मूल्यों, नैतिकता के साथ सामाजिक मूल्यों को भी धारण करे। क्योंकि चरित्र और संस्कारों के बिना ज्ञान अधूरा है। उन्होंने कहा कि भारतीय संविधान ही सभी धर्मों और विज्ञान का मुख्य ग्रन्थ है धर्म और विज्ञान का सही दिशा में सदुपयोग करने से व्यक्ति का सर्वागीण विकास होता है।
संस्थान के निदेशक प्रो. सीसी. त्रिपाठी ने कहा कि विषय की महत्ता को विद्यार्थी अगर अपने जीवन में उतार ले भविष्य में हमारे देश का सामाजिक, आर्थिक और नैतिक ढ़ांचा मजबूत होगा और विद्यार्थी अच्छे नागरिक बनकर देश को दोबारा विश्वगुरू बनकर फिर से सोने की चिडिय़ा बना सकते हैं।
दूसरे सत्र में छात्राओं के सैल्फ डिफेंस के गुर सिखाते हुए कोच राजेश शर्मा ने बताया कि आजकल समाज में लडक़ी छेड़छाड़ की बढ़ती घटनाओं के लिए सेल्फ डिफेंस जरूरी बताते हैं कहा कि अगर एकदम किसी पर अटैक हो जाए तो डरना नहीं चाहिए बल्कि उसका सचेत होकर सामना करना चाहिए। उन्होंने विभिन्न प्रकार के अटैक से बचने के लिए विभिन्न प्रकार की तकनीक का प्रयोग करने का छात्राओं को प्रशिक्षण दिया। उन्होंने अटैक होने पर तुरंत बचाव के लिए हाथ और पैरों के साथ गर्दन को सुरक्षा देने की तकनीक का विशेष प्रशिक्षण दिया।
इस अवसर पर कार्यक्रम संयोजिका डॉ. उर्मिला, डॉ. सविता गिल, डॉ. राजेश कालिया, शीशपाल, नेहा दुग्गल, ज्योति टामक, सीखा चौधरी, हरिकेश पपोसा आदि मौजूद थे।
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