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पानी पंचभूतों में से एक है, जीवन है जिंदगानी, पानी जीवन का आधार : डा० राजेन्द्र सिंह

करनाल 2 सितंबर , एनडीआरआई के सभागार में निदेशक डा०आर.आर.बी सिंह की अध्यक्षता में फाउंडेशन कोर्स के दौरान भारत सरकार के जल शक्ति अभियान को विषय के रूप में परिभाषित करने के लिए प्रख्यात पर्यावरण विद एवं जल पुरूष राजेन्द्र सिंह को विशेष रूप से व्याख्यान के लिए आंमत्रित किया गया। इस अवसर पर एनडीआरआई के सभी विद्यार्थियों व वैज्ञानिकों को सम्बोधित करते हुए मैग्सेसे सम्मान से सम्मानित राजेन्द्र सिंह ने कहा कि पानी जीवन का आधार है, लेकिन हमारा तेजी से विकसित हो रहा समाज पानी को वस्तु बना दिया है। पानी पंचभूतों में से एक है, जीवन है जिंदगानी। उन्होंने कहा कि भारत के लोग भगवान की पूजा करते है, ऐसे में भगवान का अर्थ है भ से भूमि, ग से गगन, व से वायु, अ से अग्रि और न से नीर, यानि प्रकृति ही ईश्वर है। लेकिन दुर्भाग्यवश समाज जैसे-जैसे विकसित और सभ्य होता गया, वैसे-वैसे प्रकृति को नष्ट करता गया और आज हालात ये है कि जलवायु परिवर्तन के दौर में गुरूग्राम, फरीदाबाद, मेरठ जैसे शहरों का भूजल खत्म होने वाला है।

उन्होंने कहा कि जब भारत आजाद हुआ था, तब शायद ही भारत का कोई ऐसा जिला था, जिसके धरती के नीचे का पानी नहीं था। आज 2019 में 190 जिले ऐसे है, जिनका भू-जल डार्क जोन के नीचे चला गया। धरती पर सबसे पहले पानी आया, फिर मिट्टी में आद्रता आई, फिर वनस्पतियों का आगमन हुआ और इसी तरह प्राणी जगत का संसार धरती पर आया। हम विकास की शर्तो को पूरी करनी में हरित पट्टी को खत्म कर रहे है, जिसके कारण धरती का मरूस्थल बढ़ रहा है। अगर हमने विकास की परिभाषा को समय रहते नहीं बदला तो राजस्थान का बढ़ता हुआ रेगिस्तान शिवालिक की पहाडिय़ों तक पहुंचेंगा। उन्होंने कहा कि अगर धरती पर पानी नहीं होगा तो डेयरी फार्मिंग की भी कल्पना नहीं की जा सकती। किसी भी तरह की उपज की कल्पना नहीं की जा सकती। आज दुनिया में पानी की कमी की वजह से बड़ा विस्थापन हो रहा है।

उन्होंने कहा कि तुर्की, सुडान और फिलिस्तीन की जनसंख्या अगर यूरेपियन देशों में विस्थापित हो रही है, इसका सबसे बड़ा कारण इन देशों का बे-पानी हो जाना है। उन्होंने कहा कि भारत में भी अगर समय रहते पानी के भंडारण और पाराम्परिक जल स्त्रोत, नदी,तालाब और पोखर को नहीं संरक्षित किया गया तो आने वाला समय बहुत भयावय होगा। उन्होंने प्रशन्नता व्यक्त की कि 30 साल पहले जो अभियान राजस्थान की अरवरी नदी को जिंदा करने का शुरू किया गया था। आज वह भारत सरकार का एक मंत्रालय बन गया है। हमें उम्मीद है कि आज जो विद्यार्थी कार्यशाला में भागेदारी कर रहे है, वह पर्यावरण के विनाश की शर्तो पर विकास की परिभाषा लागू नहीं करेंगे।

इस अवसर पर अध्यक्षता करते हुए डा० आर.आर.बी सिंह ने कहा कि आज हमारे परिसर में जल पुरूष का आना विद्यार्थियों के लिए ऐसा अवसर है, जो प्रयोग धर्मिता सबसे कम वर्षा वाले राज्य राजस्थान में राजेन्द्र सिंह के नेतृत्व में साकार हुई थी। आज हमारा परिसर उसका साक्षी बन रहा है। उन्होंने कहा कि एनडीआरआई परिसर की एक-एक बंूद बारिश के पानी को वाटर हारवेस्टिंग सिस्टम के माध्यम से भू गर्भ जल को रिचार्ज करते है। इस अवसर पर संयुक्त निदेशक डा० शाहा, डा०आर के मलिक, डा० ऐ के सिंह, डा०राजीव कपिला, डा०अरूण मिश्रा, डा०मीना मलिक, डा०सुमन कपिला, डा०गोपाल साकला, संस्कृत कर्मी राजीव रंजन,डा०गौतम कौल सहित काफी संख्या में विद्यार्थी, वैज्ञानिक व शिक्षक उपस्थित थे।

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