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ई.वी.एम. से नहीं हो सकती किसी प्रकार की छेडख़ानी, वी.वी.पैट. मशीन पर देख सकेगें वोट की वैरिफिकेशन:- एसडीएम नरेन्द्र पाल मलिक

करनाल 3 सितम्बर, स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव के लिए ई.वी.एम. और वी.वी. पैट की विश्वसनियता को जनता में कायम रखने के मकसद से मंगलवार को लघु सचिवालय के सभागार में इन मशीनों की ट्रेनिंग को लेकर एक कार्यक्रम आयोजित किया गया। ट्रेनिंग के लिए मीडियाकर्मियों को बुलाया गया, जिस में प्रिंट, इलैक्ट्रॉनिक व डिजिटल मीडिया से जुड़े पत्रकार शामिल हुए।

करनाल विधानसभा के रिटर्निंग अधिकारी एवं एसडीएम नरेंन्द्र पाल मलिक ने सभी मीडियाकर्मियों का स्वागत किया और ई.वी.एम. व वी.वी.पैट. की कार्य प्रणाली पर विस्तार से तकरीर की। उन्होंने बताया कि 1990 के आस-पास देश में ईवीएम यानि इलैक्ट्रोनिक वोटिंग मशीन का प्रादुर्भाव हुआ। मकसद था, चुनाव स्वतंत्र और निष्पक्ष रूप से होने चाहिएं। इसके बाद वर्ष 2014 के चुनाव में देश के कई हिस्सों में वीवी पैट (वोटर वैरीफिएबल पेपर ऑडिट ट्रोल)प्रयोग में ली गई। हयिाणा में भी कई बूथों पर सैंपल के लिए वीवी पैट लगाई गई थी। इसके पश्चात विगत लोकसभा आम चुनाव में सभी बूथों पर वीवी पैट उपलब्ध करवाई गई, जो पूर्ण रूप से अपने मकसद में सफल रही। वीवी पैट के जरिये कोई भी मतदाता अपनी पंसद के उम्मीदवार को वोट करने के बाद उसे एक छोटी स्क्रीन पर 7 सेंकड के लिए एक स्लिप पर आसानी से देख सकता है जो स्वत: ही मशीन में गिर जाती है। उन्होंने बताया कि बैलेट युनिट, कंट्रोल यूनिट और वीवी पैट यानि तीनों डिवाईस से मिलकर ही कम्पलीट ईवीएम बनती है। ईवीएम फुलप्रूफ यानि अभेद्य है, इसे हैक नही किया जा सकता। टेंपरिंग या छेड़-छाड़ के बाद इसमें लगी मैमोरी चिप काम ही नहीं करेगी। इस प्रकार इनके प्रयोग को लेकर जनता या मतदाताओं में कदापि किसी प्रकार का भ्रम नहीं होना चाहिए।

एसडीएम ने ईवीएम और चुनाव में इनके प्रयोग को लेकर मीडिया को कुछ और जानकारी दी और बताया कि चुनाव आयोग की हिदायत के अनुसार मतदान की तिथि से पूर्व, निर्वाचन से जुड़े अधिकारियों को कई तरह की प्रक्रियाएं पूरी करनी होती है, इनमें त्रिस्तरीय रैंडमाईजेशन प्रमुख रूप से होता है। प्रथम रैंडमाईजेशन में कौन सी मशीन किस निर्वाचन क्षेत्र में जाएगी, द्वितीय में किस मशीन के साथ कौन सी बी यू, सी यू, वी वी पैट लगेगी, और तीसरे रैंडमाईजेशन में कौन सी ई वी एम किस बूथ पर जाएगी शामिल है। तीनों के समय राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों को आमंत्रित किया जाता है ताकि पारदर्शिता बनी रहे। इसके अलावा मतदान से पूर्व मॉक पोल करवाना भी अनिवार्य होता है। उन्होंने मीडियाकर्मियों का आहवान किया कि वे मतदाताओं को मतदान करने के लिए जागरूक करे ताकि लोकतत्र मजबूत रहे।

उन्होंने बताया कि जिला में 18 से 19 वर्ष के बीच के युवा मतदाता तथा महिलाओं को अपना वोट बनवाने और उसका प्रयोग करने के लिए स्वीप गतिविधियां जारी है। इसके लिए स्वीप वाहन गांव-गांव जाकर मतदाताओं को ई वी एम व वी वी पैट के प्रयोग बारे भी डैमो देकर जागरूक कर रहा है। ट्रेनिंग प्रोग्राम में एसडीएम ने पत्रकारों द्वारा पुछे गए सवालों या क्वैरी का समाधान भी किया। निर्वाचन तहसीलदार सुनील भौरीया तथा कानूनगो नरेश कुमार भी कार्यक्रम में उपस्थित रहे।

ट्रेनिंग के लिए विशेष तौर से बुलाए गए मास्टर ट्रेनर अमरीश कुमार, प्रदीप व हर्ष गिरधर ने ई.वी.एम. की तीनों सहायक डिवाईस यानि यंत्र जिनमें बैलेट यूनिट, कंट्रोल यूनिट व वीवी पैट शामिल है, को आपस में कनैक्ट करके चुनाव में वोट डालने हेतु कैसे तैयार किया जाता है, बारे विस्तार से डैमो दिया। उन्होंने बताया कि सबसे पहले बैलेट यूनिट को वीवी पैट के साथ और वीवी पैट को कंट्रोल यूनिट के साथ जोड़ा जाता है और फिर ईवीएम को वोट के लिए तैयार किया जाता है।

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